ऐसा होगा इंदौर में मां अन्नपूर्णा मंदिर, VIDEO:लोहे का इस्तेमाल नहीं, 50 पिलर्स पर सफेद मकराना मार्बल पर बनेगा स्ट्रक्चर; जमीन से 81 फीट ऊंचा होगा शिखर

इंदौरएक वर्ष पहलेलेखक: अमित सालगट

इंदौर में मां अन्नपूर्णा का मंदिर बनाया जा रहा है। खास बात यह है कि मंदिर में लोहे का इस्तेमाल नहीं होगा। मंदिर का पूरा स्ट्रक्चर 50 पिलर्स पर सफेद मकराना मार्बल पर बनेगा। जमीन से मंदिर का शिखर 81 फीट ऊंचा होगा। 40 हजार घन फीट सफेद मकराना मार्बल से नागर शैली में मंदिर बनाया जा रहा है। मार्बल पत्थर पर ही ओडिशा के कारीगर नक्काशी और देवी-देवताओं की प्रतिमाएं उकेर रहे हैं। मंदिर बनने में 2 साल का समय लगेगा।

मंदिर के व्यवस्थापक स्वामी जयद्रानंद गिरी महाराज ने बताया कि नए मंदिर का भूमि पूजन जनवरी 2019 में किया गया था। इसके बाद फाउंडेशन और फिर मार्बल का काम शुरू हुआ। नए मंदिर में ओडिशा के कारीगरों की दो टीम काम कर रही है। टीम में 32 कारीगर हैं। इसके अलावा राजस्थान के 15 कारीगरों की टीम भी यहां पिलर्स फिटिंग कर रही है। पिलर्स राजस्थान से ही तैयार होकर इंदौर लाए गए हैं।

मकराना मार्बल से तैयार हो रहा मंदिर।
मकराना मार्बल से तैयार हो रहा मंदिर।

अहमदाबाद के आर्किटेक्ट वास्तु अनुरूप तैयार कर रहे मंदिर
मंदिर के आर्किटेक्ट अहमदाबाद के सत्यप्रकाश राजपूत हैं। इस पूरे मंदिर का निर्माण नागर शैली से और वास्तु के अनुसार किया जा रहा है। वास्तु के अनुसार किस भगवान की प्रतिमा किस दिशा में रहना चाहिए, उसी प्रकार यहां प्रतिमाओं को मार्बल पर उकेरा जा रहा है।

कुछ ऐसा बनेगा नया मंदिर।
कुछ ऐसा बनेगा नया मंदिर।

चबूतरा तैयार, चल रहा नक्काशी का काम
मंदिर के लिए जमीन से 7 फीट ऊपर तक चबूतरा बनकर तैयार हो गया है। इस पर खंभे लगाए जा रहे हैं। मंदिर परिसर में ही एक ऑफिस भी है। यहां भक्त मंदिर निर्माण में अपना सहयोग करते हैं।

जानिए, नए मंदिर की खासियत

  • अन्नपूर्णा माता के नए मंदिर का निर्माण 6600 स्क्वायर फीट में किया जा रहा है।
  • मंदिर की लंबाई 110 फीट और चौड़ाई 55 फीट है।
  • गर्भगृह 15 बाई 15 स्क्वायर फीट का है। यहां माता की प्रतिमाएं विराजित होंगी।
  • पूरे मंदिर का निर्माण 50 पिलर्स पर होगा। हर पिलर की हाइट 17 फीट रहेगी।
  • मंदिर में कहीं भी लोहे का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है।
  • चबूतरे को 12 फीट नीचे खुदाई कर काले पत्थर, चूना, सीमेंट से तैयार किया है।
  • जमीन से 7 फीट ऊपर चबूतरा बनकर तैयार हो चुका है।
  • जमीन से मंदिर शिखर की ऊंचाई 81 फीट रहेगी।
  • सभा मंडल में नवदुर्गा, दस महाविद्या और 64 योगिनियों की मूर्तियां बनेंगी।
  • मंदिर चबूतरे पर जन्म से महाभारत तक की कृष्ण लीलाएं उकेरी जा रही हैं।
पत्थरों पर ही उकेरी जा रही नक्काशी और प्रतिमाएं।
पत्थरों पर ही उकेरी जा रही नक्काशी और प्रतिमाएं।

1959 में हुई थी स्थापना
1959 में ब्रह्मलीन स्वामी प्रभानंद गिरी जी महाराज ने मंदिर की स्थापना की थी। पुराने मंदिर के पीछे ही नया मंदिर बनाया जा रहा है। दरअसल, भक्तों की बढ़ती संख्या और बारिश में पानी परिसर में घुस आने से नया मंदिर बनाने का अनुरोध भक्त कर रहे थे। इस पर अन्नपूर्णा आश्रम ट्रस्ट अध्यक्ष स्वामी विश्वेश्वरानंद गिरी महाराज ने माता का नया मंदिर बनाने का निर्णय लिया। अन्नपूर्णा माता मंदिर में रोजाना करीब 3 से 5 हजार भक्त दर्शन करते आते हैं। त्योहारों में भक्तों की संख्या और भी बढ़ जाती है।

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