इंदौर में डॉक्टर ने ससुराल आकर लगाई फांसी:तीन महीने इलाज के बाद फिर ले जा रहे थे रिहेब सेंटर, जाने को तैयार नहीं थे डॉक्टर

इंदौर4 महीने पहले

इंदौर में बड़वाह (खरगोन) के सरकारी अस्पताल में पदस्थ एक डॉक्टर ने अपने ससुराल में फांसी लगाकर जान दे दी। वह शनिवार को पत्नी और 13 महीने की बेटी के साथ इंदौर आए थे। रविवार सुबह पत्नी ने उन्हें फंदे पर लटके देखा और अपने पिता को घटना की जानकारी दी। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई।

पुलिस के मुताबिक अभी कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। यह जानकारी सामने आई है कि खुदकुशी करने वाले डॉक्टर का इंदौर के रिहेब सेंटर में तीन माह तक इलाज चला था। उन्हें सोमवार को दोबारा रिहेब सेंटर ले जाने की तैयारी थी। लेकिन वे जाने को तैयार नहीं थे।

पत्नी ने देखा सबसे पहले

इंदौर के द्वारकापुरी TI सतीश द्विवेदी के मुताबिक घटना ग्रेटर वैशाली की है। यहां डॉक्टर अनिल सोलंकी (35) पुत्र स्व. बाबूसिंह सोलंकी निवासी बड़वानी ने अपने ससुराल में फांसी लगाकर जान दे दी। पत्नी नंदिनी ने उन्हें सुबह फंदे पर लटके देखा था। डॉ. अनिल की 2019 में शादी हुई थी। उनकी 13 माह की बेटी भी है। साला भी पेशे से डॉक्टर है ओर ससुर रिटायर्ड फूड ऑफिसर है। पत्नी नंदिनी से सुबह पति को फंदे पर लटके देखा। जिसके बाद पिता माधव सिंह को जानकारी दी।

रिहेब सेंटर में चला था उपचार

पुलिस के मुताबिक डॉ. अनिल ने इंदौर के एक रिहेब सेंटर में उपचार कराया था। उनके पिता की काफी समय पहले मौत हो चुकी है। छोटा भाई भी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहा था। पुलिस पूरे मामले में जांच कर रही है। पहले पुलिस द्वारा इनकी पोस्टिंग बड़वानी बताई जाती रही, लेकिन बाद में परिवार ने पुलिस को स्पष्ट किया कि वे खरगोन जिले के बड़वाह के सरकारी अस्पताल में पदस्थ थे।

क्या होते हैं रिहेब सेंटर
रिहेब सेंटर यानी पुनर्वास केंद्र यानी नशा मुक्ति केंद्र। यहां शराब, ड्रग्स और अन्य तरह के नशे के आदी हो चुके लोगों (मरीजों) को रखा जाता है। यहां मरीज की डॉक्टर की निगरानी में उपचार के साथ काउंसलिंग भी की जाती है। मरीजों को यहां एक से तीन माह या इससे भी अधिक समय तक रखा जाता है। यहां दवाओं के साथ योग, प्राणायाम और अन्य माध्यमों से उपचार किया जाता है।

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