गांव के मंदिर पहुंचकर देवता को देशी शराब चढ़ाई:आदिवासी नवरात्रि के 9 दिन ज्वारे लगाकर पता करते हैं, कैसी होगी गेहूं की फसल

झाबुआ2 महीने पहले
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नवरात्रि को लेकर आदिवासी समाज की भी अपनी एक परंपरा है। गेहूं की बोवनी के पहले नवरात्रि के नौ दिनों तक मिट्‌टी या लकड़ी के पात्र में गेहूं की फसल उगाई जाती है। नवमी वाले दिन इसे नदी या तालाब में विसर्जित किया जाता है। इन ज्वारों को देखकर पता लगाते हैं कि इस साल गेहूं की फसल कैसी रहेगी। विसर्जन के पहले गांव के मंदिर पहुंचकर देवता को देशी शराब चढ़ाई जाती है और मुर्गों की बलि दी जाती है।

भगोर गांव में गुरुवार को विसर्जन किया गया। सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर चुके गांव के युवा मुन्ना मेड़ा ने बताया, आदिवासी अपनी परंपराओं को लेकर काफी गंभीर होते हैं। हर साल परंपरा निभाने के लिए गांव पहुंचते हैं। गांव के तड़वी प्रेमचंद भाबोर मल्ला, बड़वा टीटू गणावा, सरपंच काश्मीर भाबोर, लक्ष्मण मेड़ा सहित दूसरे लोग भगोर बाबा के मंदिर पर विसर्जन के पहले पहुंचे। मुन्ना ने बताया, लगभग हर गांव में इस तरह का परंपरागत आयोजन होता है। दीपावली के आसपास और होली के समय भी कई तरह की परंपराएं निभाई जाती हैं।

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