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इंदौर में 11वीं-12वीं स्कूलों की गाइडलाइन जारी:टीचर्स और कर्मचारियों का वैक्सीनेशन जरूरी, एक दिन ही ऑफलाइन होगी पढ़ाई; पैरेंट्स की समस्या- पढ़ाई जरूरी है या सेफ्टी

इंदौर10 महीने पहले
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लंबे समय बाद 26 जुलाई से प्रदेश में सरकारी व प्राइवेट स्कूलों में 11वीं-12वीं की पढ़ाई शुरू होगी। हफ्ते में चार दिन लगने वाली क्लासेस का शेड्यूल इस तरह रहेगा, हर क्लास को हफ्ते में एक बार ही ऑफलाइन का अवसर मिलेगा। इस तरह के आदेश से स्कूल संचालक व पैरेंट्स दोनों ही असमंजस में हैं।

पैरेंट्स का मानना है, सरकार ने आदेश जारी कर सुरक्षा की जिम्मेदारी हम पर थोप दी है। उनकी लिखित सहमति के बाद ही बच्चों को स्कूल में प्रवेश दिया जाएगा। दूसरी ओर, ऑनलाइन पढ़ाई ठीक नहीं हो पा रही है। ऐसे में वे पढ़ाई को महत्व दें या सेफ्टी को। इस बीच रविवार शाम कलेक्टर मनीषसिंह ने आदेश जारी कर स्पष्ट किया, जिले के सभी स्कूलों में शैक्षणिक व गैर शैक्षणिक स्टाफ 26 जुलाई से शत-प्रतिशत उपस्थित रह सकेंगे।

दरअसल, शासन ने 26 जुलाई का आदेश तो जारी कर दिया, लेकिन संंबंधित शहरों में व्यवस्था को लेकर जिला क्राइसिस मैनेजमेंट कमेटी की जवाबदेही तय की है। इंदौर में प्रशासन ने कई बिंदुओं पर गाइड लाइन जारी की है।

यह है गाइड लाइन

- सभी सरकारी व प्राइवेट स्कूलों के टीचरों व कर्मचारियों का वैक्सीनेशन जरूरी।

- स्कूलों के प्रिंसिपल की जिम्मेदारी है, पैरेंट्स की सहमति के बाद ही बच्चों को प्रवेश दें।

- 26 जुलाई से 11वीं व 12वीं की क्लासेस हफ्ते में दो बार लगेंगी। 12वीं के छात्रों के लिए सोमवार व गुरुवार और 11वीं के लिए मंगलवार व शुक्रवार को क्लासेस लगेंगी।

- 5 अगस्त से 12वीं के लिए सोमवार व गुरुवार और 11वीं के लिए मंगलवार व शुक्रवार को क्लासेस लगेंगी। ऐसे ही 10वीं के लिए बुधवार व 9वीं के लिए शनिवार को क्लासेस लगेंगी।

- स्कूल 50 फीसदी उपस्थिति रहेगी।

- ऑनलाइन क्लासेस भी लगेंगी।

- स्कूल प्रबंधन को व्यवस्था करनी होगी कि कुल क्षमता 50 फीसदी से ज्यादा न हो।

- स्कूलों में प्रार्थना सभा सहित सामूहिक गतिविधियां प्रतिबंधित रहेंगी।

- बच्चे एक जगह एकत्र न हो, इसका ध्यान रखना होगा।

- स्कूल वाहन भी 50 फीसदी क्षमता के साथ संचालित होंगे। इसमें 1 फीसदी सोडियम हाइपोक्लोराइड करना होगा।

होस्टल भी प्रोटोकाॅल के साथ 26 जुलाई से शुरू

- 11वीं व 12वीं के विद्यार्थियों के होस्टल भी 26 जुलाई से संचालित किए जा सकेंगे। यहां भी कोरोना प्रोटोकाल के पालन के साथ साफ-सफाई का ध्यान रखना होगा। होस्टल से जुड़े अधिकारियों, संचालकों व कर्मचारियों का वैक्सीनेशन जरूरी होगा।

- 12वीं के लिए 5 अगस्त से कोचिंग सेंटर खोले जा सकेंगे। इन सेंटरों पर भी कोरोना प्रोटोकाॅल के पालन के साथ साफ-सफाई का ध्यान रखना होगा।

- शिक्षा विभाग द्वारा समय-समय पर जारी किए गए स्वास्थ्य व सुरक्षा संबंधी गाइड लाइन का पालन करना होगा।

- सभी स्कूल प्रिंसिपल व होस्टल संचालकों को स्टाफ तथा विद्यार्थियों का रेंडम कोविड टेस्ट कराना होगा।

- होस्टल के मामले में सहायक आयुक्त (आदिवासी विकास विभाग), सहायक संचालक (पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग तथा जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा मॉनिटरिंग की जाएगी।

- कोचिंग सेंटरों के संचालन के मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी नगर निगम व पंचायत की होगी। आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। इसका उल्लंघन होने पर संबंधित के खिलाफ धारा 188 के तहत कार्रवाई होगी।

