कोरोना संक्रमण का असर / 70% इंडस्ट्री खुली, लेकिन 30 हजार की जगह चार हजार ही मजदूर मौजूद

मैकेनिक नगर की 400 में से करीब 100 दुकानें खुल गईं। मैकेनिक नगर की 400 में से करीब 100 दुकानें खुल गईं।
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मैकेनिक नगर की 400 में से करीब 100 दुकानें खुल गईं।मैकेनिक नगर की 400 में से करीब 100 दुकानें खुल गईं।

  • उद्योगपति उन्हें बसों से वापस लाने, राशन, मकान किराया देने जैसे उपाय करने में जुटे
  • मैकेनिक नगर और लोहा मंडी में 30% दुकानें खुलीं, न्यू लोहा मंडी मंे दो करोड़ का कारोबार

दैनिक भास्कर

May 23, 2020, 05:00 AM IST

इंदौर. कोरोना संक्रमण की शहर में भले ही चेन नहीं टूटी है लेकिन इससे उद्योगों में कच्चे माल, मजदूर मिलने की लिंक चेन टूट गई है। इसके चलते 58 दिन बाद सांवेर रोड औद्योगिक क्षेत्र, पोलोग्राउंड, पालदा की 3000 इंडस्ट्री में से करीब 70 फीसदी के दरवाजे जरूर खुल गए लेकिन काम मुश्किल से 500 इंडस्ट्री में ही शुरू हो सका है। इसकी वजह है कि इन उद्योगों में काम करने वाले 30 हजार मजदूरों में से लगभग 26 हजार घर लौट गए हैं और केवल चार हजार ही इन 500 फैक्टरी में काम करने के लिए पहुंचे। वहीं पांच हजार  सुपर वाइजर, इंजीनियर टाइप के ही लोग बचे हैं जो इन फैक्टरी में आना शुरू हो रहे हैं, लेकिन बिना मजदूरों के यह भी कुछ नहीं कर सकते हैं। 

मैकेनिक नगर, लोहा मंडी, न्यू सियागंज खुला
उधर मैकेनिक नगर की 400 से अधिक दुकानों में से करीब 100 दुकानदारों ने काम ‌शुरू कर दिया है, इससे ट्रांसपोर्टर्स को पार्ट्स की समस्या दूर हो गई है। न्यू लोहा मंडी मंे दो करोड़ से ज्यादा का कारोबार हुआ। यहां करीब 300 दुकानें खुल गई, वहीं पुरानी लोहा मंडी में 40 फीसदी दुकानें खुल गई है, और माल परिवहन शुरू हो गया है। इल्वा ट्रस्ट अध्यक्ष इसाक चौधरी ने कहा कि काम धीरे-धीरे रफ्तार पक़ड रहा है, ईद के बाद इसमें तेजी आएगी। वहीं न्यू सियांगज की दुकानें खुलने से उद्योगों को वायर व मेंटनेंस में लगने वाले अन्य कच्चे माल की सप्लाय शुरू हो गई है।

सांवेर रोड औद्योगिक सेक्टर- एआईएमपी के उपाध्यक्ष योगेश मेहता ने बताया कि यहां पर 25 हजार से मजदूर नियमित तौर पर दो हजार से अधिक इंडस्ट्री में काम करते हैं लेकिन दो हजार करीब ही लोग मौजूद है और 400-500 इंडस्ट्री में ही काम शुरू हो सका है।  

पोलाग्राउंड- उद्योगपति संजय पटवर्धन ने बताया कि यहां करीब 400 इंडस्ट्री है, जिसमें से 40-50 ही शुरू हो सकी है, मुश्किल से 500 मजदूर है।

पालदा- यहां पर करीब 500 से ज्यादा उद्योग है। इसमें से 50 फीसदी उद्योग चालू है क्योंकि अधिकांश दाल, आटा मिले हैं जो पहले से ही चालू थी, क्षेत्र के उद्योगपति समीर चौधरी ने बताया कि मिलों के कारण एक से दो हजार लोग काम कर रहे हैं, लेकिन बाकी उद्योगों को शुरू होने में कुछ दिन लगेंगे। 

मजदूरों को बुलाने भेजेंगे बस
एसोसिएशन आफ इंडस्ट्री के अध्यक्ष प्रमोद डाफरिया, उपाध्यक्ष मेहता आदि ने शुक्रवार शाम को कलेक्टर मनीष सिंह से मुलाकात कर मजदूरों की समस्या बताई। एसोसिएशन ने बताया कि अधिकांश मजूदर इंदौर संभाग के ही है, हम बस की व्यवस्था कर लेेते हैं, इन्हें बुलाने की मंजूरी दी जाए। कई उद्योगपति इस बा पर भी विचार कर रहे हैं कि वह मजदूर लौटने पर यदि फिर लॉकडाउन की स्थिति आती है तो उन्हें न्यूनतम वेतन, राशन देने के साथ ही उनके घर किराए भी थोड़ा भुगतान करेंगे, जिससे मजदूर को घर छोड़कर जाने की नौबत नहीं आए। वहीं उद्योगपतियों ने कच्चे माल की समस्या के लिए लिंक चेन जोड़ने व अन्य दुकान व रामबली नगर, भमोरी, स्कीम 54, 71, रेडमेड काम्पलेक्स, किला मैदान, जीएनटी की भी इंडस्ट्री खोलने की मंजूरी चाही है। 


उद्योगपतियों के मुताबिक बैंकिंग ट्रांजेक्शन सबसे बड़ी समस्या

उद्योगपतियों ने बताया कि सबसे बड़ी समस्या बैकिंग ट्रांजेक्शऩ की है। मंजूरी मिलना जरूरी है, क्योंकि लेन-देन चेक से होता है वह बैंकिंग ट्रांजेक्शन नहीं होने से अटक गया है। कलेक्टर ने इन पर विचार कर आगे कार्रवाई की बात कही है। इसी के साथ कई मशीनें मेंटेनेंस के अभाव में शुरू नहीं हो रही। कंपनियोंे के दफ्तर बंद होने से वह मेंटनेंस के लिए नहीं भेज रहे हैं।

रात में भी चल सकेंगी फैक्टरी, पर 7 बजे बाद आना-जाना नहीं होगा

इंडस्ट्री के लिए मिली सुबह 7 से शाम 7 बजे की शर्त को लेकर वे उद्योगपति परेशान हैं, जिनके यहां मशीनें 24 घंटे चलाना जरूरी हैं। इसे लेकर एसोसिएशन ऑफ इंडस्ट्री मप्र (एआईएमपी) ने कलेक्टर मनीष सिंह से छूट की मांग की। कलेक्टर ने सशर्त रियायत देते हुए कहा कि शाम 7 से सुबह 7 बजे तक कोई आना-जाना नहीं कर सकेगा। अध्यक्ष प्रमोद डाफरिया व योगेश मेहता ने सहमति जताई।


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