पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

इंदौर में ब्लैक फंगस:स्टेरॉइड के 20 इंजेक्शन, शुगर 600, समय पर इलाज से हारा ब्लैक फंगस

इंदौर21 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
ब्लैक फंगस से ठीक होने के बाद परिवार के साथ हौसले से लबरेज ज्योति मुच्छाल। - Dainik Bhaskar
ब्लैक फंगस से ठीक होने के बाद परिवार के साथ हौसले से लबरेज ज्योति मुच्छाल।

शहर में ब्लैक फंगस के 100 से ज्यादा मरीज स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं। 46 मरीज एमवायएच तो 30 मरीज बॉम्बे हॉस्पिटल से ठीक होकर लौटे हैं। वहीं 30 से ज्यादा मरीज अन्य अस्पतालों में ठीक हुए हैं।

ब्लैक फंगस के संक्रमण से पूरी तरह ठीक हो चुके लोगों का कहना है किसी भी तरह की परेशानी या लक्षण शरीर में नजर आ रहे हैं तो तत्काल डॉक्टर की मदद लें। समय पर उपचार से ब्लैक फंगस को आसानी से मात दे सकते हैं। कुछ ने कहा वैक्सीन लगवाना भी काफी फायदेमंद रहा। ब्लैक फंगस के उपचार में इससे भी काफी मदद मिली।

आंख सूजने लगी तो बिना देरी इलाज लिया, अब स्वस्थ
लोधीपुरा निवासी ज्योति मुच्छाल। बेटे ऋषभ ने बताया घर पर पापा को छोड़ हम सभी को कोरोना हुआ था। दादी के सीरियस होने पर 20 अप्रैल को हॉस्पिटल में उनका निधन हो गया था। दादी के निधन के बाद मम्मी को घर पर ही स्टेरॉइड के 20 इंजेक्शन दिए गए।

इससे उनका शुगर लेवल 600 तक पहुंच गया था। 26 अप्रैल तक मम्मी पूरी तरह से ठीक हो गई थीं। कुछ दिन बाद मम्मी को सीधी आंख के नीचे सूजन और दर्द हुआ तो एमआरआई करवाई। इसमें ब्लैक फंगस होने की जानकारी मिली। हमने बिना देर किए इलाज शुरू करवा दिया। ज्योति मुच्छाल ने बताया ब्लैक फंगस होने पर डॉक्टर ने ऑपरेशन कर उसे हटाया। अब मैं पूरी तरह स्वस्थ हूं।

शुगर 500, ब्लैक फंगस में वैक्सीन भी बनी मददगार
55 वर्षीय उद्यमी अटल प्रकाश सिंघई। बेटे दिव्य ने बताया 8 महीने पहले ही पापा की बायपास सर्जरी हुई थी। शुगर भी 325 से 500 तक पहुंच गई थी। शुगर कंट्रोल हुई तो आंख के नीचे सूजन दिखाई दी।

डॉक्टर को तत्काल दिखाया तो उन्होंने फंगल इंफेक्शन की दवाई दी। 9 मई को बॉम्बे हास्पिटल पहुंचे। उसी दिन से इंजेक्शन मिलना शुरू हो गए। पापा अब स्वस्थ हैं। पापा को कोरोना वैक्सीन लग चुकी थी। इससे संक्रमण खत्म करने में मदद मिली।

आंख में दर्द हुआ तो अगले ही दिन ऑपरेशन करवा लिया
34 साल के तापस जैन। 18 अप्रैल को कोविड पॉजिटिव आए। 5 मई को कोविड की रिपोर्ट निगेटिव आई। 6 मई को आंख में दर्द हुआ तो तत्काल डॉक्टरों को दिखाया। सीटी स्कैन करवाया तो साइनस में ब्लैक फंगस था।

7 मई को ऑपरेशन करवा लिया। 24 दिन भर्ती रहा। 27 मई को डिस्चार्ज हुआ। मेरा यही कहना है आप कोविड से गुजरे हो तो एहतियात बरतें। थोड़े भी लक्षण दिखें तो डॉक्टर को दिखाएं।

राहत की बात यह कि बच्चों में ब्लैक फंगस का कोई केस नहीं : डीन
हमने माइल्ड, मॉडरेट और सीवियर केस अलग-अलग कैटेगरी में रखे। माइल्ड और मॉडरेट केस के मरीजों का फंगस निकलवाने के तीन दिन बाद इंजेक्शन और दवाई देने के बाद डिस्चार्ज किया। डिस्चार्ज के बाद भी पूरा फॉलोअप लिया जा रहा है।

इंदौर में अभी बच्चों में फंगस संक्रमण के मामले सामने नहीं आए हैं। फिर भी एहतियात के तौर पर बच्चों के इंजेक्शन भी बुलवाकर रखे हैं। 24 बच्चों के इंजेक्शन की व्यवस्था की है। अभी तक 302 एंडोस्कोपी और 140 ऑपरेशन कर चुके हैं। - डॉ. संजय दीक्षित, डीन, एमजीएम मेडिकल कॉलेज

खबरें और भी हैं...