ICMR गाइड लाइन के बीच रिपीट पॉजिटिव का ट्रेंड:12 दिन में 6 % रिपीट पॉजिटिव; अब एक हफ्ते के बाद सीधे डिस्चार्ज, दोबारा टेस्ट नहीं

इंदौर8 दिन पहले
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शहर में कोरोना संक्रमण की रफ्तार तेज है और भले ही संक्रमण का ट्रेंड एसिमटोमैटिक (बिना लक्षण के मरीज) हो, लेकिन इस बीच रिपीट पॉजिटिव की संख्या भी तेजी से बढ रही है जिसके कारण ऐसे मरीजों की आइसोलेशन की अवधि भी बढ़ रही है जबकि ICMR की नई गाइड लाइन में 3 से 7 दिनों में डिस्चार्ज किया जा रहा है। ऐसे में रिपीट पॉजिटिव सैम्पलों ने सवाल खड़े कर दिए हैं। दूसरी ओर स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि एक व्यक्ति दो-तीन बार अपनी जांच कराता है जिससे रिपीट सैम्पलों की संख्या बढ़ रही है। ICMR की गाइड लाइन के तहत अब दोबारा टेस्ट भी नहीं कर सीधे एक हफ्ते बाद डिस्चार्ज किया जा रहा है।

दरअसल, रिपीट पॉजिटिव वे मरीज हैं जिनकी रिपोर्ट एक बार पॉजिटिव आने के बाद दोबारा पॉजिटिव आ रही है। ऐसे मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। हालांकि इनमें भी ज्यादातर होम आइसोलेट हैं। जनवरी के 12 दिनों में तो रिपीट पॉजिटिव की संख्या 383 तक जा पहुंची है जो संक्रमितों मरीजों का 5.59 % है।

जानें, रिपीट पॉजिटिव मरीजों की स्थिति

तारीख

पॉजिटिव

रिपीट पॉजिटिव

1 जनवरी

80

3

2 जनवरी

110

10

3 जनवरी

137

3

4 जनवरी

319

15

5 जनवरी

512

65

6 जनवरी

584

21

7 जनवरी

618

35

8 जनवरी

621

34

9 जनवरी

645

28

10 जनवरी

948

45

11 जनवरी

1169

56

12 जनवरी110468
कुल6847383

रिपीट पॉजिटिव की दर 5.59 %

वर्तमान में ICMR की गाइड लाइन के तहत अधिकतम एक हफ्ते में डिस्चार्ज किया जा रहा है जबकि जिनकी रिपोर्ट फिर पॉजिटिव आई है, उनकी जब तक नेगेटिव रिपोर्ट नहीं आती तब तक उनके आइसोलेशन में रहने का प्रोटोकॉल है। दूसरी ओर अब परिस्थितियां बदल गई है। CMHO डॉ. बीएस सेत्या के मुताबिक कई लोग ऐसे हैं कि पहले रैपिड टेस्ट कराते हैं। इसमें पॉजिटिव रिपोर्ट आने के बाद भी क्रॉस चेक करने के लिए RTPCR टेस्ट कराते हैं। ऐसे में एक ही मरीज को दो बार रिपोर्ट पॉजिटिव आने से वह रिपीट पॉजिटिव में काउंट हो जाता है। कई लोग फीवर क्लिनिक में टेस्ट कराने के बाद जब रिपोर्ट पॉजिटिव आती है तो फिर अपनी संतुष्टि के लिए प्राइवेट अस्पताल में भी टेस्ट कराते हैं, ऐसे में रिपीट पॉजिटिव की संख्या बढ़ती जा रही है। पहले का एक हफ्ते में दोबारा टेस्ट होता था। कुछेक मरीज जिनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आती थी, उन्हें फिर नेगेटिव रिपोर्ट आने के बाद ही डिस्चार्ज किया जाता था। अब ICMR की गाइड लाइन के तहत एक बार पॉजिटिव आने के बाद उसे अधिकतम एक हफ्ते में सीधे डिस्चार्ज किया जा रहा है। नियमों के तहत अब दोबारा टेस्ट नहीं किया जा रहा है।

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