हर पहलू पर ध्यान देना होगा

मामले में इंदौर प्राइवेट एसोसिएशन के अध्यक्ष अरुण खरात ने बताया कि सरकार का आशय सिर्फ 11वीं व 12वीं का ही नहीं है। इसके तहत 11वीं क्लास के ही मैथ्य, बॉयलॉजी, कॉमर्स, आर्ट सहित इनके भी अलग-अलग सेक्शन हैं। व्यवस्था के तहत हर छात्र हफ्ते में केवल एक बार ही क्लास अटैण्ड कर सकेगा, जबकि स्कूल प्रबंधन को शिक्षकों व कर्मचारियों को पूरा वेतन देना होगा। उन्हें इस बात से कोई मतलब नहीं रहेगा कि क्लास में कितने बच्चे आ रहे हैं। वैसे भी सालों से सरकारी स्कूलों में बच्चों की क्षमता कम है। ऐसे में प्राइवेट स्कूलों पर आर्थिक भार ज्यादा आएगा। बकौल खरात स्कूल खोलना फायदेमंद हैं लेकिन हर पहलू पर ध्यान देने की जरूरत है।

अभिभावकों की ही जवाबदेही तय कर दी

इंदौर पालक संघ के अध्यक्ष अनुरोध जैन का कहना है कि सरकार पहले तय करे कि बच्चों की शिक्षा जरूरी है या सुरक्षा। सरकार एक्शन पहले लेती है और परिणाम देखने के बाद रिएक्शन करती है। संघ ने हाल ही में केंद्रीय मंत्री धर्मेन्द्र व शिक्षा मंत्री इंदरसिंह परमार को इसे लेकर एक पत्र लिखा है। इसमें बताया गया कि तीसरी लहर में सबसे ज्यादा खतरा बच्चों को ही है। अभी 11वीं व 12वीं की क्लासेस शुरू होने पर अभिभावकों की ही जवाबदेही तय कर दी गई है कि वे बच्चों को स्कूल भेजने के पहले अपनी सहमति जरूर दें।

वैक्सीनेशन के लिए 16 वर्ष की उम्र हो

जैन ने बताया कि वैसे 11वीं व 12वीं क्लास में पढ़ने वालों की उम्र 16 से 18 वर्ष के बीच होती है। ऐसे में जरूरी है कि वैक्सीनेशन के लिए उम्र 18 के बजाय 16 वर्ष कर दी जाए जिससे लाखों बच्चे सुरक्षित हो जाएंगे। अभी स्थिति यह है कि अभी ऑनलाइन पढ़ाई हो रही है जो व्यवहारिक नहीं है। इससे पढ़ाई का स्तर गिर रहा है। इसके लिए ऑफ लाइन शिक्षा ही बेहतर है लेकिन जिन स्थितियों में बच्चों को स्कूल भेजा जाएगा वह जोखिमभरा है। ऐसे में शिक्षा जरूरी है या सुरक्षा, यह सरकार व अभिभावकों, दोनों के लिए सवाल है।

बिना सुरक्षा के स्कूल खोलना ठीक नहीं

जागृत पालक संघ के अध्यक्ष एडवोकेट चंचल गुप्ता ने बताया कि अव्वल तो बिना वैक्सीनेशन और पूरी सुरक्षा के स्कूल नहीं खोले जाएं। ट्यूशन फीस के नाम से पूरी फीस ली जा रही है, इसका निराकरण कर उचित ट्यूशन फीस तय करवाई जाएं। स्कूल फीस के कारण कई बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई बंद कर दी गई है जिसे शुरू करवाया जाएं। फीस के कारण टीसी नहीं दी जा रही है जिससे बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह रुक गई है। फीस भरने में असमर्थ अभिभावकों को तत्काल टीसी दिलवाई जाएं जिससे वे अपने बच्चों को किसी सरकारी स्कूल में एडमिशन दिलवा सकें। फीस के कारण बच्चों के रिजल्ट व प्रमोशन रोके गए हैं वो जारी करवाए जाएं। स्कूल में लेट फीस मांगी जा रही है उसे बंद करवाया जाएं।

परिवारों के खर्चें भी बढ़ेंगे

वैसे भले ही बच्चा हफ्ते में एक दिन स्कूल जाए लेकिन इससे अभिभावकों को आर्थिक तंगी के दौर में खर्चा और बढ़ेगा। वह इसलिए कि अभी स्कूलों द्वारा ज्यादा फीस ली जा रही है। अब बच्चों के लिए नई यूनिफाॅर्म भी खरीदनी होगी। घर से स्कूल आने-जाने के लिए ट्रांसपोर्ट की जरूरत होगी। अभी स्थिति यह है कि प्राइवेट स्कूल वाहन संचालक भी दो महीने का एडवांस लेते हैं। ऐसे में अगर वे खुद बच्चों को स्कूल छोड़ने और लेने जाएंगे तो परेशानी का सामना करना पड़ेगा।

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