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  • There Were 27 Deaths In The First Wave, 26 Of These In Urban Areas, Half Of The 14 Deaths In April Occurred In Villages, Most In Jhabua

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कोराेना से हुई मौतों का ऑडिट:पहली लहर में 27 मौत हुई थी, इनमें से 26 शहरी क्षेत्रों में, अप्रैल की 14 मौतों में से आधी गांवों में हुई, सबसे ज्यादा झाबुआ में

झाबुआ10 दिन पहले
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जिला अस्पताल में शव वाहन एक ही है। ऐसे में कोरोना के अलावा अन्य कारणों से मौत पर शव जाने में परेशानी होती है। निजी वाहनों से शवों को ले जाना पड़ रहा है। - Dainik Bhaskar
जिला अस्पताल में शव वाहन एक ही है। ऐसे में कोरोना के अलावा अन्य कारणों से मौत पर शव जाने में परेशानी होती है। निजी वाहनों से शवों को ले जाना पड़ रहा है।
  • पिछली बार मृतकों में 45 से कम उम्र का सिर्फ एक, इस लहर में ऐसी चार मौत

सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक जिले में अब तक कोरोना से 42 मौत हुई हैं। इनमें से 28 मौत मई 2020 से मार्च 2021 तक यानी वायरस के पहले स्ट्रेन के कारण और बाकी 14 मौत अप्रैल में वायरस के दूसरे स्ट्रेन के कारण। दोनों लहर में सबसे बड़ा अंतर ये है कि गांवों में भी काफी मौत हुई।

मार्च तक हुई 28 मौत में से 27 शहरी क्षेत्रों में हुई और एक गांव में। जबकि अप्रैल की 14 मौत में से आधी छोटे गांवों में दर्ज की गई। 44 साल से कम उम्र के लोगों की मौत भी इस बार ज्यादा हुई। मार्च तक ऐसी सिर्फ 1 मौत थी, लेकिन अप्रैल में ऐसी 4 मौत हो गई। इनमें 11 साल का बालक भी शामिल है। आश्चर्य की बात ये है कि सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार अभी तक मेघनगर और पेटलावद कस्बे में कोई मौत नहीं हुई।

पोर्टल पर अपडेट होने वाले मौत और बीमारों के आंकड़ों को लेकर सवाल भी है। पहले ये होता था कि जिले के बाहर होने वाली मौत की जानकारी यहां आती थी और उन्हें रिपोर्ट में जोड़ दिया जाता था। लेकिन इस बार ऐसा नहीं हो रहा। झाबुआ शहर की 5 से ज्यादा मौत ऐसी हैं, जो यहां के मृतकों की लिस्ट में शामिल नहीं है।

अफसरों का कहना है, वो संबंधित जिले में दर्ज हो जाती है, जहां मरीज का उपचार चल रहा था। हालांकि स्वास्थ्य विभाग अपनी रिपोर्ट में जिले के बाहर इलाज करा रहे मरीजों की जानकारी दिखाता है, लेकिन उनकी मौत की नहीं। रिकॉर्ड के मुताबिक सबसे ज्यादा जान झाबुआ शहर के लोगों की गई। अब तक के 42 मृतकों में से 19 झाबुआ शहर के हैं। लगभग 45 प्रतिशत।

चिंता इसलिए

इससे ये साबित होता है कि इस बार संक्रमण का अच्छा खासा असर गांवों में है। पहले ये माना जा रहा था कि सिर्फ शहरी लोग कोरोना से प्रभावित हो रहे हैं। सरकारी रिकॉर्ड के अलावा दर्जनों मौत गांवों में कोरोना लक्षण के बाद हो चुकी है। मरने वालों में 60 साल से ज्यादा उम्र के 8, 45 से 59 साल के 2 और 44 साल या इससे छोटे 4 लोगों की मौत हुई।

विधायक ने मांग की, गांवों में आरटीपीसीआर टेस्ट किए जाएं

विधायक कांतिलाल भूरिया ने भी कोरोना संक्रमण गांवों में ज्यादा फैलने की बात कही है। उन्होंने गांवों में ज्यादा से ज्यादा आरटीपीसीआर टेस्ट कराने की मांग की है। उन्होंने कहा, ग्रामीण क्षेत्रों से फोन पर लोग जानकारी दे रहे हैं। वहां बुखार और सर्दी, जुकाम में कई मरीज हैं। पंचायतों के मृत्यु प्रमाण पत्र बनने की बढ़ती संख्या से भी साफ होता है कि मौतें ज्यादा हो रही हैं। इसे लेकर विधायक भूरिया ने एक पत्र मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान काे लिखा है। इसके अलावा आरटीपीसीआर जांच की सुविधा जिले में ही करने की मांग भी उन्होंने की। सीटी स्कैन की व्यवस्था जिला मुख्यालयों के सरकारी अस्पतालों में करने की मांग भी की।

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