जिले में नाबालिग लड़कियाें के 16 मामले ही पेंडिंग बचे:वधु मूल्य से बचने के लिए नाबालिग लड़कियों को बहलाकर कर ले जाते हैं युवक

झाबुआएक महीने पहले
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बालिकाओं को जागरूक करने अभियान चलाया जा रहा है। - Dainik Bhaskar
बालिकाओं को जागरूक करने अभियान चलाया जा रहा है।
  • एक साल में ऐसी 80 लड़कियाें को पुलिस ने परिजनों से मिलवाया
  • महिला संबंधित अपराधों काे सुलझाने में झाबुआ पुलिस अन्य जिलों से अव्वल

महिला संबंधित अपराधों को सुलझाने में झाबुआ पुलिस अव्वल है। इनमें सबसे ज्यादा कार्रवाई पुलिस नाबालिग लड़कियों के अपहरण के मामले में कर रही है। बीते एक साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो जिलेभर में करीब 90 नाबालिग लड़कियाें के अपहरण के मामले जिलेभर में दर्ज हुए थे।

इन मामलों को एसपी आशुतोष गुप्ता ने गंभीरता से लिया और सभी प्रकरणों के निराकरण के लिए महिला थाना प्रकोष्ठ के डीएसपी आशिष पटेल को नोडल अधिकारी बनाया। इसके बाद पटेल ने इन मामलों में कार्रवाई शुरू की और पुलिस ने 80 नाबालिग लड़कियों को ढूंढ निकाला। ये आंकड़ा अन्य जिलों की पुलिस कार्रवाई से ज्यादा है। बीते दिनों हुई सीएम की वीसी में ये बात सामने आई है।

डीएसपी आशिष पटेल बताते हैं कि झाबुआ और आलीराजपुर जैसे आदिवासी बाहुल्य जिलों में नाबालिग लड़कियों के अपहरण के मामले ज्यादा सामने आते है। क्योंकि बाहुल्य जिलों में वधु मूल्य देना पड़ता है। कई मामलों में देखा गया है कि युवक नाबालिग लड़की काे बहला फुसलाकर इसलिए ले जाते हैं क्योंकि वे वधु मूल्य देना पड़ता है। इसके साथ ही शिक्षा की कमी भी इसका एक बड़ा कारण है।

मुस्कान अभियान : डेढ़ माह में ढूंढी 17 बालिकाएं, और की भी तलाश

डेढ़ माह तक मुस्कान अभियान चलाया गया। इसमें सभी थानों के रिकॉर्ड खंगाले गए, जिसमें देखा गया कि कहां कितने केस हैं। अभियान के दौरान डेढ़ माह में करीब 17 बालिकाओं को पुलिस अलग-अलग स्थानों से ढूंढकर लाई और उन्हें परिजन के सुपुर्द किया। कई मामलों में ये भी सामने आया कि परिजन उनकी बेटी को मरा हुआ मान चुके थे। बावजूद इसके पुलिस ने अपने प्रयास किए और उन्हें ढृूंढ निकाला। दाे मामले... बेटी को ही भूल चुके थे

8 साल बाद मिली नाबालिग
पेटलावद थाना क्षेत्र:
यहां साल 2013 में एक नाबालिग की गुमशुदुगी दर्ज कराई गई थी। 8 साल से बालिका का कोई पता नहीं चल पा रहा था। परिजन भी उसके मिलने की आस छोड़ चुके थे। पुलिस ने इस संबंध में जानकारी जुटाई और गुजरात से नाबालिग को ढूंढकर लाई, परिजन के सुपुर्द किया।

भानघड़ी प्रथा से बचने भागे थे युवक-युवती

कल्याणपुरा थाना क्षेत्र: यहां दो साल पहले एक नाबालिग के अपहरण का मामला सामने आया था। दो साल बाद पुलिस ने नाबालिग को झाबुआ से ढूंढा। इसमें सामने आया कि युवती-युवक के साथ रहने के लिए तैयार थी। लेकिन परिवार वाले नहीं चाहते थे। भानघड़ी प्रथा से बचने के कारण दोनों ने भाग कर शादी कर ली, जिससे उन्हें वधु मूल्य न देना पड़े।

रोजाना स्कूलों में बालिकाओं को कर रहे जागरूक

झाबुआ एसपी आशुतोष गुप्ता ने बताया अपहरण, कम उम्र में विवाह, अपराध आदि से बालिकाओं को जागरूक करने के उद्देश्य से जिले में अभियान चलाया जा रहा है। जिसमें पुलिस टीम रोजाना विभिन्न स्कूलों में जाती है। यहां बालिकाओं को समझाइश दी जाती है कि उन्हें इस तरह के मामलों से किस तरह बचना है और ऐसी स्थिति में क्या करना होता है।

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