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राजबाड़ा पर जमीन की ‘ठेकेदारी प्रथा’:मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद फुटकर विक्रेताओं व व्यापारियों के बीच फिर पेंच, तीन दिन में निर्णय सुनाएंगे निगम कमिश्नर

इंदौरएक वर्ष पहले
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मुख्यमंत्री को ज्ञापन देते पथ महासंघ के पदाधिकारी। - Dainik Bhaskar
मुख्यमंत्री को ज्ञापन देते पथ महासंघ के पदाधिकारी।

राजबाड़ा क्षेत्र में 400 रुपए से लेकर 1 हजार रोज के हिसाब से जगह किराए पर देने की ‘ठेकेदारी प्रथा’ पर जिला प्रशासन, नगर निगम व पुलिस ने भले ही कसावट कर छोटे विक्रेताओं को वहां से हटा दिया है लेकिन अब एक बार पेंच फंस गया है।

गुरुवार को नितिन गडकरी के आगमन के पूर्व प्रदर्शन को उतारू पथ विक्रेता महासंघ को निगम कमिश्नर प्रतिभा पाल ने बुलाया और उन्हें हाथों में सामान रखकर व्यवसाय करने की सहमति जताई। इसके बाद छोटे विक्रेता मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान से मिले तो उन्होंने भी आश्वस्त किया कि प्रदेश में कोई भी भूखा नहीं सोएगा। इसके बाद अब बड़े व्यापारियों में फिर नाराजगी है कि बाजार में फिर से पहले जैसी स्थिति निर्मित होगी। अब दोनों के बीच फिर टकराव की स्थिति बन गई है।

तीन दिन पहले ही अपर कमिश्नर देवेंद्रसिंह, डिप्टी कमिश्नर लता अग्रवाल व एएसपी राजेश व्यास ने व्यापारिक संगठनों के पदाधिकारियों के साथ एक मीटिंग की थी। इसमें अधिकारियों ने उन्हें कहा था कि अब राजबाड़ा क्षेत्र के सारे बाजारों से फुटकर विक्रेताओं, ठेल वालों व फेरी वालों को हटा दिया है। बाजारों में आवाजाही आसान हो गई है। अब आप लोग अपने अतिक्रमण हटा लें अन्यथा नगर निगम द्वारा वीडियोग्राफी करने के बाद उसे हटा दिया जाएगा। इसके साथ ही दुकानदारों व कर्मचारियों को अपने वाहन पार्किंग स्थल पर खड़े करने को कहा था। उन्हें स्पष्ट किया था कि दुकानों के सामने केवल ग्राहकों के वाहन ही पार्क होंगे।

यह व्यवस्था दो दिन ही चली थी। गुरुवार को पथ महासंघ के अध्यक्ष राजेश बिडकर, कमल राजोरिया, कुंदन जायसवाल, युसूफ खान, अवतारसिंह सलूजा सहित छोटे विक्रेता ने मुख्यमंत्री के आगमन के पहले प्रदर्शन की तैयारियां की। इस पर निगम कमिश्नर ने उन्हें बुलाया और बात की। प्रतिनिधि मंडल ने मांगें रखी कि हमें हाथों में अपनी सामग्रियां लेकर व्यापार करने दिया जाए। हफ्ते में दो दिन शनिवार-रविवार फेरी वालों को रोजगार करने का अवसर दिया जाए व गोपाल मंदिर की गली जहां काफी ट्रैफिक रहता है उसे रेड जोन घोषित किया जाए। इस पर निगम कमिश्नर ने उन्हें आश्वस्त कर तीन दिन में अपना निर्णय बताने की बात कही। उसके बाद प्रतिनिधि मंडल मुख्यमंत्री से भी मिला जिन्होंने भी आश्वस्त किया। इसके चलते अब निगम को छोटे व्यापारियों को संतुष्ट करना होगा। उन्हें या तो हॉकर्स जोन के लिए जगह उपलब्ध करानी होगी या फिर बाजार में फिर से व्यापार की सुविधा देने के साथ ठोस व्यवस्था बनानी होगी। बहरहाल, अभी दोनों पक्षों में फिर से टकराव की स्थिति है।

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