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इंदौर में दुर्लभ सर्जरी:किडनी के ऊपर 7 इंच के ट्यूमर को 5 घंटे ऑपरेशन के बाद निकाला; डॉक्टर्स का दावा- विश्व में इस साइज की बड़ी गांठ के 8 ही मामले

इंदौर4 महीने पहले
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मरीज पद्मसिंह के साथ सर्जरी करने वाले डॉक्टर। - Dainik Bhaskar
मरीज पद्मसिंह के साथ सर्जरी करने वाले डॉक्टर।

इंदौर के अस्पताल में एक 45 साल के व्यक्ति के किडनी के ऊपर 18X16 सेमी के ट्यूमर का सफल ऑपरेशन किया गया है। डॉक्टर्स का दावा है कि विश्व में इस तरह के अब तक 8 ही मामले सामने आए हैं। खास बात यह है कि ऑपरेशन से जुड़े खतरों के चलते उज्जैन और बड़ौदा के सर्जन्स भी इस मरीज का ऑपरेशन करने से इनकार कर चुके थे। ऑपरेशन के बाद अब मरीज पूरी तरह स्वस्थ है।

मेदांता हॉस्पिटल के वरिष्ठ यूरोलॉजिस्ट और ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ. रवि नागर ने बताया कुछ दिन पहले पद्मसिंह निवासी पीपल्याटाहा, गठिया (उज्जैन) नामक मरीज उनके पास आया। इससे पहले उज्जैन और बड़ौदा में अपना इलाज करवा चुका था और उसकी समस्या को देखते हुए उसे ऑपरेशन की सलाह दी गई थी, लेकिन ऑपरेशन के पहले ही मरीज की तबीयत बिगड़ने के कारण उसे बिना ऑपरेशन के ही डिस्चार्ज कर दिया गया था। उसे दो-तीन महीने से अचानक दिल की धड़कन तेज होना, पसीना आना, दिल में दर्द और ब्लड प्रेशर बढ़ा रहने की समस्या हुई। इसके साथ ही बेहोशी के दौरे भी आना शुरू हो गए।

ब्लड प्रेशर 200 से 250 तक, उज्जैन-बडोदरा में टेबल पर ही बेहोश हो गया
उज्जैन में डॉक्टर्स ने जब उसकी सोनोग्राफी करवाई तो मालूम हुआ कि उसे किडनी के पास 18X20 सेंटीमीटर की बड़ी गठान है। फिर सिटी स्कैन में पता चला कि यह गठान एडरनल ग्रंथि की है। यह ग्रंथि किसी भी व्यक्ति के स्टेरॉयड हार्मोन के लिए पहचानी जाती है, जो शरीर में ब्लड प्रेशर को कंट्रोल रखने के साथ अन्य हार्मोन को भी रिलीज करती है।

डॉक्टर्स ने मरीज को ऑपरेशन की सलाह दी। मरीज ऑपरेशन के लिए कई दिन हॉस्पिटल में भर्ती रहा लेकिन उसका ब्लड प्रेशर काफी 200 से 250 तक बढ़ा हुआ रहा, साथ ही बेहोशी के दौरे भी चलते रहे। इस कारण उसका ऑपरेशन करने से इनकार कर दिया गया। इसके बाद मरीज को बड़ोदरा के विशेषज्ञ के पास ले जाया गया व ऑपरेशन के लिए भर्ती किया गया, परन्तु वहां पर भी ऑपरेशन से पहले ही वह टेबल पर बेहोश हो गया, जिससे उसे बिना ऑपरेशन कर डिस्चार्ज कर दिया गया।

