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अहमदाबाद से पधारे दिनेश भाई ने धर्मसभा में कहा:जैनों का सबसे बड़ा पर्व पर्युषण है, सबसे बड़ा सूत्र कल्पसूत्र है

मेघनगर11 दिन पहले
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आत्मा के वास्तविक रूप और लक्षण धर्मों को पहचानना ही पर्युषण पर्व है। महापर्व के 8 दिनों में 5 कर्तव्य एवं 11 विशेष नियमों का पालन करें। इनमें तपक्षचर्या, सुपात्र दान, दया दान, अहिंसा पालन, परमात्मा पूजन, पौषध, सामायिक, प्रतिक्रमण, चैत्य परिपाटी, प्रभु भक्ति शामिल है। उक्त उद्गार अहमदाबाद से पधारे दिनेश भाई ने धर्मसभा में व्यक्त किए। पर्व के चौथे दिन कल्पसूत्र के लाभार्थी सुजान मल राजेंद्र कुमार प्रमोद कुमार लुणावत परिवार ने वासक्षेप पूजन कर कल्पसूत्र (शास्त्र) श्री संघ की उपस्थिति में जय घोष के साथ उपाश्रय में कल्पसूत्र वाचन करने पधारे दिनेश भाई को वोहराया। कल्पसूत्रजी की आरती उतारी गई।
24 तीर्थंकर परमात्मा का चरित्र वर्णन है
कल्पसूत्रजी का वाचन करते हुए बताया जैनों का पर्व में सबसे बड़ा पर्व पर्युषण पर्व है और सूत्र में सबसे बड़ा सूत्र कल्पसूत्र है। आचार्य भद्रबाहु स्वामी ने कल्पसूत्र की रचना की थी। कल्पसूत्र सुनने और सुनाने वाला परमात्मा की आज्ञा अनुसार चलने वाला होना चाहिए। भगवान महावीर व गुरु के प्रति श्रद्धावान होना चाहिए।

इस सूत्र में 24 तीर्थंकर परमात्मा का चरित्र वर्णन है। त्रिस्तुति संघ अध्यक्ष शांतिलाल लोढ़ा ने बताया परमात्मा व गुरुदेव की अंग रचना व प्रभावना का लाभ कांताबाई चंदनमल बाफना व जिनेंद्र कुमार भंडारी जयेश भंडारी (मदरानी वाले) सुजान मल राजेंद्र कुमार लुणावत व राजेंद्र कुमार सौरभ कुमार काठी परिवार ने लिया।

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