बूंद-बूंद का हिसाब अब हमारे सामने:स्काडा से बचाया 80 एमएलडी पानी, इसी से भर रहे 27 नई टंकियां

इंदौर6 महीने पहलेलेखक: दीपेश शर्मा
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  • शहर को सात सेक्टर में बांटा, हर सेक्टर में पड़ने वाली टंकियों की होती है ऑनलाइन मॉनिटरिंग

पानी मैनेजमेंट के लिए लगाया जा रहा स्काडा (सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डाटा एक्विजिशन) सिस्टम ऑपरेशनल हो चुका है। इसका फायदा यह हुआ कि रोज बहने वाला 80 एमएलडी पानी अब हम सहेज पा रहे हैं। इसी से अमृत योजना के तहत तैयार 27 नई टंकियां भरी जा रही हैं। भास्कर ने प्रोजेक्ट को स्कैन किया, ताकि पाठकों को पता चल सके कि आखिर इस सिस्टम से शहर को क्या फायदा होने जा रहा है।

स्काडा से मैनेजमेंट के लिए पूरे शहर को सात सेक्टरों में बांटा गया है। इसमें हर सेक्टर में पड़ने वाली टंकियों की ऑनलाइन मॉनिटरिंग की जाती है। कंट्रोल रूम में बैठा एक ऑपरेटर सभी टंकियों को अपनी स्क्रीन पर लाइव भरते हुए देख सकता है। निगमायुक्त प्रतिभा पाल ने बताया कि नई चार टंकियों से जोड़ने का काम चल रहा है। इसका ऑपरेशन और मेंटेनेंस 10 साल के लिए रामकी कंपनी को दिया गया है

कंपनी को मई में पूरे सिस्टम का ऑपरेशन एंड कंट्रोल सौंप दिया जाएगा। स्काडा से मिलने वाले डेटा से हम देख पा रहे हैं कि कौन सी टंकी कितने देर में भरती है और कहां समस्या आती है। कुल 110 टंकियां स्काडा से ऑपरेट होना शुरू हो जाएंगी। इसके बाद धीरे-धीरे डायरेक्ट सप्लाय वाले 44 क्षेत्रों को कम करते हुए टंकियों से जोड़ दिया जाएगा। हालांकि सभी क्षेत्रों को जोड़ने के लिए 5 नई टंकियों को बनाया जाएगा।

83 टंकियों में एक क्लिक पर ऑपरेशन
इंदौर की पुरानी 83 टंकियों में सभी पर फ्लो कंट्रोल मीटर और वॉल्व लगाए गए हैं। इसका पूरा नियंत्रण एक क्लिक से मूसाखेड़ी स्थित पीएचई ऑफिस में स्थापित स्काडा कंट्रोल रूम से किया जा रहा है। पहले पानी के आने और टंकियों में जाने का कोई हिसाब किताब नहीं था। अमृत प्रोजेक्ट के तहत स्काडा तैयार करने के दौरान निगम ने जलूद में जर्जर संपवेल ठीक कराए, जिससे 20 एमएलडी पानी सीधे बचा। इसके बाद अब यह आंकड़ा भी सामने आया कि इंदौर में पहले और दूसरे चरण से 110 एमएलडी पानी आ रहा है। बाकी के 30 एमएलडी पानी को रास्ते की 29 लोकेशन पर बांटा जा रहा है। वहीं तीसरे चरण से 350 एमएलडी और यशवंत सागर से 30 एमएलडी पानी आ रहा है।

100 एमएलडी पानी कम हो जाता था आते हुए
इंदौर में 70 किमी दूर जलूद से नर्मदा के तीन चरण में पानी लाया जाता है। पहले दोनों चरण से 145 एमएलडी पानी और तीसरे चरण से 360 एमएलडी पानी आता है। इंदौर के बिजलपुर कंट्रोल रूम में आते-आते यह पानी 100 एमएलडी कम हो जाता था। इसके लिए रास्ते में पहले और दूसरे चरण की पाइप लाइन से रास्ते के 29 क्षेत्रों में पानी बांटने, लाइन में लीकेज होने सहित तमाम कारण गिनाए जाते थे। इसके अलावा जलूद के संपवेल जर्जर होने से भी 20 एमएलडी पानी बर्बाद होता था। शहर में बिजलपुर कंट्रोल रूम से नर्मदा की हर टंकी पर वॉल्वमैन को कॉल किया जाता था। वह वॉल्व खोलता था और फिर टंकी भरती थी। कभी टंकी आधी भरती तो कभी ओवर फ्लो होती थी।

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