स्वास्थ्य सुविधा:मध्यभारत अस्पताल में तैयार हाे रही सैंट्रल पैथाेलाॅजी लैब, जल्द शुरू होगी

महू9 महीने पहले
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  • लैब के लिए सीसीटीवी कैमरे व डिस्टिल वाटर प्लांट की मशीनें लगाई

शहर के सबसे बड़े शासकीय अस्पताल में सैंट्रल पैथाेलाॅजी लैब तैयार हाे रही है। इसके बनने से तहसील के 173 गांवों से यहां अस्पताल में उपचार के लिए आने वाले मरीजों काे 32 तरह की जांचें नि:शुल्क कराने की सुविधा मिलेगी। यह लैब एक से दाे माह के भीतर शुरू हाेने की संभावना है।

राज्य शासन द्वारा सैंट्रल पैथाेलाॅजी काे शुरू करने के लिए प्रदेश के अनेक शासकीय अस्पतालाें का चयन किया गया है। इसमें शहर के मध्यभारत अस्पताल का चयन भी हुआ है। जिसके बाद से यहां अस्पताल की पुरानी लैब व प्रभारी के कक्ष के समीप पैथाेलाॅजी बनाने का काम तेज गति से चल रहा है। अभी यहां पर सर्वर, डिस्टिल वाटर प्लांट की मशीनें व सीसीटीवी कैमरे लगाने का काम हुआ है।

जल्द ही जांच करने वाले सभी उपकरण भी लगाए जाएंगे। अस्पताल में यह लैब शुरू हाेने से सबसे ज्यादा फायदा ग्रामीण इलाकाें से इलाज के लिए आने वाले मरीजाें काे हाेगा। क्याेंकि उन्हें अधिकांश तरह की जांचें कराने के लिए निजी लैब जाना पड़ता था। जिसमें हजाराें रु. खर्च हाे जाते थे। लेकिन अब अस्पताल में यह लैब शुरू हाेने से वह 32 तरह की जांचें नि:शुल्क करा सकेंगे।
जनसहयाेग : बाहरी प्रांगण में विकसित किया उद्यान
यहां अस्पताल काे सुंदरता व स्वच्छता प्रदान करने के लिए एसडीएम मिश्रा द्वारा जनसहयाेग से विभिन्न प्रकार के कार्य करवाए गए है। इसमें बाहरी प्रांगण में जर्जर हाे रहे उद्यान काे विकसित कराने के साथ ही वहां पर अब कैंटिंग का संचालन भी शुरू करने की तैयारी है। इसके अलावा अस्पताल के बाहर की बाउंड्रीवाॅल पर वर्टिकल गार्डन भी विकसित किया है। जिससे अस्पताल का नजारा मनमाेहक नजर आता है।

लेटलतीफी : चिकित्सक व पैरामेडिकल स्टाफ नहीं मिला

यहां अस्पताल में एसडीएम अभिलाष मिश्रा द्वारा दाे मंजिला नए मेटरनिटी भवन के ऊपर वाली मंजिल पर आठ बिस्तर की आईसीयू यूनिट भी तैयार करवाई है। इसमें जनसहयाेग से मल्टी पैरामीटर मशीन लाकर फिटिंग भी करवा दी है। इसके अलावा पीएम आपात निधि से वेंटीलेटर भी लगा दिया गया है। लेकिन अब यहां पर यूनिट के संचालन के लिए चिकित्सक व पैरामेडिकल स्टाॅफ नहीं मिल रहा है।

जिसके चलते यह यूनिट शुरू नहीं हाे पा रही है। इस यूनिट के संचालन के लिए अस्पताल प्रबंधन द्वारा दाे एमडी डाॅक्टर, छह स्टाॅफ नर्स, तीन वार्ड बाय सहित इतना ही बैकअप स्टाॅफ की मांग कर रखी है। लेकिन अभी तक यह नहीं मिलने से यह यूनिट शुरू नहीं हाे पा रही है। इस यूनिट के शुरू का सबसे बड़ा फायदा यह हाेगा कि गंभीर बीमारी के मरीजाें काे भी इंदाैर रैफर करने की बजाय मध्यभारत अस्पताल में ही उपचार मिल सकेगा।

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