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इंदौर में मौत के बाद अब रिकॉर्ड का इंतजार:मौत के दस्तावेजों की छानबीन के बाद दो से 21 दिनों बाद रिकॉर्ड पर लिया जा रहा, स्वास्थ्य विभाग ने कहा- लंबी है प्रक्रिया

संतोष शितोले/ इंदौर2 महीने पहले

इंदौर में कोरोना संक्रमण भले ही अब 1% से कम हो गया, लेकिन रोज दो-चार मौतें हो रही हैं। इसे लेकर सवाल उठ रहे हैं कि क्या अभी भी कोरोना की दूसरी लहर की तीव्रता ज्यादा है या बैकलॉग की मौतों को अब रिकॉर्ड पर लिया जा रहा है। दूसरी ओर, मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए MYH (महाराजा यशवंतराव हॉस्पिटल) में रोज कतारें लग रही हैं। एक माह बाद तक प्रमाणपत्र मिल रहे हैं। मामले में तहकीकात की तो पता चला कि कोरोना से मौत होने के बाद दस्तावेजों की छानबीन की प्रक्रिया काफी जटिल है। इसी के चलते मौत होने के 2 से 6 दिन के बाद उन्हें रिकॉर्ड पर लिया जाता है। मृत्यु प्रमाण पत्र की प्रक्रिया के लिए भेजा जाता है। वहां भी 10 से 20 दिन लग रहे हैं।

जिले में संक्रमण के गिरते स्तर के चलते 1 जून से 14 जून के बीच कुल 2468 कोरोना पॉजिटिव पाए गए, जबकि 30 मौतें हुई हैं यानी 1.21%। वैसे पूरे कोरोना काल में 14 जून की स्थिति के अनुसार संक्रमण दर 0.98% व मौतें 0.89% रही। बहरहाल, आखिर संक्रमण कम होने के बाद भी मौतें कैसे जारी है, इसे लेकर स्थिति कुछ ऐसी है...।

14 जून : 9 दिन बाद रिकॉर्ड में दर्ज की गई मौत
विभाग ने 14 जून के बुलेटिन में दो मौतें बताई हैं। इनमें पहली नोपाराम कुमावत (54) निवासी शिव बाग कॉलोनी की है, जो सिनर्जी अस्पताल में भर्ती थे। उनकी मौत 6 जून को हुई थी, लेकिन दस्तावेजी छानबीन के 9 दिन बाद रिकॉर्ड पर लिया। दूसरी मौत घनश्याम अग्रवाल (72) निवासी कामधेनु पार्क, लिम्बोदी की है, जो सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल (SSH) में भर्ती थे। उनकी मौत 11 जून को हुई थी, जिन्हें तीन दिन बाद रिकॉर्ड पर बताया।

अपूर्वा तिवारी (डिस्ट्रिक्ट डाटा मैनेजर) ने बताया कि जिस भी अस्पताल में मरीज की मौत होती है, वे उसी दिन इसकी सूचना स्वास्थ्य विभाग को देते हैं।
अपूर्वा तिवारी (डिस्ट्रिक्ट डाटा मैनेजर) ने बताया कि जिस भी अस्पताल में मरीज की मौत होती है, वे उसी दिन इसकी सूचना स्वास्थ्य विभाग को देते हैं।

14 जून को हुई ये मौतें
14 जून को SSH में कैलाश डाबर (30) निवासी मानपुर की रात 10.30 बजे और फतेहसिंह जादम (62) निवासी नरसिंहगढ़ की मौत हुई, लेकिन यह अभी रिकॉर्ड पर नहीं आई है। फतेहसिंह की रिपोर्ट में उन्हें कोरोना सस्पेक्ट बताया है। उन्हें हार्टअटैक आया था, जबकि कैलाश की रिपोर्ट निगेटिव थी।

