पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

कोरोना कर्फ्यू:लाॅकडाउन में मंडी बंद,लौकी हुई खराब, गोशाला पहुंचाई

महूएक महीने पहले
  • कॉपी लिंक
  • डेढ़ लाख की लागत व फायदे का नुकसान

लाॅकडाउन (कोरोना कर्फ्यू) का असर खेती पर पड़ा है और इसका नुकसान किसानों को उठाना पड़ रहा है। गौतमपुरा के पास रूणजी के एक किसान ने डेढ़ लाख की लागत से 10 बीघा में लौकी की फसल लगाई। फसल भी भरपूर हुई लेकिन लाॅकडाउन में मंडी बंद होने से लौकी बिकी ही नहीं।

किसान दो बार गाड़ी भरकर लौकी इंदौर भी ले गया लेकिन मंडी बंद होने से सब्जी तो नहीं बिकी बल्कि ले जाने-लाने का भी खर्च उठाना पड़ा। किसान का कहना है कि बोवनी से लेकर आखिरी तक डेढ़ लाख की लागत व 4 लाख के फायदे का नुकसान हुआ है।
रूणजी के किसान महेश भूत ने शनिवार को सोयाबीन की बोवनी के लिए खेत तैयार करने के लिए खेत जोत दिया। इसके पहले उन्होंने 10 बीघा में लगाई लौकी की बेल व फसल खेत से हटाकर फेंक दी। इस फसल को मवेशियों के खिलाने के लिए गोशाला भेजा गया है। किसान भूत ने बताया मैंने
मार्च के पहले हफ्ते में लौकी के बीज लगाए। अच्छी बारिश होने से बोरिंग में पर्याप्त पानी होने से सिंचाई भी अच्छी की। 60 दिन में फसल आना शुरू हुई तो लाॅकडाउन लग गया और लौकी खेत में ही खराब हो गई।
ये है नुकसान का गणित
किसान के अनुसार 12 हजार रुपए किलो वाले डेढ़ किलो बीज 10 बीघा जमीन में लगाए। 16 हजार रुपए के बीज, 50 हजार रुपए के कीटनाशक व खाद, 80 हजार रुपए निंदाई, जुताई व मजदूरी में लगे। करीब डेढ़ की लागत से फसल तैयार हुई। प्रति बीघा 100 क्विंटल लौकी हुई।

थोक भाव 6 रुपए किलो के हिसाब से 6 लाख रुपए की लौकी बिकती। इसमें से डेढ़ लाख रुपए की लागत छोड़कर व तुड़ाई में होने वाला 50 हजार का खर्च छोड़कर 4 लाख रुपए का फायदा होता, लेकिन नहीं हो सका।
गांव में फ्री बांटी लौकी
किसान की लौकी जब इंदौर मंडी में भी नहीं बिकी तो उसने आसपास के लोगों को संदेश भिजवाया कि खेत पर आकर फ्री लौकी ले जाए। कई लोग ले गए इसके बाद बची हुई लौकी निकालकर गौशाला भिजवाई।

खबरें और भी हैं...