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32% ज्यादा बारिश:नदी-तालाब लबालब, मरम्मत नहीं हुई इसलिए झिरावदिया का ये तालाब नहीं भरा

झाबुआ2 महीने पहले
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  • गांव वालों ने बताया जब से बना तब से फूटा हुआ है, मरम्मत हो जाए तो रबी की खेती कर सकेंगे हम

इस साल जिले में औसत से 32.59 प्रतिशत ज्यादा पानी आया। लगभग सभी नदी, नाले, तालाब और दूसरी जल संरचनाएं लबालब भरी हुई हैं। लेकिन कुछ ऐसे हैं जिनके लिए ये पानी भी कम पड़ गया। ऐसा ही एक तालाब है झकेला ग्राम पंचायत में लगभग 8 साल पहले बना निस्तार तालाब। ये बना तबसे फूटा हुआ है।

रिकार्ड में तालाब है तो कागजों में किसानों को फायदा भी मिल रहा है। लेकिन आसपास के किसान बताते हैं, अगर तालाब सुधर जाए तो रबी की खेती कर पाएंगे। अभी तो साल में सिर्फ एक बार ही फसल ले पा रहे हैं। इस तालाब के आसपास दो गांवों की सीमा है। तकरीब 40 से 50 किसानों को इस तालाब से फायदा मिल सकता था। तालाब बनने के बाद अफसरों ने कभी आकर नहीं देखा कि इसमें पानी भर भी रहा है या नहीं। झिरावदिया गांव ग्राम पंचायत झकेला में आता है। यहां नेतागिरी ज्यादा है और गांव वाले डरे रहते हैं। ऐसे में हमें ये कहानी बताने वाले किसानों ने पहली शर्त ये रखी कि उनके नाम सामने नहीं आना चाहिए। किसानों ने बताया, तालाब में पानी के नाम पर सिर्फ छोटा डाबरा भरा रहता है। कुछ दिन में ये भी खत्म हो जाएगा। अभी मवेशी यहां घास खाने जाते हैं। अफसरों का कहना है, रिकार्ड निकालकर देखना होगा।

कई बांध में कड़ी-शटर नहीं लगे, कुछ में आसपास से कटाव हो गया : बारिश का पानी रोके रखने में कुछ दूसरी परेशानियां भी हैं। अब बारिश बंद हो चुकी है। नदियों में धीरे-धीरे बहाव कम हो रहा है। ऐसे में इनमें कड़ी-शटर्स लगाना होती है। लेकिन कई बांध के कड़ी-शटर बचे ही नहीं है। हर साल ये मुद्दा बैठकों में उठाया जाता है, लेकिन हल नहीं निकलता। कुछ बैराज ऐसे भी हैं जिनके आसपास की से कटाव होने से उनमें पानी नहीं रुक पा रहा। इनकी मरम्मत बरसों से नहीं की गई।

ये हाल तब, जब बड़े तालाब ओवरफ्लो हो रहे

जिले में जल संसाधन विभाग की दो सबसे बड़ी संरचनाएं धमोई तालाब और गुलाबपुरा तालाब है। धमोई तालाब की क्षमता 6.66 एमक्यूएम (मिलियन क्यूबिक मीटर) और गुलाबपुरा की 3.79 एमक्यूएम है। दोनों तालाब पूरी तरह से भर चुके हैं। मॉनसून के आखिरी दौर में ये लबालब हुए, क्योंकि दोनों राणापुर के आसपास है और यहां बारिश जिले के दूसरे इलाकों के मुकाबले कम हुई। सबसे बड़ा डेम माही पूरा भर चुका है। अनास नदी सहित दूसरी सारी नदियों में तेज बहाव है। कारण ये कि जिले की औसत बारिश 773.4 मिमी है और इससे 10 इंच ज्यादा पानी बरस गया। हालांकि राणापुर ब्लॉक ही ऐसा रहा, जहां बारिश औसत का आंकड़ा नहीं छू पाई। यहां 760 मिमी बारिश रिकार्ड की गई।

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