• Hindi News
  • Local
  • Mp
  • Indore
  • Ayushman Entangled In Coding; If Blood Is Needed Before The Operation, Then You Will Have To Go To MY, Because If Offered In Private, You Will Not Get Money

ऐसे कैसे होंगे निरामय ?:कोडिंग में उलझा आयुष्मान; ऑपरेशन से पहले खून की जरूरत पड़ी तो जाना पड़ेगा एमवाय, क्योंकि निजी में चढ़ाया तो नहीं मिलेगा पैसा

इंदौर2 महीने पहलेलेखक: नीता सिसौदिया
  • कॉपी लिंक
इलाज के लिए एमवाय को अधिकृत किया गया है। - Dainik Bhaskar
इलाज के लिए एमवाय को अधिकृत किया गया है।
  • जमीनी हकीकत- 700 इलाज (प्रोसिजर) सरकारी अस्पतालों के लिए आरक्षित, आधे इलाज के बाद अस्पताल बदलने की नौबत

सुनकर अजीब लगेगा, लेकिन किसी ऑपरेशन के लिए यदि काेई आयुष्मान-कार्डधारी मरीज निजी अस्पताल मेें भर्ती है और वह सीवियर एनीमिक है तो खून चढ़वाने उसे पहले सरकारी अस्पताल जाना होगा। आयुष्मान भारत योजना निरामयम में बीमारियों का इलाज कोड-सिस्टम में उलझ गया है।

वर्ष 2018 में लागू योजना से इंदौर के 55 से ज्यादा अस्पताल जुड़े हुए हैं। करीब 2000 प्रकार के इलाज शामिल हैं, लेकिन 700 उपचार सरकारी अस्पतालों के लिए आरक्षित कर दिए गए हैं। यानी इनके लिए कार्डधारी को वहीं जाना होगा।

केस 1 - ऑपरेशन के बाद परेशानी, अब मरीज क्या करें

49 साल के अशोक शर्मा की साउथ तुकोगंज के अस्पताल में वॉल्व रिप्लेसमेंट सर्जरी हुई। पोस्ट ऑपरेटिव इन्फेक्शन हुआ। डॉक्टर ने बताया कि टांके से संक्रमण है, लेकिन आयुष्मान में नि:शुल्क इलाज कराना है तो एमवाय जाना होगा। सवाल यह है कि ऑपरेशन के बाद केस बिगड़ा या संक्रमण हुआ तो दूसरे डॉक्टर से इलाज कैसे करा सकते हैं। उन्हें 30 हजार खर्च करना पड़े।

केस 2 - ऑपरेशन से पहले एनीमिक हुए अब कहां जाएं

60 साल के राजेंद्र को पाइल्स की समस्या हुई। इलाज के लिए अरबिंदो भी अधिकृत है। प्री चेकअप में वे सीवियर एनीमिक निकले। इसके इलाज के लिए एमवाय को अधिकृत किया गया है। यानी मरीज को खून चढ़वाने के लिए पहले एमवाय अस्पताल में ही भर्ती होना होगा। अब गंभीर बीमार मरीज सर्जरी के पहले कैसे ये सब कर सकते हैं।

ऑपरेशन से पहले एंजियोग्राफी खुद के खर्च पर ही करना होगी - एंजियोग्राफी भी मरीज को खुद के खर्च पर कराना होगी। क्योंकि ऑपरेशन के पहले एंजियोग्राफी कराने का प्रावधान योजना में नहीं है। किडनी संबंधी समस्या है, तब भी उसे भर्ती कर इलाज करना संभव नहीं होता।​​​​​​​

कोडिंग की वजह से कुछ दिक्कतें आ रही हैं

कुछ दिक्कतें कोड के कारण हैं। यदि मरीज को कोई अन्य बीमारी है तथा जहां वह भर्ती है, वहां उसका कोड नहीं लगता तो परेशानी होती है। -देवेंद्र रघुवंशी, योजना को-आर्डिनेटर ​​​​​​​

भोपाल में इस परेशानी के बारे में बात करेंगे

याेजना में कोड सिस्टम बनाया गया है। उसी के अनुसार इलाज होता है। कई बार परेशानियां आती हैं। इस बारे में हम भोपाल बात करेंगे। - डॉ. एस. सिसौदिया, नोडल अधिकारी​​​​​​​

  • 2000 - तरह के प्रोसिजर (उपचार)आरक्षित हैं
  • 700 - सरकारी अस्पतालों के लिए आरक्षित रखे गए हैं
  • 11.74लाख आयुष्मान कार्ड बनाने का टारगेट है जिले का
  • 90 हजार ज्यादा लोगों का इलाज योजना के तहत हो चुका
  • 164 करोड़ से ज्यादा भुगतान निजी व सरकारी अस्पतालों को
खबरें और भी हैं...