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लाेकमाता की 225वीं पुण्यतिथि:लाव-लश्कर की बजाय पांच लाेगाें ने फूलांे से सजी पालकी में मां अहिल्या काे विराजित कर भ्रमण कराया

महू2 महीने पहले
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लाेकमाता अहिल्यादेवी की 225वीं पुण्यतिथि पर काेराेना वायरस के चलते लाव-लश्कर के साथ पालकी यात्रा नहीं निकली। अहिल्या उत्सव समिति के शिव शर्मा ने बताया कि इस बार साेशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए पांच लाेगाें ने माेती चाैक से लेकर सीबी गर्ल्स स्कूल चाैराहा स्थित अहिल्या माता प्रतिमा तक पालकी यात्रा निकाली। फूलाें से सजी पालकी के आगे युवक शंख बजाते चल रहा था। यहां अहिल्या माता प्रतिमा के समीप पालकी काे पूजन के लिए रखा गया। दाेपहर 12 बजे तक यहां पूजन चला। इसमें मुख्य रूप से केंटबाेर्ड वार्ड प्रतिनिधि जितेंद्र शर्मा, लक्ष्मीकांता साेढ़ानी सहित दीपेश मित्तल, पंकज वर्मा आदि माैजूद रहे।

हर बार पूरा शहर भ्रमण हाेता था, इस बार माेती चाैक से सीबी गर्ल्स स्कूल चाैराहा : हर बार पालकी यात्रा गाेपाल मंदिर से शुरू हाेकर शहर के मुख्य मार्ग पर करीब दाे किमी भ्रमण करती थी। इस बार रूट भी छाेटा रहा। यात्रा माेती चाैक से शुरू हुई व हरिफाटक चाैराहा, जय-जय राम गली हाेते हुए गर्ल्स स्कूल चाैराहा स्थित अहिल्या माता प्रतिमा स्थल पर समाप्त हुई।

25 साल में पहली बार स्वरूप छाेटा रहा
अहिल्या उत्सव समिति द्वारा 24 साल से पालकी यात्रा निकाली जा रही है। समिति के शर्मा ने बताया की इस बार 25वां साल था। लेकिन पहली बार ऐसा हुआ कि पालकी का स्वरूप इतना छाेटा रहा। वहीं इस बार अहिल्या माता प्रतिमा राेटरी पर फूलाें से विशेष सजावट भी की गई।
मुक्तिधाम में प्रतिमा का पूजन करने पहुंचे युवा
गुजरखेड़ा स्थित मुक्तिधाम परिसर में भी अहिल्या माता की प्रतिमा स्थापित है। यहां भी सुबह एडवाेकेट सर्वेश चाैरसिया आदि युवा पहुंचे व प्रतिमा का पूजन किया।

मंदिर परिसर में ही निकाली अहिल्याबाई की पालकी यात्रा

लोकमाता अहिल्याबाई की 225वीं पुण्यतिथि पर अहिल्या उत्सव का आयोजन किया गया। इसमें अहिल्याबाई की पालकी यात्रा निकाली गई। हर साल यात्रा गाजे-बाजे व राजसी ठाट-बाट के साथ निकाली जाती है लेकिन इस साल कोरोना संक्रमण के चलते पूरे शहर में यात्रा निकालने के बजाय मंगलेश्वर महादेव मंदिर परिसर में ही पूरी सादगी के साथ निकाली गई। यात्रा में भी समिति सदस्य व कुछ भक्त शामिल हुए। यात्रा से पहले मंगलेश्वर महादेव मंदिर में अभिषेक किया गया व नृसिंह मंदिर में पौशाख चढ़ाई गई। बताया जाता है कि अहिल्या माता द्वारा मंगलेश्वर महादेव मंदिर में अभिषेक व नृसिंह मंदिर में पोशाख चढ़ाने की परंपरा निभाई जाती थी। समापन पर प्रसाद वितरण किया गया। अहिल्या उत्सव समिति के अध्यक्ष जगदीशचंद्र माथुर व सचिव विमल यादव ने बताया कि पालकी यात्रा निकालने के दौरान कोरोना प्रोटोकाॅल का पूरी तरह पालन किया गया।

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