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मन से त्यागें मृत्यु भोज:सामाजिक हैसियत बनाए रखने के नाम पर कर्ज लेकर भी करवा रहे हैं मृत्यु भोज

महू10 महीने पहले
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कई समाजों ने मृत्यु भोज बंद कर दिया है लेकिन फिर समाज के वरिष्ठ स्वीकारते हैं ग्रामीण क्षेत्रों में अब मृत्यु भोज बड़ी संख्या में हो रहे हैं। साथ ही उनका कहना है कि मृत्यु भोज में जिमने आने वालों की संख्या जरूर घटी है। पहले एक हजार से ज्यादा लोगों को मृत्यु भोज पर बुलाते थे जो अब सिमटकर 200 से 250 पर आ गया है। पहले पूरा घर जिमने जाता था लेकिन अब एक घर से एक सदस्य ही रस्म अदायगी करने जाता है। यहां तक की अब पगड़ी रस्म भी सीमित हो गई है। सिर्फ ससुराल और पंचायत की पगड़ी स्वीकार की जा रही है। समाजजन का कहना है कि गांवों में आज भी गरीब व मध्यमवर्गीय परिवार सामाजिक हैसियत बनाए रखने के नाम पर कर्ज लेकर भी मृत्यु भोज करवा रहे हैं। यही नहीं ये लोग शर्म के मारे कर्ज का मामला उजागर भी नहीं करते हैं।

1.आद्यगौड़ ब्राह्मण समाज : अब 200 लोगों को ही जिमा रहे हैं  
आद्यगौड़ ब्राह्मण समाज के संरक्षक अंजनी जोशी बताते हैं कोदरिया व आसपास के गांवों में आज भी मृत्यु भोज हो रहे हैं पर इसका स्वरूप सिमटने लगा है। पहले जाति व गांव के एक हजार लोगों को बुलाया जाता था, वहां अब सिर्फ जाति के 200 से 250 लोगों को जिमा रहे हैं। आज भी कई लोग हैसियत कायम रखने के लिए कर्ज लेकर मृत्यु भोज दे रहे हैं लेकिन शर्म के कारण वो यह बात बताते भी नहीं है। हम जल्द ही मृत्यु भोज पर पूरी तरह प्रतिबंध का प्रस्ताव लेकर आएंगे।

2.  श्री नामदेव क्षत्रिय नारनौली समाज   दान करने के लिए करते हैं प्रेरित
श्री नामदेव क्षत्रिय नारनौली समाज की महिला विंग की संगठन प्रमुख करुणा लोहारिया बताती हैं 20 साल से हमारे समाज ने मृत्यु भोज पर प्रतिबंध लगा रखा है फिर भी यदि कोई मृत्यु भोज देने की तैयारी करता है तो हम उसे रोकते हैं और राशि दान करने के लिए प्रेरित करते हैं। हमारे प्रयास से लोग मृत्यु भोज नहीं देने से बचा रुपया स्कूल, गोशाला सहित जरूरतमंद लोगों की मदद में खर्च करने लगे हैं। जिले में हमारे समाज के 500 से ज्यादा परिवार हैं और हम आयोजन में मृत्युभोज नहीं देने का संकल्प लेते हैं।

3.धाकड़ समाज : 200 लोगों को  ही बुलाने पर देते हैं धर्मशाला
धाकड़ महासभा के प्रदेश सामान्य मंत्री सुरेश नागर बताते हैं हमारे गांव आगरा में तो जो मृत्यु भोज देने के लिए 200 से ज्यादा पत्रिका छपवाता है उसे समाज की धर्मशाला भी आयोजन के लिए नहीं देते हैं। यही स्थिति अन्य गांवों में भी है। कुछ लोग कर्ज लेकर मृत्यु भोज करते हैं जो ठीक नही है। जिले के 22 गांवों में समाज बहुल है और जिले में 8 हजार परिवार हैं। हम हर व्यक्ति को मृत्यु भोज से बचने वाली राशि समाज की धर्मशाला या छात्रावास के लिए दान करने के लिए प्रेरित करते हैं।

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