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घूसखोर अफसर सजा का ले रहा मजा:इंदौर में 44 अधिकारी-कर्मचारी सस्पेंड होने के बाद हाजिरी देने आते हैं ट्रेंचिंग ग्राउंड; हाल ही में पकड़ा गया रिश्वतखोर अधीक्षक दो दिन से नहीं जा रहा

इंदौर4 महीने पहले
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इंदौर नगर निगम के जनकार्य शाखा के 2 अगस्त को अधीक्षक और महिला क्लर्क को 25 हजार की रिश्वत लेते हुए लोकायुक्त ने रंगे हाथ पकड़ा था। नगर निगम आयुक्त प्रतिभा पाल ने 3 दिन बाद दोनों को निलंबित कर मुख्यालय ट्रेंचिंग ग्राउंड पर अटैच कर रोजाना हाजिर होने को कहा था। क्लर्क हेमाली वैद्य तो लगातार हाजिरी भरा रही हैं, लेकिन अधीक्षक विजय सक्सेना केवल एक ही दिन गया है। वह दो दिन से गैर हाजिर है।

नगर निगम द्वारा को कोई कर्मचारी सजा को नजरअंदाज करता है तो उसे इंदौर से 90 किलोमीटर दूर जलूद तक जाना पड़ता है, लेकिन विजय सक्सेना को अब तक नहीं भेजा गया है।

बहरहाल, नगर निगम के 44 अधिकारी-कर्मचारी सस्पेंड होकर ट्रेचिंग ग्राउंड में हाजिरी भराने आते हैं। इनमें विजय सक्सेना और हेमाली का भी नाम जोड़ा गया है। दोनों ने 9 अगस्त को ट्रेचिंग ग्राउंड जाकर आमद दी। इसके बाद हेमाली ने पहुंचकर रजिस्टर पर सिग्नेचर किए, लेकिन सक्सेना ने दो दिन से गैर हाजिर है। यहां हाजिरी न देने पर उन्हें जो 60% वेतन मिलना है, उसमें से कटौती हो जाएगी।

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ऐसे आया पकड़ में

नगर निगम की जनकार्य शाखा के अधीक्षक विजय सक्सेना और क्लर्क हेमाली वैद्य को लोकायुक्त पुलिस ने 2 अगस्त को रिश्वत लेते रंगेहाथों पकड़ा था। बिजासन टेकरी पर नगर निगम का बगीचा बनाने का कॉन्ट्रेक्ट उज्जैन के रहने वाले धीरेंद्र चौबे ने लिया था। चौबे की फर्म रुद्र कंस्ट्रक्शन का 9 लाख रुपए का बिल बकाया था। भ्रष्ट अधीक्षक सक्सेना 3 फीसदी कमीशन पहले देने पर ही फाइल क्लियर करने की जिद पकड़े बैठा था। इस संबंध में लोकायुक्त एसपी सव्यसाची सराफ को कॉन्ट्रैक्टर धीरेंद्र चौबे ने सक्सेना के खिलाफ लिखित शिकायत दी थी।

सोमवार को योजना के तहत चौबे 25 हजार रुपए के रंग लगे नोट लेकर जनकार्य शाखा पहुंचा। चौबे को देख सक्सेना ने रिश्वत की राशि क्लर्क हेमाली को देने के लिए कहा। हेमाली ने रिश्वत लेकर अपने पास रख ली। तीन मिनट बाद लोकायुक्त की टीम पहुंची और दोनों को गिरफ्तार कर लिया।

कॉन्ट्रेक्टर की शिकायत पर लोकायुक्त ने नगर निगम के जनकार्य विभाग के अधीक्षक विजय सक्सेना और महिला कर्मचारी (क्लर्क) हेमाली वैद्य को सोमवार दोपहर 1.30 बजे गिरफ्तार किया था। सक्सेना के पास 3 करोड़ की संपत्ति मिली है।

25 वर्षों से निगम में तैनात है सक्सेना, कई शिकायतें थीं

विजय सक्सेना इंदौर नगर निगम में करीब 25 साल से तैनात है। इस दौरान, वह निगम के अलग-अलग विभागों में रहा। करीब 12 साल वह नक्शा विभाग में भी रहा। इस दौरान भी उसके खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायतें थीं। फिर वह बिल सेक्शन में आकर जनकार्य विभाग का अधीक्षक हो गया। उसने रिश्वतखोरी में महिला कर्मचारी हेमाली को भी शामिल कर लिया। अक्सर वह उसी के माध्यम से रिश्वत लेता था, ताकि सीधे खुद पकड़ा न जा सके।

लॉकर में 771 ग्राम सोने के जेवर मिले थे

लोकायुक्त पुलिस को सक्सेना के रणजीत हनुमान रोड स्थित बैंक लॉकर में 771 ग्राम सोने के जेवर (28 लाख रुपए कीमत), तीन किलो चांदी और सक्सेना व परिजन के बैंक खातों में 15 लाख रुपए मिले हैं। जांच में पता चला है कि सक्सेना की नौकरी 1996 में निगम में लगी थी। 25 साल की नौकरी में उसने 11 संपत्ति खड़ी कर ली। द्वारकापुरी में चार मकान हैं। बिचौली मर्दाना, सिंधी कॉलोनी और सिद्धार्थ नगर में चार प्लॉट तो राऊ चौराहा स्थित श्रीकृष्ण पैराडाइज बिल्डिंग में तीन फ्लैट हैं। सक्सेना ने लोकायुक्त टीम को बताया कि द्वारकापुरी के मकान बेटे ने खरीदे हैं, लेकिन वह बाकी संपत्तियों के बारे में कुछ जवाब नहीं दे पाया।

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