नवरात्रि विशेष:देवास से आए शिक्षक ने गांव में 52 साल पहले विराजित की थी चामुंडा माता की प्रतिमा

झाबुआ2 महीने पहले
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  • तब से मन्नतें लेकर दूर-दूर से गांव में दर्शन को पहुंचते हैं श्रद्धालु
  • ग्राम खरड़ू बड़ी में माता की स्थापना के बाद से शुरू हुए थे आयोजन, अब तक चली आ रही पंरपरा, मान्यता-हर घड़ी अलग रूप में दर्शन देती है मां चामुंडा

जिला मुख्यालय से 12 किमी दूर ग्राम खरड़ू बड़ी में चामुंडा माता का मंदिर इन दिनों आस्था का केंद्र बना हुआ है। नवरात्र में यहां दूर-दराज से भक्त माताजी के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। भक्तों की मान्यता है कि मां उन्हें यहां हर घड़ी अलग रुप में दर्शन देती है। मां चामुंडा के दर्शनों से उनकी सारी मन्नतें पूरी होती है। मंदिर के सेवक कैलाश पाटीदार बताते है कि खरड़ू बड़ी गांव में 52 साल पहले देवास से एक शिक्षक खुशीराम शर्मा का तबादला हुआ था।

वे स्कूल के हेडमास्टर होने के साथ ही कलाकार थे। देवास से आए थे और मां चामुंडा के भक्त थे। उस समय गांव सहित आसपास के क्षेत्रों में माताजी का कोई मंदिर नहीं हुआ करता था। ऐसे में शिक्षक शर्मा ने ग्रामीणों को एकत्रित किया और उनसे माताजी की प्रतिमा स्थापित करने की बात कही। इस पर ग्रामीण एकमत हुए और जनसहयोग से राशि एकत्रित की गई। इसके बाद शिक्षक ने ग्रामीणों के साथ मिलकर चामुंडा माता का मंदिर बनाया।

मंदिर में विराजित की चामुंडा मां की 6 फीट की प्रतिमा

मंदिर में ग्रामीणों ने मां चामुंडा की 6 फीट की प्रतिमा विराजित की। इस प्रतिमा को बनाने में रेत, तार व सीमेंट का उपयोग किया गया। इसके साथ ही माताजी के सामने एक शेर भी बनाया गया। कहा जाता है कि जिलेभर में मां चामुंडा की इतनी बड़ी प्रतिमा और ऐसा आकर्षक शेर कहीं और नहीं है। पूर निर्माण कार्य में उस समय 1500 रुपए का खर्च आया था। स्थापना व भंडारे के लिए 1 हजार रुपए खर्च किए गए थे। जिसकी कैशबुक आज तक मंदिर के सेवक कैलाश पाटीदार के पास उपलब्ध है।

तब से यहां नवरात्रि पर विशेष आयोजन किए जाने लगे। 52 साल से यहां भक्त अपनी मनकोमनाएं पूरी होने पर दूर-दराज से दर्शन के लिए पहुंचते हैं। शारदीय और चेत्रिय नवरात्रि में गरबों का आयोजन होने लगा। बड़ी संख्या में यहां लोग गरबा देखने के लिए भी पहुंचते ही। माता रानी का पंडाल सजाया जाता है। दो दशक पहले यहां इस मंदिर के साथ ही शिव परिवार, हनुमान जी और भैरव जी की स्थापना की गई और इसे भव्य मंदिर का रुप दिया गया। लेकिन मां चामुंडा की प्रतिमा से किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं की गई। अब इस मंदिर में राजेश महंत सुबह और शाम 7.30 बजे आरती करते है। मंदिर के देखरेख करते है।

जोगड़ माता मंदिर की भी हुई स्थापना

मां चामुंडा देवी के साथ ही गांव के ही तालाब में खुदाई के दौरान पत्थर की प्राचीन मूर्तियां निकली, जो खंडित थी। इन मूर्तियों को शिक्षक खुशीराम शर्मा ने सही रुप देकर विराजित किया। इसे जोगड़ माता मंदिर कहा जाने लगा। यहां भगवान शिव और पार्वति की नंदी पर बैठी प्रतिमाएं विराजित है। इन मूर्तियों के यहां स्थापित होने के बाद से ही गांव में भक्तिमय वातावरण का भी निर्माण हुआ।

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