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परंपरा पर कोरोना का असर:भीलवट बाबा के स्थल पर आज रात मेला नहीं लगेगा, सिर्फ मन्नत उतार सकेंगे

आंबुआ2 महीने पहले
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  • ढेचकुंडी में बरगद के पेड़ के नीचे वर्षों से चली आ रही परंपरा पर कोरोना का असर

ग्राम पंचायत आंबुआ के अंतर्गत ढेचकुंडी फलिया में विशाल बरगद के पेड़ के नीचे आदिवासी समाज की आस्था का केंद्र है। जहां पर भीलवट बाबा की प्राचीन प्रतिमा स्थापित है। यहां प्रतिवर्ष छोटी दीवाली के बाद आने वाली चतुर्दशी की रात्रि में आदिवासी समाज का मेला लगता है। इस बार कोविड-19 महामारी के चलते मेला लगाने की परमिशन नहीं दी गई है। संक्रमण के चलते इस बार शासन की गाइडलाइन के अनुसार सभी कार्यक्रमों में धारा 144 के तहत प्रतिबंध लगा है।

इस कारण मेला व इसमें दुकानें लगाना पूर्णरूप से प्रतिबंधित रहेगा। केवल मन्नतधारी मन्नत उतार सकेंगे। आंबुआ थाना प्रभारी अफजल खान ने बताया इस बात को लेकर पुलिस ने पंचायत व भीलवट बाबा समिति से चर्चा की है। यह बात संज्ञान में ला दी है कि केवल मन्नतधारी ही बाबा भिलट के समाधि स्थल पर उपस्थित रहेंगे। वे अपनी की गई मान को विधि विधान से उतारेंगे।

ऐसी चली आ रही परंपरा

चतुर्दशी की रात को लगने वाले मेले में आदिवासी समाज के लोग एकत्रित होते हैं। मन्नतधारी समस्या का समाधान होने पर अंगारों पर चलकर अपनी मानबाधा पूरी करते हैं। भीलवट बाबा की प्रतिमा की सेवा कर रहे पुजारी दरियावसिंह रावत ने बताया परंपरा सैकड़ों वर्ष पूर्व से चली आ रही है। चौदस की रात्रि में आदिवासी समाजजन बाबा के दर्शन करते हैं। मन्नतधारी अपनी मान पूरी करते हैं।

विपत्ति पर लेते हैं मान

ढेचकुंडी निवासी नारायण सिंह रावत के अनुसार भीलवट बाबा आदिवासी समाज की आस्था का केंद्र है। उन्होंने बताया हमारे समाज के लोगों पर या घर परिवार पर पशुओं पर किसी प्रकार की विपदा आती है। ऐसी स्थिति में समाजजन बाबा के दरबार में आकर विपदा दूर होने की मन्नत लेते हैं। विपदा पूर्णरूप से दूर हो जाती है तो चतुर्दशी की रात को बाबा के दरबार में आकर मन्नत उतारते हैं।

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