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इंदौर की छत्रपति शिवाजी सहकारी संस्था की जांच:करोड़ों के हेरफेर में पेश नहीं किया जवाब, समय मांगा; भंग हो सकता है संचालक मंडल

इंदौर9 दिन पहले
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शहर की 9 हजार सदस्यों वाली तथा पांच दशक पुरानी श्री छत्रपति शिवाजी साख सहकारी संस्था में करोड़ों की वित्तीय गड़बड़ियां मिलने के बाद संचालक मंडल को 5 अक्टूबर तक सहकारिता विभाग को अपना पक्ष प्रस्तुत करना था, लेकिन अभी जि जवाब पेश नहीं किया है। मामले में संचालक मंडल के एडवोकेट द्वारा सहकारिता विभाग से समय मांगा गया है। वैसे विभाग के पास जांच रिपोर्ट में सारी गड़बड़ियों के तथ्य हैं। अगर संस्था द्वारा विभिन्न डिफाल्टर बैंकों में जमा कराए रुपए वापस नहीं मिले तो संकेत हैं कि संचालक मंडल भंग कर वहां रिसीवर की नियुक्ति की जा सकती है।

संचालक मंडल ने बीते सालों में संस्था में जमा सदस्यों के 4.5 करोड़ रु. डिफाल्टर रही पंजाब एण्ड महाराष्ट्र सहकारी को-ऑपरेटिव बैंक में जमा करा दिए। इस बैंक के भुगतानों पर रिजर्व बैंक ने रोक लगा दी है जिसके चलते शिवाजी संस्था के भी 4.15 करोड़ रु. अटक गए हैं। ऐसे ही कर्ताधर्ताओं ने बिना ठहराव प्रस्ताव के फियकेयर स्माल फाइनेंस बैंक, नागपुर सहकारी बैंक, यश बैंक व कॉसमॉस बैंक में 11 करोड़ से ज्यादा की राशि जमा कर दी। इनमें कॉसमॉस बैंक से भी 1.20 करोड़ रुपए वापस नहीं हुए हैं। मामले में सहकारिता विभाग ने जांच में लगभग पूरे संचालक मंडल को दोषी पाते हुए नोटिस जारी किए थे तथा 5 अक्टूबर को जवाब पेश करने को कहा था।

एमएल गजभिये (डिप्टी कमिश्नर, सहकारिता विभाग) ने बताया कि संचालक मंडल के एडवोकेट ने आवेदन देकर जवाब पेश करने के लिए समय मांगा है। वैसे नियमों के तहत अधिकतम 10 दिनों की अ‌वधि होती है। जवाब मिलने के बाद आगे की स्थिति स्पष्ट होगी। गौरतलब है कि जांच रिपोर्ट में गड़बड़ियां उजागर होने के बाद हाल ही में संस्था की साधारण सभा में सदस्यों ने काफी हंगामा किया था जिस पर संचालक मंडल की ओर से संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया जिसके चलते सभा को बीच में ही खत्म करना पड़ा था।

ये हैं बड़ी-बड़ी गड़बड़ियां

  • सहकारिता के नियमों के तहत सहकारी साख संस्थाओं को-ऑपरेटिव बैंक में ही संस्था के रुपए जमा कराने का अधिकार है लेकिन शिवाजी सहकारी संस्था ने संचालक मंडल के ठहराव प्रस्ताव के बिना 2017 से 2019 तक 6 बार में पंजाब एण्ड महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव बैंक में 4,15,678,673 रुपए जमा कराए। इसका कारण इन राशियों पर समयानुसार 7.75 फीसदी से लेकर 8.10 फीसदी तक ब्याज मिलना।
  • खास बात यह कि पंजाब एण्ड महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव बैंक डूबी हुई बैंक है। मामले में रिजर्व बैंक द्वारा इसमें अमानतदारों को राशि भुगतान करने पर रोक लगा दी है।
  • इस तरह संचालकों द्वारा अपने पद का दुरुपयोग किया गया।
  • ऐसे ही संचालक मंडल के बिना ठहराव प्रस्ताव के फिनकेयर स्माल फाइनेंस बैंक में 3.40 करोड़ रु., नागपुर सहकारी बैंक में 1.00 करोड रु., यश बैंक में 3.15 करोड़ रु. व कॉसमॉस बैंक में 3.80 करोड़ रुपए जमा कराए गए। इसमें भी गड़बड़ी यह कि करोड़ों की यह राशि पहले जमा कराई गई और फिर बाद में संचालक मंडल से अनुमोदन प्राप्त कर लिया गया।
  • ऐसे ही कॉसमॉस बैंक में 16 मार्च 2019 को 50 लाख रु. व 2 अप्रैल 2019 को 70 लाख रु. यानी कुल 1.20 करोड़ रु. जमा कराए गए लेकिन वापस प्राप्त नहीं किए जबकि परिपक्वता की राशि अपेक्स बैंक, आईपीएस बैंक व बैंक ऑफ इंडिया में जमा करा दी गई। इसमें भी संचालक मंडल की सहमति नहीं ली।
  • संस्था में लोन वितरण, वसूली आदि के लिए कर्मचारी नियुक्त हैं लेकिन पदाधिकारियों द्वारा खुद ही पदों का दुरुपयोग कर ये काम करने के एवज में 1,94,649 रुपए प्राप्त कर संस्था को आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया।
  • संचालकों ने लोन की रिकवरी के लिए न कोई ठोस प्लान बनाया और न ही कोई समीक्षा कर नियंत्रण किया गया। इसके चलते 2019-20 में ओवर ड्यू 9.10 फीसदी हो गया जो संस्था के हित में नहीं है।
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