मिनरल वाटर के नाम पर बोरिंग का पानी:महू में बिना लाइसेंस चल रहे वाटर प्लांट, फूड सेफ्टी अधिकारी न होने से नहीं होती जांच

महूएक महीने पहले

महू में इन दिनों मिनरल वाटर के सप्लाई का काम जोरों पर है। ऐसे में अवैध तरीके से तहसील में काफी संख्या में वाटर प्लांट संचालित किए जा रहे हैं। इनमें से कईयों के पास लाइसेंस है, जबकि अधिकांश बिना किसी लाइसेंस के ही मनमाने तरीके से पानी बेच रहे हैं।

मिनरल वाटर का प्लांट लगाने के लिए लाइसेंस का होना पहली शर्त है। बिना सील बंद पानी की बिक्री पर प्रतिबंध होने के बावजूद तहसील में लगभग दर्जन भर कारोबारी प्रतिदिन केन और पानी की बोतल के माध्यम से हजारों लीटर पानी की आपूर्ति कर रहे हैं। नियमों की अनदेखी कर हो रहे पानी के इस कारोबार के प्रति जिम्मेदार भी उदासीन रवैया अपनाए हुए हैं।

उधर, स्थिति यह है कि शुद्ध पानी के नाम पर अधिकांश केनों पर न तो उसे तैयार करने की तिथि अंकित रहती है और न ही उसके उपयोग की तिथि अंकित होती है। इसके अलावा बैच नंबर और लाइसेंस नंबर भी अंकित नहीं रहता है। वहीं शादी पार्टियों में भी बड़ी संख्या में इन केन का उपयोग हो रहा है।

मिनरल वाटर के नाम पर पीला रहे बोरिंग का पानी

शहर में मिनरल वाटर के नाम पर बोरिंग का पानी ठंडा कर केन में भरकर लोगों को पिलाया जा रहा है। इसके साथ ही 30 से 40 रुपए तक पानी के केन बेचे जा रहे है।

तहसील में नहीं है फूड सेफ्टी विभाग के कोई भी अधिकारी

महू तहसील में शहर सहित नगर परिषद और 76 पंचायत होने के बाद भी यहां पर कोई भी फूड सेफ्टी अधिकारी नहीं है। किसी मामले में अगर आप को शिकायत भी करना है तो उसके लिए इंदौर में पदस्थ फूड सेफ्टी अधिकारियों से चर्चा करना पड़ेगी।

वहीं महू में पदस्थ फूड इंस्पेक्टर जितेंद्र शिल्पी ने कहा की यह मामला हमारे कार्य क्षेत्र में नहीं है इसके लिए इंदौर फूड सेफ्टी अधिकारियों से चर्चा करें।

इस मामले में एसडीएम अक्षत जैन का कहना है कि अगर इस प्रकार का कार्य तहसील में चल रहा है तो पीएचई के अधिकारियों से जांच करवाकर जल्द कार्रवाई की जाएगी।

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