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  • The People Of Bisakhedi Had Said In The Last Election That If The Road Is Not There, No Vote, That Road Is Not Even Built Yet.

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रोड नहीं तो वोट नहीं:बीसाखेड़ी के लोगों ने पिछले चुनाव में कहा था रोड नहीं तो वोट नहीं, वह सड़क अभी तक भी नहीं बनी

सांवेर-महूएक महीने पहले
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  • ग्रामीणों का कहना 15 महीने कांग्रेस व 7 माह भाजपा सरकार को हो गए पर किसी ने ध्यान नहीं दिया

बीसाखेड़ी, यहां के लोगों ने 2018 के विधानसभा चुनाव में रोड नहीं तो वोट नहीं का नारा दिया था। इसके लिए प्रशासन से लेकर जनप्रतिनिधियों व नेताओं के सामने बात रखी थी। प्रशासन से लेकर दोनों पार्टियों के नेता ग्रामीणों को मनाने पहुंचे। सभी ने कहा कि जल्द रोड बनाई जाएगी लेकिन उसके बाद 15 महीने कांग्रेस की सरकार रही और अभी 7 माह से भाजपा सरकार है पर रोड अब तक नहीं बनी है। इस बारिश में भी ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ा है।

गांव के राजेश जसोदिया कहते हैं कि बीसाखेड़ी से गवला जाने वाली 4 किमी की सड़क आज तक पक्की नहीं बनी है। कभी मांग करने और कभी विरोध करने पर मुरम-गिट्टी पटक दी जाती है। बारिश में यहां कीचड़ होने से निकलना मुश्किल रहता है तो बाकी समय धूल उड़ती रहती है।

2018 के विधानसभा चुनाव में पूरे गांव ने मिलकर रोड नहीं तो वोट नहीं का निर्णय लिया था। एसडीएम कार्यालय में इसका आवेदन दिया तो प्रशासन के अधिकारी गांव आ गए। भाजपा-कांग्रेस के नेताओं को पता चला तो वो भी दौड़े आए। सभी ने मिलकर आश्वासन दिया चुनाव के बाद सबसे पहले गांव की यह सड़क बनाई जाएगी। किसी ने हमारी सुध नहीं ली। इस बार भी दोनों पार्टियों के नेताओं के सामने बात रखी है। दोनों ने आश्वासन दिया है। हमें जिसके आश्वासन में दम नजर आएगा वोट उसी को देंगे।

गांव में हैं 375 मतदाता

पिछले चुनाव में बीसाखेड़ी में 314 वोटर थे। मतदान के बहिष्कार करने का निर्णय वापस लेने के बाद भी यहां कई लोगों ने वोटिंग नहीं की थी। इस बार यहां 375 मतदाता हैं।

बारिश में विद्यार्थियों को साइकिल उठाकर निकलना पड़ता है

गांव के मलखानसिंह बामनिया बताते हैं कि बारिश में इस रोड पर इतना कीचड़ हो जाता है कि साइकिल चलना बंद हो जाती है। विद्यार्थियों को साइकिल उठाकर निकलना पड़ता है।

दिनेश चौधरी बताते हैं कि बाइक में प्लास्टिक के मडगार्ड निकालकर लोहे के बड़े लगवाना पड़ते हैं ताकि कीचड़ नहीं उड़े। कीचड़ इतना होता है कि प्लास्टिक के छोटे मडगार्ड दम नहीं भरते हैं।

चुनाव आने के साथ ही यहां प्रशासन ने कच्ची मुरम डलवा दी है ताकि ग्रामीण हंगामा नहीं करे। मुरम अगली बारिश में फिर कीचड़ बनेगी और ज्यादा परेशानी खड़ी करेगी।

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