13 जून : सात दिनों बाद रिकॉर्ड पर मौत
13 जून को विभाग ने बुलेटिन में 1 मौत बताई है। खास बात यह है, इसी दिन 2 दो बजे SSH में ही ताराबाई देवांश (68) निवासी सुभाष नगर की रात 10 बजे मौत हो गई, लेकिन यह अभी तक रिकॉर्ड पर नहीं है। इनकी मौत ही हार्टअटैक से बताई गई। इसी दिन SSH में जामिल अहमद (39) की मौत हो गई, लेकिन यह भी रिकॉर्ड पर नहीं है। इसी दौरान सुबह 11 बजे लीलाबाई पटेल (55) निवासी देवास की मौत हो गई। मौत के दौरान वह पॉजिटिव थी। उन्हें भी अभी रिकॉर्ड पर नहीं लिया गया। एक मौत न्यू चेस्ट सेंटर में भी हुई जबकि अन्य अस्पतालों की मौतों पर भी अभी छानबीन चल रही है।

7 जून की मौत 13 जून को बताई
कुल मिलाकर विभाग ने 13 को 1 मौत बताई, जबकि अकेले SSH में ही चार मौतें हुई है, जबकि अन्य सरकारी व निजी अस्पतालों में भी हुई है। विभाग ने 13 जून जो एक मौत बताई है, वह मौत सुधाबाई रावत (83) निवासी कालानी नगर की है। इनकी 7 जून को मेदांता अस्पताल में मौत हुई थी। अस्पताल ने इसकी सूचना 11 जून को CMHO को दी। इसके चलते दस्तावेजों की छानबीन के बाद इसे 13 जून को रिकॉर्ड पर लिया गया।

23 दिनों बाद रिकॉर्ड पर आई मौत
ऐसे ही 12 जून को भी विभाग ने दो मौतें बताई हैं। इनमें पहली मौत जयकुमार (65) गुलमर्ग कॉलोनी की है, जो मेदांता अस्पताल में भर्ती थे। खास बात यह कि उनकी मौत 21 मई को हो गई थी लेकिन रिकॉर्ड पर 23 दिनों बाद लिया गया। इसके पीछे कारण दस्तावेजी प्रक्रिया की छानबीन बताया गया। दूसरी मौत जाकिर पटेल (53) निवासी ग्राम सोनवाय की है जो अरबिंदो अस्पताल में भर्ती थे। उनकी मौत 11 जून को हुई थी, लेकिन दस्तावेजों में कोई कमी नहीं थी इसलिए अगले दिन रिकॉर्ड पर लिया गया।

इन मौतों की छानबीन बाकी
उधर, इसी दिन SSH में शाम दोपहर 3.30 बजे कमलसिंह निवासी ग्राम उजलिया अट्ठाडा, इंदौर की मौत हो गई। मौत के दौरान वे निगेटिव थे जबकि कारण कार्डियेक अरेस्ट बताया गया है। यह मौत अभी रिकॉर्ड पर नहीं है। इसी दिन सुबह 7 बजे सोहनराव सारंग निवासी खरगोन की मौत हो गई। उस दौरान वे पॉजिटिव थे लेकिन अभी मौत रिकॉर्ड पर नहीं है। इसके अलावा अन्य निजी अस्पतालों में भी मौतें हुई हैं।

विभाग का तर्क

मामले में अपूर्वा तिवारी (डिस्ट्रिक्ट डाटा मैनेजर) ने बताया कि जिस भी अस्पताल में मरीज की मौत होती है, वे उसी दिन इसकी सूचना स्वास्थ्य विभाग को देते हैं। कई बार ज्यादा मौतें होने पर अस्पताल प्रबंधन एक-दो दिन बाद देते हैं। इसके बाद विभाग द्वारा दस्तावेजों, कोरोना रिपोर्ट की छानबीन की जाती है। अगर उसमें कोई संशय या अन्य दस्तावेज बाकी हो तो अस्पताल को लिखकर उन्हें मंगाया जाता है। फिर इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के पोर्टल पर रिपोर्ट को क्रॉस चेक किया जाता है, जहां वास्तविक स्थिति पता चल जाती है कि मौत के दौरान व पॉजिटिव था या निगेटिव। इसके चलते इसमें समय लगता है। वैसे मृत्यु प्रमाण पत्र पर जिस दिन उसकी मौत हुई है, वही तारीख रिकॉर्ड पर ली जाती है।

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