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सांसों की अनदेखी:यह जहरीला धुआं जान भी ले सकता है लेकिन सिस्टम इसे राेक नहीं पा रहा

झाबुआ2 महीने पहले
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  • पिछले साल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जहां से सैंपल लिए थे वहीं दिख रही लापरवाही
  • मेघनगर औद्योगिक क्षेत्र की फैक्टरियाें में चिमनी से नहीं, निचली सतह पर पर ही छोड़ रहे

मेघनगर के लोग औद्योगिक क्षेत्र की फैक्टरियाें से निकलने वाले जहरीले धुएं से परेशान हैं। उनकी सांसों में ये धुआं जहर बनकर उतर रहा है। सबसे ज्यादा परेशानी पुराने टायर जलाकर ऑयल बनाने वाले प्लांट से है। मेघनगर औद्योगिक क्षेत्र में अभी ऐसे तीन प्लांट हैं, जिनमें से एक चल रहा है। दावा किया जाता है कि नियमों का पालन हो रहा है। धुआं चिमनी से सहारे ऊपर की ओर छोड़ा जा रहा है, लेकिन सच इससे अलग है। फोटो में साफ दिख रहा है कि जितना धुआं चिमनी से निकल रहा है, उससे कई गुना ज्यादा पर्यावरण के निचले स्तर पर जा रहा है।

ये धुआं वाम ऊर्जा नाम की फैक्टरी से निकल रहा है। साल 2019 में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने वाम ऊर्जा सहित सेफ शाइन, कृष्णा फॉस्केम, ट्रेंट केमिकल्स, राठौर फार्मा, मेघनगर फार्मा, अनन्या इंडस्ट्रीज से सैंपल लिए थे। इनकी रिपोर्ट क्या आई, ये अभी तक औद्योगिक केंद्र विकास निगम के अफसरों को तक को नही पता। जूनियर इंजीनियर पी सिंह बताते हैं, हमारी ओर से मापदंड तय है। उसका पालन कराने का प्रयास करते हैं। अगर कहीं गड़बड़ है तो कार्रवाई करेंगे।

फैक्ट्स

  • मेघनगर औद्योगिक क्षेत्र में 148 छोटी-बड़ी फैक्ट्रियां हैं।
  • इनमें से 75 अभी चल रही हैं।
  • टायर पायरोलिसिस (टायर से ऑयल निकालने का प्लांट) अभी 1 ही चल रहा है।
  • 15 हजार से ज्यादा की आबादी मेघनगर में औद्योगिक वायु और जल प्रदूषण से परेशान है।
  • सर्दियों में ये समस्या बढ़ जाती है।

ट्रीटमेंट प्लांट बन रहा, पर ये सिर्फ जमीनी प्रदूषण के लिए
औद्योगिक क्षेत्र में 9.36 करोड़ की लागत से एक सीईपीटी (कॉमन एफल्यूएंट ट्रीटमेंट प्लांट) बनाया जा रहा है। ये 2018 में शुरू हुआ और मार्च 2021 में बनकर तैयार होगा। मेघनगर में जहरीले धुएं के अलावा आसपास के नदी-नालों में केमिकल वेस्ट छोड़ने से भी प्रदूषण काफी बढ़ा है। दावा है कि प्लांट बनने के बाद ये कम होगा। लेकिन वायु प्रदूषण पर इसका कोई असर नहीं होगा।

शिकायतें, धरना-प्रदर्शन भी हुए, सब में चिंता कम राजनीति ज्यादा साबित हुई
मेघनगर के लोगों की ये परेशानी कई साल से है। 6 साल पहले गुजरात में टायर से ऑयल बनाने वाले प्लांट बंद हुए तो कुछ मेघनगर में आ गए। हालांकि प्रदूषण इसके पहले से ही हो रहा था। कई बार लोग आधी रात को धुएं की गंध के कारण डरकर घरों से बाहर निकल आए। कईयों को सांस लेने में दिक्कत होने लगी और लोग ये सोचकर डर गए कि उनका हश्र भोपाल गैस कांड पीड़ियों की तरह न हो जाए।

अब तक कोई कोशिश सफल नहीं हो पाई
प्रदूषण को लेकर 2015 की जून में कांग्रेस ने विरोध प्रदर्शन का सिलसिला शुरू किया। इस दौरान पथराव की घटना भी हुई। आसपास रहने वाले लोगों में आक्रोश था तो ये निकलने लगा। लेकिन बाद में ये आंदोलन अचानक बंद हो गया। जब भी कोई अफसर यहां आता है तो लोग प्रदूषण की बात सामने रखते हैं। जनता की सुनवाई के लिए शिविर भी लगाए गए लेकिन अब तक कोई भी कोशिश सफल नहीं हो पाई है।

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