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ये कैसा मजाक है?:40 कर्मचारी 6 दिन में नहीं ढूंढ पाए तेंदुआ; दहशत में डेढ़ लाख की आबादी, न कोई जिम्मेदारी लेने को तैयार न जवाब देने को

इंदौर2 महीने पहले
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तेंदुआ या मोबाइल सर्चिंग- जू में ऐसे हो रही है जांच। फोटो | संदीप जैन। - Dainik Bhaskar
तेंदुआ या मोबाइल सर्चिंग- जू में ऐसे हो रही है जांच। फोटो | संदीप जैन।

नेपानगर से लाए गए आठ माह के तेंदुए ने इंदौर के सिस्टम को आईना दिखा दिया है। छह दिन हो गए हैं, चिड़ियाघर से गायब तेंदुए का कहीं पता नहीं है। वन विभाग और चिड़ियाघर के 40 कर्मचारियों की टीम लगा रखी है। इनका मासिक वेतन औसत 25 हजार भी मानें तो हर दिन 30 हजार रुपए से ज्यादा टीम पर ही खर्च हो रहा है, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकल पा रहा है।

हद यह है कि तेंदुआ कहां से और कैसे गायब हुआ, इसका जवाब भी नहीं मिल पाया है। पांच दिन से जू बंद है और आसपास की डेढ़ लाख की आबादी दहशत में जी रही है, लेकिन न कोई जवाब देने को तैयार है न जिम्मेदारी लेने को। जू के आसपास 9 कॉलाेनियां हैं। इसमें सबसे नजदीक आईडीए की बिल्डिंग है। लाेग बच्चाें काे बाहर नहीं निकलने दे रहे हैं। संवाद नगर में 40 से ज्यादा परिवार हैं। जू के दाईं तरफ अहिल्या पूरी कॉलाेनी है। यहां बच्चाें का बाहर गार्डन में खेलने जाना मना है।

बंद बच्चों का घरों से निकलना

तेंदुए को लेकर सभी बहुत डरे हुए हैं। घर के बाहर बड़ा कुत्ता बंधा हुआ है, फिर भी मैंने बच्चाें के बाहर खेलने जाने पर राेक लगा दी है। - हेमंत साेनाेने, सेंट्रल स्कूल रोड

बंद जू वाले रोड से रात में आना-जाना

पूरी कॉलाेनी सावधानी रख रही है। रात के समय जू वाले राेड पर निकलना बंद कर दिया है। बच्चों को भी कहा है कि वे रेसीडेंसी की तरफ से ही जाएं। - संजय रायकवार, सन्मति स्कूल के पीछे

बंद लोगों की सुबह-शाम की वॉक

तेंदुए के डर की वजह से लोगों ने सुबह-शाम की वॉक ही बंद कर दी है। खासतौर पर चिड़ियाघर के आसपास कोई नहीं जा रहा। - मोहित वर्मा, रेडियो कॉलोनी

वीडियो वायरल- डर था भाग जाएगा, तिरपाल से बांध कर लाए थे पिंजरा

नेपानगर से तेंदुए को लेकर आई टीम का एक वीडियो वायरल हुआ है। इसमें तेंदुए का बच्चा गुस्से में लगातार पिंजरे में तेजी से घूमता नजर आ रहा है। कर्मचारियों की बातचीत से लग रहा है, उन्हें पहले से डर था कि तेंदुआ भाग जाएगा। पिंजरा टूटा हुआ भी था, इसलिए वे इस पर तिरपाल बांधकर लाए थे।

इतनी लापरवाही- जू के दो अहम किरदार, एक छुट्‌टी पर दूसरे पहुंचे नहीं

इस मामले में जू के दाे अहम किरदार हैं, पहले प्रभारी डॉ. उत्तम यादव व दूसरे मुख्य कर्मचारी राकेश। राकेश उस दिन छुट्टी पर थे। दूसरे डॉ. यादव लगातार कह रहे हैं कि टीम काे बता दिया था कि स्टाफ जा चुका है। उन्होंने, रात में तेंदुए की सुरक्षा, इलाज व भोजन के लिए कोई इंतजाम नहीं किया।

तीन-चार दिन में तेंदुआ नहीं मिला तो जू खोल देंगे

प्रभारी निगमायुक्त भव्या मित्तल का कहना कि वन विभाग के साथ ही निगम की टीम भी खाेजबीन में लगी है। डीएफओ से भी हमारी बात हुई है। अगर 3 से 4 दिन में तेंदुआ बाहर नहीं आता है तो माना जाएगा कि वह जा चुका है। इसके बाद हम चिड़ियाघर दर्शकों के लिए खोल देंगे। उनके पास इस बात का कोई जवाब नहीं है कि अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

पता कर रहे हैं कैसे हुई लापरवाही

मंगलवार को मामले से जुड़े दोनों पक्षों की बैठक बुलाई है। सभी से चर्चा कर पता करेंगे लापरवाही कैसे हुई। - डॉ. पवन शर्मा, संभागायुक्त