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एमवाय अस्पताल:डेढ़ साल से बंद बोन मैरो और ऑर्गन ट्रांसप्लांट जल्द होगा शुरू, अब कोरोना में भी बंद नहीं होगा

इंदौर6 दिन पहलेलेखक: नीता सिसौदिया
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एमवाय में डेढ़ साल से बंद ट्रांसप्लांट जल्द शुरू होने वाला है। - Dainik Bhaskar
एमवाय में डेढ़ साल से बंद ट्रांसप्लांट जल्द शुरू होने वाला है।

प्रदेश की एकमात्र सरकारी बोन मैरो यूनिट एमवाय अस्पताल में कोरोना के कारण डेढ़ साल से बंद ट्रांसप्लांट जल्द शुरू होने वाला है। इसकी तैयारी एमवाय प्रशासन ने कर ली है। फरवरी 2018 में शुरू हुई इस यूनिट में अब तक 40 बोन मैरो ट्रांसप्लांट हो चुके हैं। इनमें 38 पूरी तरह नि:शुल्क किए गए। यह उन बच्चों के लिए बहुत बड़ी सौगात है जो थैलेसीमिया से जूझ रहे हैं।

एमवाय में अब विदेश से भी बच्चे आ रहे हैं। 19 मार्च को दुबई से 15 वर्षीय दृश्य टेकवानी को एमवाय लाया गया। उसे जन्म के बाद से ही हर माह ब्लड ट्रांसफ्यूजन की जरूरत पड़ती थी। इतनी कम उम्र में ट्रांसप्लांट खर्चीला था। इसके बावजूद यहां पर 12 अप्रैल को सफल बोन मैरो ट्रांसप्लांट किया गया।

यूनिट का जिम्मा संभाल रहीं डॉ. प्रीति मालपानी व डॉ. प्राची चौधरी बताती हैं कि एक ट्रांसप्लांट में हमें 8 से 10 लाख का खर्च आता है, लेकिन संस्थाओं के सहयोग से 38 ट्रांसप्लांट पूरी तरह नि:शुल्क किए गए। निजी अस्पताल में 30 लाख तक खर्च आता है। अभी ट्रांसप्लांट के लिए 10 से ज्यादा बच्चे कतार में हैं। जांचें भी हो चुकी हैं।

  • 2018 में एमवाय में यूनिट शुरू हुई प्रदेश का एकलौता सरकारी अस्पताल, जहां यह सुविधा
  • 10 लाख तक एक ट्रांसप्लांट पर आता है खर्च, संस्थाओं के सहयोग से नि:शुल्क किया
  • 03 निजी अस्पतालों में भी शहर में बोन मैरो ट्रांसप्लांट की सुविधा उपलब्ध है

अंगदान के लिए सोटो भी यहीं पर है- ऑर्गन ट्रांसप्लांट के लिए भी इंतजार, अब तक 160 से ज्यादा को नई जिंदगी
कोविड के कारण करीब डेढ़ साल से बंद ऑर्गन डोनेशन भी जल्द शुरू हो रहा है। इस दौरान ऑर्गन ट्रांसप्लांट के लिए जो वेटिंग बढ़ी है वह उससे राहत मिलेगी। गौरतलब है कि अंगदान में इंदौर देश के चुनिंदा शहरों में शुमार है। 7 अक्टूबर 2015 को यहां पहला अंगदान रामेश्वर खेड़ा का हुआ था। इसके बाद यह सिलसिला बढ़ता गया और एक समय इंदौर चेन्नई के बराबरी में नंबर वन गया था। छह साल के दौरान 39 से ज्यादा बार ग्रीन कॉरिडोर बनाए गए। हार्ट, लिवर, किडनी से लेकर लंग्स डोनेशन से160 से ज्यादा लोगों को नई जिंदगी मिली।

शुरुआत में तो यहां से फ्लाइट से मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरू, चेन्नई, गुड़गांव तक हार्ट, लिवर, किडनी और लंग्स भेजे गए, लेकिन अब शहर के 10 से ज्यादा निजी अस्पतालों में ऑर्गन ट्रांसप्लांट किए जा रहे हैं। सुपर स्पेशिएलिटी में भी इसकी शुरुआत होने वाली है। ऑर्गन डोनेशन के कारण स्टेट ऑर्गन टिशू एंड ट्रांसप्लांट आर्गेनाइजेशन (सोटो) इंदौर को मिला। इससे अंगदान में इजाफा हुआ तो जरूरतमंदों को ऑर्गन आसानी से मिल रहे।

  • 2015 में पहला ऑर्गन डोनेशन शहर में किया गया। इसके बाद यह सिलसिला जारी है
  • 39 से ज्यादा बार शहर में अंगदान के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाया जा चुका
  • 2018 में इंदौर को सोटो सेंटर मिला। लगातार अंगदान के कारण यह संभव हो पाया
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