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बारिश की खेंच:शहर के पेयजल के लिए धमोई तालाब से तीन दिन पहले पानी छोड़ा

झाबुआएक महीने पहले
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कृषि विभाग का तालाब कई साल बाद पूरी तरह सूखने की कगार पर है। - Dainik Bhaskar
कृषि विभाग का तालाब कई साल बाद पूरी तरह सूखने की कगार पर है।
  • किसानों को चिंता बढ़ी, इधर, प्रशासन की एडवाइजरी, फसलों पर नीम तेल छिड़कें

जिले में बारिश की खेंच किसानों और आम लोगों को परेशान कर रही है। शहर के पेयजल सप्लाय में दिक्कत आने लगी है। किशनपुरी और धरमपुरी के बैराज में पर्याप्त पानी नहीं है। ऐसे में तीन दिन पहले धमोई तालाब से पानी छोड़ा गया। धमोई तालाब में भी वेस्टवेयर में लगभग ढाई फीट पानी ही था। सीमित मात्रा में पानी होने से बहाव बंद हो गया और तीन दिन में भी पानी नहीं पहुंच सका।

उम्मीद ये की जा रही है कि एक सप्ताह तक बैराज के पानी से सप्लाय हो जाएगा। इस दौरान 11 जुलाई से मानसूनी बारिश हो सकती है। ऐसा हुआ तो पेयजल नियमित हो पाएगा। उधर, किसानों की चिंता लगातार बढ़ रही है। मंगलवार को जिले के कुछ इलाकों में बारिश हुई, लेकिन अधिकतर क्षेत्र सूखे रहे। जहां थोड़ा पानी मिला, वहां पौधों की रंगत बदल गई। प्रशासन ने भी किसानों के लिए एडवाइजरी जारी की है। उन्हें फसलों पर नीम का तेल छिड़कने को कहा है, ताकि कीट प्रकोप से बचा जा सके।

बोवनी 7 दिन से नहीं बढ़ी - जिले में खरीफ फसल की बोवनी का लक्ष्य 1,89,080 हेक्टेयर रखा गया है। एक सप्ताह पहले तक 1,39,258 हेक्टेयर में बोवनी हो चुकी थी। बारिश नहीं होने से एक सप्ताह से बोवनी नहीं बढ़ सकी। ये लक्ष्य का 73.65 प्रतिशत है।

फसल बचाने के ये उपाय
खेत में नमी बनाए रखने की कोशिश करें। निंदाई-गुड़ाई करते रहें। फसलों के बीच डोरा चलाएं, ताकि खरपतवार खत्म हो। यूरिया घोलकर खड़ी फसल में छिड़काव करें। मेड़ को साफ सुथरा रखें। मुख्य फसल के किनारे पर गार्ड फसल के रूप में मूंगफली, लोबिया की एक कतार लगाएं। प्रारंभिक तोर पर नीम तेल का छिड़काव करें। कीट प्रकोप ज्यादा होने पर कीटनाशक का छिड़काव करें।

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