पांच घंटे तक चली सर्जरी
कुछ समय बाद वह मरीज मेदांता हॉस्पिटल में यूरोलॉजिस्ट डॉ. रवि नागर के संपर्क में आया, जहां पर उसके कुछ जरूरी टेस्ट करवाए गए। इसमें मालूम हुआ कि मरीज को फीओक्रोमोसाइटोमा है जिसके इलाज के लिए एक अलग टीम बनाई गई। इसमें हार्मोन स्पेशलिस्ट डॉ. तन्मय भराणी व हार्ट स्पेशलिस्ट डॉ. एडी भटनागर को भी शामिल किया गया। मरीज को सात दिन अस्पताल में भर्ती कर और उसके बाद सात दिन घर रखकर हार्मोन और ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने की मेडिसीन दी गई। डॉ. नागर ने बताया कि मरीज का ऑपरेशन हाई रिस्क था, मरीज बार-बार बेहोश हो रहा था। हार्मोन की इस गठान को छूते ही ब्लड प्रेशर और दिल की धड़कन बहुत बढ़ने की आशंका थी।

गठान को निकालने के बाद ब्लड प्रेशर बहुत कम होने, हार्टअटैक व ब्रेन हेमरेज की आशंका भी थी। ऐसी परिस्थितियों में उसकी जान को खतरा बना हुआ था। मरीज की सर्जरी पांच घंटे चली क्योंकि इस दौरा बार-बार उसके ब्लड प्रेशर को कंट्रोल किया जाता रहा। अंतत: इसका ऑपरेशन सफल रहा। पांच दिन अस्पताल में रखने के बाद इसे डिस्चार्ज कर दिया गया है।

हायर रिस्क के साथ जीवित रहना आश्चर्य
डॉ. तन्मय भराणी के अनुसार विश्व में अभी तक इतनी बड़ी ज्वाइंट फीओक्रोमोसाइटोमा गठान के 7 से 8 मामले ही देखने में आये हैं। इतने लक्षणों के बावजूद मरीज का जीवित रहना अपने आप में आश्चर्य की बात है, क्योंकि ज्यादातर केसों में यह समस्या एक्टिव रूप में नहीं रहती है। हॉस्पिटल के मेडिकल डायरेक्टर डॉ संदीप श्रीवास्तव ने बताया कि इस प्रकार की जटिल सर्जरी का इलाज एक कुशल टीम के सामंजस्य से ही संभव है। ऑपरेशन और पोस्ट ऑपरेटिव केयर टीम में एनिस्थेटिस्ट डॉ. मयंक मसंद और टीम का सहयोग रहा।

क्या है फीयोक्रोमोसाइटोमा
फीयोक्रोमोसाइटोमा या फेयोक्रोमोसाइटोमा, एडरनल ग्लैंड्स की कभी कभार होने वाली समस्या है जिसमें न्यूरोएंडोक्राइन गठान (ट्यूमर) बनने लगती है। इस बीमारी में अत्यधिक मात्रा में कैटेकोलामीन का स्राव होता है और एडरनल ग्लैंड्स से एड्रीनलीन (एपिनेफ्रीन) और नोरेड्रीनलीन (नोरेपिनेफ्रिन) ज्यादा मात्रा में निकलने लगता है, जिसकी वजह से अकसर प्रतिरोधी धमनियों में हाई ब्लड प्रेशर की समस्या भी उत्पन्न हो सकती है। फीयोक्रोमोसाइटोमा घातक साबित हो सकता है अगर इसकी वजह से असाध्य हाई ब्लड प्रेशर या गंभीर हाई ब्लड प्रेशर की समस्या उत्पन्न होती है।

स्टैण्डर्ड ब्लड प्रेशर दवाओं से इस हाई ब्लड प्रेशर पर ठीक से काबू नहीं पाया जा सकता है। सभी मरीजो में सभी सूचीबद्ध संकेत एवं लक्षण दिखाई नहीं पड़ते हैं। इसके लक्षणों में सिरदर्द, बहुत ज्यादा पसीना आना और दिल की धड़कन का तेज हो जाना और साथ में एक घंटे के भीतर साइलेंट हार्टअटैक पड़ना है। ट्यूमर बढ़कर बहुत बड़ा हो सकता है लेकिन ज्यादातर ट्यूमर 10 सेमी से छोटे होते हैं।

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