पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

हर दिन 200 सिलेंडर की खपत:तीन दिन से जिले को लिक्विड ऑक्सीजन नहीं मिली, पीथमपुर से रोज बुलवा रहे 100 सिलेंडर

झाबुआएक महीने पहले
  • कॉपी लिंक
पीथमपुर प्लांट से दोबारा बुलवाने पड़ रहे सिलेंडर। हर दिन सौ जंबो सिलेंडर आ रहे हैं। - Dainik Bhaskar
पीथमपुर प्लांट से दोबारा बुलवाने पड़ रहे सिलेंडर। हर दिन सौ जंबो सिलेंडर आ रहे हैं।

जिला ऑक्सीजन के मामले में आत्मनिर्भर बन चुका है। अंतरवेलिया में प्लांट शुरू करने के बाद जिले के मरीजों के लिए पर्याप्त ऑक्सीजन का उत्पादन हुआ और दूसरे जिलों की भी मदद की गई। लेकिन अचानक इस सिस्टम में समस्या पैदा हो गई। 4 मई के बाद से जिले का शासन से लिक्विड ऑक्सीजन नहीं मिली। ऐसे में हर दिन 100 से ज्यादा सिलेंडर का उत्पादन नहीं हो पा रहा। अब सिर्फ 1 दिन का रॉ मटेरियल बचा है, जिससे 100 सिलेंडर उत्पादन किया जा सकता है। जिले में हर दिन औसत 200 सिलेंडर ऑक्सीजन मरीजों को लग रहे हैं। कमी पूरी करने के लिए फिर से पीथमपुर के प्लांट से हर दिन 100 सिलेंडर बुलवाना पड़ रहे हैं।

जिला प्रशासन ने दूसरी बार डिप्टी कलेक्टर डॉ. अभयसिंह खरारी की ड्यूटी पीथमपुर प्लांट से ऑक्सीजन भेजने में लगाई है। पिछले महीने भी 15 तारीख से 10 दिनों तक ये सिस्टम चलाया था, लेकिन जिले में उत्पादन पर्याप्त होने के बाद बंद कर दिया था। अब 4 दिन से फिर सिलेंडर बुलवा रहे हैं। खरारी ने बताया, प्लांट से 25 जिलों को ऑक्सीजन मिल रही है। झाबुआ के लिए हमारी टीम सबसे ज्यादा सिलेंडर ले रहे हैं। इसके लिए पूरे समय प्लांट पर हैं और प्रोडक्शन की जानकारी ले रहे हैं। पिछली बार भी इसी तरीके से काम किया था। पूरी कोशिश यही है कि जिले में एक भी मरीज को ऑक्सीजन की कमी न हो। कलेक्टर सोमेश मिश्रा खुद पूरी स्थिति पर नजर रखे हुए हैं।

17 दिन में 26 हजार लीटर मिली
जिले के अंतरवेलिया में निजी ऑक्सीजन प्लांट है। यहां अप्रैल की शुरुआत से ही कच्चा माल नहीं होने से उत्पादन बंद था। कलेक्टर ने 15 अप्रैल को ज्वॉइन करने के बाद सबसे पहले ऑक्सीजन की उपलब्धता पर फोकस किया। अस्पतालों में लग रही ऑक्सीजन का ऑडिट कराया और प्लांट के लिए लिक्विड ऑक्सीजन की उपलब्धता के प्रयास किए। गुजरात से इंदौर, भोपाल और रतलाम के लिए आने वाली लिक्विड ऑक्सीजन में से जिले काे कोटा मिला। 18 तारीख को पहली बार लिक्विड ऑक्सीजन आई। तब से 4 मई तक 26 हजार लीटर रॉ मटेरियल मिल चुका है।

पहले से डिमांड कम, लेकिन जरूरत तो है
कोरोना मरीज मिलने की रफ्तार जिले में 10 दिनों से लगातार कम हुई है। ऑक्सीजन की जरूरत वाले मरीज भी कम हुए। लेकिन अभी भी खपत 200 सिलेंडर हर दिन के आसपास है। ऑक्सीजन प्लांट की प्रभारी अधिकारी डिप्टी कलेक्टर विशा माधवानी ने बताया, आने वाले दिनों में जरूरत और ज्यादा होगी। पेटलावद में ऑक्सीजन पाइपलाइन सिस्टम अस्पताल में बन चुका है। थांदला में भी तैयारी है। यहां मरीज आने पर हर दिन 10 से 12 सिलेंडर लगेंगे। कोशिश की जा रही है कि लिक्विड ऑक्सीजन जल्दी जिले को मिल जाए।

दूसरे जिलों की मदद भी की
जिले में पर्याप्त उत्पादन शुरू होने के बाद अंतरवेलिया प्लांट से आलीराजपुर, रतलाम, मंदसौर जिलों को भी सिलेंडर भेजे गए थे। लेकिन अब अचानक उत्पादन कम हो गया। जिले के निजी अस्पताल भी फिलहाल इसी प्लांट और प्रशासन से मिलने वाली ऑक्सीजन पर निर्भर हैं।

उम्मीद है लिक्विड ऑक्सीजन मिल जाएगी
अभी तक हमारे पास सरप्लस ऑक्सीजन थी। लेकिन तीन-चार दिनों से लिक्विड ऑक्सीजन नहीं मिलने से उत्पादन प्रभावित हुआ है। इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं। उम्मीद है, जल्दी ही आवंटन मिल जाएगा।
विशा माधवानी, डिप्टी कलेक्टर

खबरें और भी हैं...