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  • These Villages Are Still Untouched From Corona Because The Elderly Live Here In Their Homes, The Family Gets Sunshine Throughout The Day

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ग्राउंड रिपोर्ट:कोरोना से ये गांव अब तक अछूते हैं क्योंकि यहां बुजुर्ग घरों में ही रहते हैं, परिवार दिनभर लेता है धूप

धरमपुरी,थवलाय2 महीने पहले
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  • क्षेत्र के 2 गांवोें का जायजा लेकर जाना यहां के लोगों की सेहत का राज

जिले में कोरोना पाॅजिटिव का आंकड़ा 3000 के पास हो गया है। शहरों के साथ ही ज्यादातर गांवों में भी कोरोना के केस लगातार मिल रहे हैं लेकिन क्षेत्र में कुछ ऐसे गांव भी हैं जहां कोरोना संक्रमण के 8 महीने में एक भी संक्रमित सामने नहीं आया है।

दैनिक भास्कर ने एेसे ही 2 गांवों में पहुंचकर लोगों की दिनचर्या, उनकी सेहत के राज, कोरोना से बचाव का कारण जाना। लोग अपने गांव की आबोहवा के साथ सभी की जागरूकता को ही सेहत का राज बताते हैं। उनके मुताबिक कोरोनाकाल में यहां के रहवासियों ने शहर आना-जाना कम कर दिया है।इन गांवों में अधिकांश किसान हैं जिनका ज्यादातर वक्त खेतों में मेहनत करते हुए बीतता है।

खाने के लिए आर्गेनिक सब्जियां हैं तो दिन में परिवार के लोग खुले में धूप भी सेंकते हैं वहीं तुलसी की चाय पीना कोरोना आने से पहले ही आदत में शामिल है। वहीं थवलाय क्षेत्र के मेडिकल ऑफिसर भी कहते हैं कि यहां के लोग कोरोना संक्रमण के प्रति काफी जागरूक है। इन्होंने गर्म पानी व काढ़ा पीना अपनी आदत में शामल किया हुआ है।

1. जैतपुरा : मेहनतकश होने से बनी हुई इम्युनिटी, बेवजह बाहर नहीं निकलते

जैतपुरा इंदौर महानगर से महज 12 किमी दूर है। गांव में हैदर पटेल (40) मिले उन्होंने बातचीत में बताया कि गांव 95 फीसदी साक्षर है। कोरोना को लेकर यहां सभी जागरूक है। घर से निकलते हैं तो मास्क लगाकर, दूरी भी रखते हैं। बुजुर्गों-बच्चों को घर से नहीं निकलने दे रहे हैं। बुुजुर्ग बाड़े में दिनभर खुले में धूप सेंकते हैं तो बच्चे आंगन में ही खेलते रहते हैं। कैलाश चौधरी (42) व जगदीश चौधरी (40) बोले कि यहां सभी के पास खेती है इसलिए हमारी दिनचर्या सुबह 5 बजे शुरू हो जाती है।

पुरुषों के साथ महिलाएं भी यहां खेत पर दिनभर हाड़-तोड़ मेहनत करती हैं इससे इम्युनिटी बनी रहती है। सरपंच पति हरिसिंह चौधरी ने बताया जागरूकता के लिए मास्क बंटवाए। काढ़ा पीने के बारे मेें बताया। पूर्व सरपंच कुदरत पटेल से बात की तो बताया कि गांव को दो बार सैनिटाइज करवाया। पहले यहां के लोग छोटी-छोटी खरीदी के लिए भी इंदौर चले जाते थे लेकिन अब गांव में ही खरीदी कर रहे हैं।

मास्क की अहमियत इनसे सीखें - बीएमओ हेमंत रघुवंशी बताते हैं जैतपुरा के लोगों की जागरूकता ही है कि वहां अब तक कोरोना का दंश नहीं लग पाया। मास्क लगाकर ही घर से निकलने की जागरूकता यहां से सीखना चाहिए।

  • आबादी -1200
  • दूरी - इंदौर से 12 किमी
  • समय - शाम 5 बजे
  • कोरोना केस - 0

2. थवलाय : गिलोय का काढ़ा और गर्म पानी को दिनचर्या में शामिल किया

कोरोना का संक्रमण शुरू होने के साथ ही थवलाय के लोगों ने गिलोय का काढ़ा और गर्म पानी पीने को दिनचर्या में शामिल कर लिया थ। इसी कारण कोरोना यहां से दूर है। यह कहना है गांव के हरिनारायण यादव (62) का। किसान यादव सुबह एक घंटा योग करते हैं व पत्नी सजन के साथ टहलने जाते हैं। गांव के और भी जोड़े घूमने जाते हैं। दुलेसिंह ठाकुर (65) बताते हैं गांव में अधिकांश लोग पहले से ही गर्म पानी पीते हैं, कोरोना के बाद तो सभी लोगों ने गर्म पानी पीना शुरू कर दिया है।

लक्ष्मीबाई ठाकुर (62) बताती हैं हर घर में रात को सोने से पहले हल्दीवाला दूध पी रहे हैं। चाय में तुलसी के पत्ते जरूर डालते हैं। आर्गेनिक खेती की ताजी सब्जियां भी सेहत का राज है। उप सरपंच श्यामबाई लखन ठाकुर बताती हैं यहां के लोग इतने जागरूक हैं कि दीपावली पर ढोक पड़वा के दिन भी एक-दूसरे के घर नहीं गए।

यहां सभी लोग जागरूक हैं

मेडिकल ऑफिसर डाॅ. अरुण तोमर कहते हैं थवलाय के सभी लोग कोरोना को लेकर जागरूक हैं। गर्म पानी व काढ़ा जहां उन्होंने आदत में शामिल किया हैं वहीं मिलने पर पर्याप्त दूरी बनाकर भी रखते हैं।

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