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इंदौर में स्विगी का डिलीवरी बॉय निकला गिरोह का सरगना:बैंक का अफसर बताकर गाड़ियां बेचता; key होल देख लगाता था मास्टर key

इंदौरएक महीने पहले
चोरी करने के बाद शराब पीकर जश्न मनाता था।

तुकोगंज पुलिस ने 5 वाहन चोरों के पास से 30 बाइक बरामद की है। गिरोह का मुख्य सरगना कुछ साल पहले स्विगी में फ़ूड डिलीवरी का काम करता था। फ़ूड डिलीवरी के दौरान उसने कई ऐसे इलाके और गाड़ियों की ऐसी जगह देख ली थी, जहां से गाड़ियों को आसानी से चुराया जा सकता था।

आरोपी गाड़ी चुराने के बाद बैंक का सीजिंग अधिकारी बन ग्राहक तलाश करता था। आरोपी के पास से एक मास्टर चाबी भी बरामद हुई है, जिसकी सहायता से पलक झपकते ही गाड़ी चोरी कर भाग जाता था। आरोपी के पास से 4 लाख के वाहन बरामद हुए हैं। आरोपी ने कबूला की वह वारदात से पहले भांग का नशा करता था और बाद में चोरी का जश्न मनाने के लिए शराब पीता था।

डीसीपी धर्मेन्द्र भदौरिया ने बताया कि आरोपी दीपक भावे (40) निवासी गोम्मटगिरी कुछ समय पहले एक फ़ूड डिलीवरी कंपनी में काम करता था। आरोपी की आमदनी कम होने के कारण परिवार का खर्चा चलाना मुश्किल हो गया था। आरोपी ने कुछ समय बाद गाडियां चोरी करना शुरू किया। उसने 1 साल में 30 से अधिक बाइक चोरी कर बेच दी। आरोपी के अन्य साथी यासिन पिता रहीम खान (26), वसीम पिता वहीद खान (21), समीर पिता करीम खान (22), शेख एहमद पिता शेख बाबू (32) सभी खंडवा के निवासी है।

आरोपी ने पलक झपकते खोला ताला
आरोपी ने पलक झपकते खोला ताला

ऐसे करता था चोरी
मुख्य आरोपी दीपक ने बताया की फ़ूड डिलीवरी के कारण उसे इंदौर के अधिकतर इलाकों की जानकारी थी। आरोपी गाड़ी चोरी कर उसे पार्किंग में खड़े करके चला जाता था। आरोपी कभी किसी बड़े मॉल की पार्किंग कभी अस्पताल और कभी पेड पार्किंग में गाड़ी खड़ी करता था। उसके बाद बैंक का सीजिंग अधिकारी बनकर ग्राहकों को तलाश लेता था। कई बार उसे गाड़ी की डिक्की में पेपर की फोटो कॉपी और कभी-कभी ओरिजिनल पेपर भी मिल जाते थे। इससे वो लोगों को बैंक द्वारा जब्ती की गाड़ी बताकर झांसे में ले लेता था। महज 4 से 5 हजार में गाड़ी बेच कर वो उस इलाके में दोबारा नहीं आता था। इस गिरोह को पकड़ने के लिए थाने के जवान लोकेश गाथे, किशोर सवालिया, संदीप रघुवंशी द्वारा गिरोह के सभी को गिरफ्तार किया ।

डीसीपी ,एडिशनल एसीपी और थाना प्रभारी
डीसीपी ,एडिशनल एसीपी और थाना प्रभारी

चोरी के रुपयों से पहले खरीदता था कपड़े
आरोपी निम्न वर्गीय परिवार का था। इसलिए रुपए आने के बाद बैंक अधिकारी बनने के लिए चोरी के रुपयों से नए-नए कपड़े खरीदता था। उसके बाद ग्राहकों की तलाश करता था। कपड़े नए होने के कारण आरोपी को कोई भी पहचान नहीं पता था कि वो कोई चोर है।

आरोपी के पास एक मास्टर चाबी
आरोपी ने पुलिस को बताया कि उसके पास एक मास्टर चाबी है, जिसकी सहायता से वो दो पहिया वाहन के ताले खोल लेता है। आरोपी गाड़ियों की रैकी के दौरान उसका की होल देखता था। पुराने लॉक होने के बाद किसी भी गाड़ी का लॉक ऊपर से देख आरोपी दीपक पहचान जाता था कि यह उसका शिकार है