गुलाब चक्रवात से फिर बदलेगा मौसम:2-3 अक्टूबर को इंदौर सहित पश्चिमी मप्र में फिर बारिश की संभावना, तीन-चार दिन रहेगा असर

इंदौर2 महीने पहले
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पूरे सितंबर रुक-रुककर हुई बारिश में इंदौर की औसत बारिश का आंकड़ा छूने के बाद अब भले ही दो दिन से धूप खिली हो लेकिन अब 2-3 अक्टूबर को इंदौर सहित पश्चिम मप्र के जिलों में फिर बारिश की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग का आकलन है कि अरब सागर में अब गुलाब चक्रवात का सिस्टम बन रहा है जिसके चलते इंदौर सहित कई स्थानों पर बारिश होगी और इसका असर तीन-चार दिन भी रह सकता है।

इस बार जिले में बारिश को लेकर शुरुआती दो महीने में चिंताजनक स्थितियां थी, अब वह सारी खत्म हो चुकी हैं। जुलाई-अगस्त में केवल 10 इंच बारिश होने के चलते किसानों के चेहरे मुरझा गए थे। कम बारिश के चलते पहले बोवनी हुुई सोयाबीन की फसलें कई क्षेत्रों में अधपकी रह गई थी। इसके बाद सितंबर के पहले दिन से ही लगभग हर दिन बारिश हुई। इसके तहत रोज दोपहर 1-2 बजे दिन बाद बादल छाए और रुक-रुककर बारिश होती रही। हालांकि इस पूरे मौसम में कभी भी तीन घंटे से ज्यादा मूसलधार बारिश नहीं हुई, लेकिन उसने औसतन आंकड़े को छू लिया। जिले के पूर्वी क्षेत्र में करीब 34 इंच जबकि पश्चिम क्षेत्र में 42 इंच बारिश हो चुकी है।

इंदौर, धार, झाबुआ, रतलाम, नीमच में होगी बारिश

जिले का कोटा पूरा होने के साथ अब गर्मी में जलसंकट की चिंता नहीं है और अक्टूबर-नवंबर में रबी की फसल की सिंचाई के लिए भी इंदौर सहित मालवा-निमाड़ में स्थिति अच्छी रहेगी। इधर, मौसम विभाग ने 29 सितंबर तक बारिश की संभावना जताई थी, लेकिन 27-28 सितंबर तक हल्की बारिश हुई जबकि 29 सितंबर का दिन सूखा रहा। गुरुवार सुबह से भी तेज धूप खिली और बारिश की संभावना नहीं है। मौसम वैज्ञानिक (एग्रीकल्चर) डॉ. एचएच खापडिया ने हाल ही में उड़ीसा, बंगाल की खाड़ी में गुलाब चक्रवात आया था, जिसका रुख अब अरब सागर की खाड़ी की ओर है। इसके चलते इसका असर गुजरात, छत्तीसगढ़ और पश्चिम मप्र में रहेगा। इससे इंदौर, धार, झाबुआ, मंदसौर, रतलाम, नीमच में सामान्य बारिश होगी। इस सिस्टम में अगर हवा तेज रही तो इसका असर 5-6 अक्टूबर तक रह सकता है।

फसलें पककर तैयार, अक्टूबर के पहले हफ्ते में कटेंगी
दूसरी ओर जिले के तालाबों की स्थिति भी काफी अच्छी है। सबसे बड़े सिरपुर तालाब उसकी क्षमता 19 फीट तक भरा है। ऐसे ही छोटा सिरपुर 14 फीट की क्षमता से आधा फीट कम है। पीपल्यापाला तालाब भी 22 फीट तक भरा हुआ। बड़ा बिलावली में 25 फीट पानी भरा है। अच्छी बारिश के चलते मालवा-निमाड सहित आसपास के क्षेत्रों में सोयाबीन की दूसरी बोवनी की फसलें पककर तैयार हैं। आष्टा व सीहोर के अलावा इनके आसपास के गांव कोटरी, वफापुर, बागेर, भंवरा, खड़ी, जावर, मेतवाड़ा, इछावर, मैना क्षेत्र की नई सोयाबीन फसलों की अच्छी ग्रोथ होने से किसान संतुष्ट हैं। 5-6 अक्टूबर के बाद ये फसलें काटी जा सकेंगी।

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