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हरियाणा का याेगदान अप्रतीम:मेरठ से पहले विद्राेह हरियाणा में हुआ : पुनिया

महू2 महीने पहले
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भारतीय स्वाधीनता संग्राम में हरियाणा का याेगदान अप्रतीम रहा है। 1857 के पहले विद्राेह के संदर्भ में मेरठ का उल्लेख मिलता है। जबकि मेरठ के पहले अंबाला में प्रथम विद्राेह हुआ था। इस विद्राेह में 50 अंग्रेजाें काे बंदी बना लिया गया था। यह बात डाॅ. बीआर आंबेडकर विवि, हेरिटेज साेसायटी पटना व कुरुक्षेत्र विवि हरियाणा द्वारा संयुक्त रूप से आयाेजित आजादी के अमृत महाेत्सव के तीसरे व्याख्यान में प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में हरियाणी के याेगदान विषय पर आयाेजित संगाेष्ठी काे संबाेधित करते हुए प्राे. महासिंह पूनिया, निदेशक युवा एवं सांस्कृतिक प्रभाग कुरूक्षेत्र विवि ने कही।

पुनिया ने कहा कि हरियाणा का गठन 1966 में हुआ है। लेकिन भारतीय स्वाधीनता संग्राम के समय रियासतों में बसे हरियाणा का योगदान अमिट और अमूल्य है। उन्होंने 12 बड़ी लड़ाइयों का तथ्याें के साथ विवरण देकर बताया कि किस तरह अंग्रेजों को हरियाणा के लोगों ने परेशान कर दिया था।

संगोष्ठी के आरंभ में हेरिटेज सोयायटी के महानिदेशक अनंताशुतोष द्विवेदी ने मुख्य अतिथि का परिचय दिया। वहीं डाॅ. नीरू मिश्रा ने अमृत महोत्सव एवं विश्वविद्यालय के बारे में विस्तार से जानकारी दी। मिश्र ने कहा कि राज्यपाल आनंदी बेन के मार्गदर्शन एवं कुलपति प्रो. आशा शुक्ला की अकादमिक एवं प्रशासनिक प्रतिबद्धता से ही यह सब संभव हो पा रहा है। इस दाैरान भरत भाटी, डाॅ. अजय दुबे, प्रो. डीके वर्मा, कुलसचिव अजय वर्मा, डॉ. सुरेन्द्र पाठक, मनोज कुमार संगोष्ठी मौजूद रहे।

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