पुलिस की कार्यशैली पर सवाल:चिताओं के लिए लकड़ी की व्यवस्था कर रहे टिंबर व्यापारियों के खिलाफ ही केस

इंदौर6 महीने पहले
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मुक्तिधाम में इतने शव पहुंच रहे कि चिताएं अब गेट के नजदीक भी जलाई जा रही हैं। - Dainik Bhaskar
मुक्तिधाम में इतने शव पहुंच रहे कि चिताएं अब गेट के नजदीक भी जलाई जा रही हैं।
  • कारखाने और इंडस्ट्री को छूट की गाइडलाइन भी नहीं मानी पुलिस ने

कोरोना काल में जान गंवा रहे लोगों को श्मशान में लकड़ी ठीक से मिल जाए, इसके लिए गुरु नानक टिंबर मार्केट के व्यापारी भी प्रयास कर रहे हैं। बुधवार को ऐसे ही दो व्यापारियों ने अपने प्रतिष्ठान खोले तो छत्रीपुरा पुलिस ने उनके खिलाफ धारा 188 के तहत केस दर्ज कर लिया। व्यापारियों ने कलेक्टर का आदेश भी दिखाया कि कारखाने, इंडस्ट्री को जनता कर्फ्यू में छूट है। 20 हजार से ज्यादा मजदूर टिंबर मार्केट से प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए हैं।

एसोसिएशन ऑफ इंडस्ट्री ने भी अपने कारखानों के लिए पत्र जारी कर रखा है, लेकिन पुलिस ने उनकी एक भी नहीं सुनी। केस दर्ज कर जेल भिजवा दिया। टिंबर व्यापारी प्रेमकुमार मालानी, विनोद पटेल के खिलाफ केस दर्ज किया। इस पर कई टिंबर व्यापारी थाने पहुंचे। पुलिस को बताया कि न केवल इंदौर बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों के श्मशान में भी लकड़ी की डिमांड आम दिनों की तुलना में ज्यादा बनी हुई है। अन्य शहरों से लकड़ी का बंदोबस्त और लकड़ी के अन्य उपयोग का व्यापार करने के लिए कारखाने खोले जा रहे हैं।

दोगुना तक हो गई लकड़ी की मांग
पंचकुइया, विजय नगर, जूनी इंदौर, रीजनल पार्क, मालवा मिल में पहले एक-दो ट्रक लकड़ी 15 से 20 दिन तक चल जाती थी, लेकिन अब तीन से चार दिन में इतनी लकड़ी की डिमांड हो रही है। 100 किलो से ज्यादा लकड़ी एक शव के लिए लगती है। हर मुक्तिधाम में रोज 8 से 10 तक शव आ रहे हैं।

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