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  • 7500 Beds Were Full In April, 4 Days Waiting For Recruitment, Demand For 5 6 Thousand Remdesivir Daily; Now 886 Patients, No Demand For Remdesivir, Oxygen Consumption Is Also Only 15 Tons

कोरोना की दूसरी लहर थमने के सुखद संकेत:अप्रैल में फुल थे 7500 बेड, भर्ती के लिए 4 दिन की वेटिंग, रोज 5-6 हजार रेमडेसिविर की मांग; अब 886 मरीज, रेमडेसिविर की मांग नहीं

इंदौर9 दिन पहले
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कोरोना की करीब दो माह लंबी दूसरी लहर के बाद अब अस्पताल से लेकर ऑक्सीजन की मांग, रेमडेसिविर स्तर पर राहत मिलने लगी है। अस्पतालों में भर्ती के लिए जहां पहले लंबी वेटिंग थी, मंत्री से लेकर अधिकारियों तक के फोन पर भी बेड नहीं मिल रहे थे, वह सभी अब खाली हैं। रेमडेसिविर के एक भी इंजेक्शन की मांग नहीं है और ऑक्सीजन टैंकरों का परिवहन बंद हो गया है। मांग खत्म हो चुकी है।

बेड : दो महीने में 6600 बेड खाली हो गए

अप्रैल : जब कोरोना पीक पर था, तब 110 अस्पतालों के करीब साढ़े सात हजार बेड में सभी फुल थे। हालत यह थी कि सामान्य बेड पर भर्ती के लिए चार-पांच दिन की वेटिंग चल रही थी और मरीजों को टोकन देकर बाद में आने के लिए कहा जा रहा था। अस्पतालों में वेटिंग रूम में ऑक्सीजन के सिलंेडर लगाकर बेड खाली होने का इंतजार किया जा रहा था। कुछ अस्पतालों ने बाहर बोर्ड लगा दिया था कि नए मरीज नहीं लिए जा रहे हैं।

ऑक्सीजन : दो माह में मांग 135 टन कम हो गई

अप्रैल : ऑक्सीजन की मांग अस्पतालों में हर दिन 130 से 150 टन पर पहुंच गई थी। हालत यह थी कि ऑक्सीजन की कमी के चलते अस्पतालों ने मरीज लेना बंद कर दिए थे। कुछ ने शर्त रखी थी कि मरीज अपने साथ ऑक्सीजन सिलेंडर लेकर आए, तब भर्ती करेंगे। मरीज के परिजन ऑक्सीजन सिलेंडर लेने दौड़ रहे थे।

रेमडेसिविर : बीते सात दिन से कोई मांग नहीं है

अप्रैल : पीक के समय रेमडेसिविर के लिए लंबी कतारें लगी। अस्पतालों में मरीजों के लिए परिजन इंजेक्शन के लिए अधिकारियों के पैर पड़ रहे थे। हर दिन पांच से छह हजार इंजेक्शन की मांग थी और मिल केवल 500-600 रहे थे।

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