खाकी का खरा रंग:बहलाई गई बेटियों को वापस लाई पुलिस, जिंदगी में लौटी मुस्कान

महू9 महीने पहलेलेखक: संजय पाठक
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  • तहसील के चार थानों ने 14 माह में 65 बेटियों को घर पहुंचाया, अभियान पूरे साल चलाने में जुटी रही पुलिस

बहलाकर ले जाई गई 65 बेटियों को उनके माता-पिता से वापस मिलवाया है हमारी पुलिस ने। प्रदेश सरकार ने इसके लिए महीनेभर का मुस्कान अभियान चलाया लेकिन हमारी पुलिस बेटियों को वापस लाने में पूरे समय लगी रही। 7-8 साल से पेंडिंग केस भी निकाले और तलाश शुरू की तो बेटियों को अपना घर मिल गया।

बेटियों को तलाशने में साधन, संसाधन से लेकर जांच अधिकारी के ट्रांसफर होने से फिर से शुरुआत करने की दिक्कत भी आई लेकिन बेटियों के लौटने की मुस्कान को ही अपना इनाम मानने वाली हमारी पुलिस जुटी रही। किशनगंज थाना पुलिस की इसमें सबसे ज्यादा मेहनत रही टीआई शशिकांत चौरसिया के नेतृत्व में इस थाने ने 14 महीने में 26 बेटियों को घर पहुंचाया।

अभियान में घर वापसी कर चुकी बेटियों की कहानी, बोलीं -पुलिस ने हमें नरक से निकालकर माता-पिता से मिलाया
1. पहले रिश्तेदार ने ज्यादती की, फिर दोस्तों के हवाले कर दिया

कासमाॅस सिटी की 14 साल की नाबालिग के साथ युवा रिश्तेदार ने ही पहले डरा-धमकाकर होटलों में ले जाकर ज्यादती की। फिर दिसंबर 2020 में एक दोस्त के हवाले कर दिया, जिसने दूसरे दोस्त के अदिति विहार स्थित कमरे पर रखा और उसके साथ ज्यादती की। पुलिस ने चौथे दिन ही आशीष उर्फ कृष्णा सलामे, गुलशन द्विवेदी, बबलू यादव, विकास यादव, अरविंद ओझा को गिरफ्तार किया और बच्ची को छुड़ाया।
2. बहलाकर गुजरात ले गया, 3 दिन में वापस लाए
विश्वास नगर निवासी मजदूरी करने वाली 16 साल की किशोरी को वहीं का दीपक यदुवंशी बहला केर गुजरात के मोरबी ले गया। पुलिस ने मुखबिरों की मदद से तीन दिन में दीपक को पकड़कर बच्ची को उसके परिवार को सौ‌ंप दिया।
3. आरोपी के घर के आसपास मुखबिर लगाए तो 20 माह बाद मिली किशोरी
पिगडंबर में ईंट के भट्टे पर काम करने वाली 14 साल की किशोरी को वहीं काम करने वाला भिंड निवासी छोटू उर्फ राजेंद्र पटेल अप्रैल 2019 में बहलाकर साथ ले गया। पुलिस ने भिंड से लेकर कई जगह तलाश किया। आखिर दिसंबर 2020 में जब राजेंद्र भिंड अपने घर लौटा तो मुखबिर से सूचना मिलते ही उसे पकड़ा और किशोरी को माता-पिता के हवाले किया।
एक्सपर्ट व्यू : थ्री एस का फार्मूला अपनाएं
भेरूलाल पाटीदार पीजी काॅलेज के समाजशास्त्र के प्रोफेसर डाॅ. एसजी स्वामी बताते हैं कि हमें थ्री एस यानी संवाद, समझाइश, सतर्कता फार्मूला अपनाना चाहिए। बेटियों से संवाद करें ताकि उन्हें अकेलापन नहीं लगे और वो आपसे हर बात शेयर करें। सुरक्षा से जुड़ी बातों को लेकर समझाइश भी दें। सतर्क रहे और इसमें रिश्तेदारी के नाम पर कोई चूक नहीं करें।

बच्चियों को तलाशने के हमारे प्रयास लगातार जारी हैं
^बच्चियों को तलाशने में हमारे चारों थानों की टीम जुटी है। ताकि बेटियों और उनके परिजन के चेहरों पर मुस्कान आ सके। सबसे ज्यादा बच्चियों को किशनगंज थाने ने घर पहुंचाया है।
विनोद शर्मा, एसडीओपी, महू

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