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MP ऑनलाइन के नाम पर फर्जी वोटर कार्ड:इंदौर में फोटो कॉपी की दुकान से हजारों कार्ड जब्त, द्वारकापुरी थाने के सामने चल रहा था रैकेट, 1 हजार लेकर 24 घंटे में देता था

इंदौर2 महीने पहले

इंदौर में एमपी ऑनलाइन के नाम से फर्जी वोटर आईडी कार्ड बनाए जा रहे थे। ये रैकेट द्वारकापुरी थाने के ठीक सामने सृष्टि फोटो कॉपी नाम की दुकान में चल रहा था। कलेक्ट्रेट के अधिकारियों ने बुधवार रात 8 बजे दबिश देकर हजारों फर्जी आईडी कार्ड जब्त की हैं। अधिकारियों ने ऋषि पैलेस के रहने वाले दुकान मालिक नरेंद्र सरसाठ को गिरफ्तार किया है। नरेंद्र ने पूछताछ में अपने एक साथी ब्रह्मनाद उर्फ प्रदीप निवासी रंगवासा का नाम बताया जो कार्रवाई के बाद से छिप गया था। अफसरों ने आज सुबह उसे भी गिरफ्तार कर लिया है।

प्रदीप एक वोटर आईडी कार्ड बनाने के एवज में 1000 रुपए लेता था। जबकि सरकारी माध्यम से एक कार्ड 25 रुपए में और एजेंट के जरिए 250 रुपए में बन जाता है। यह कार्ड एक महीने के अंदर डाक से आवेदक के पते पर भेज दिए जाते हैं। प्रदीप 24 घंटे के अंदर ही वोटर कार्ड दे दिया करता था। दस्तावेज की कमी के कारण लोग प्रदीप के झांसे में आ जाते थे और कार्ड बनाने के लिए 1000 रुपए भी दे देते थे।

ऐसे हुआ रेकैट का खुलासा

अफसरों ने बताया कि उन्हें एक महिला का वोटर कार्ड मानक साइज से बड़ा मिला। विभाग ने महिला से कार्ड को लेकर जानकारी मांगी। महिला ने बताया कि उसने ये कार्ड सृष्टि फोटो कॉपी से बनवाया है। इसके बाद अधिकारियों ने कार्रवाई की।

कार्ड पर थे अधिकारी के फर्जी साइन

छापे के दौरान सर्चिंग में कलेक्ट्रेट के ही एक अधिकारी के फर्जी साइन भी मिले थे। दुकान में रखे दस्तावेजों को देखकर अफसर खुद चौंक गए। कार्ड पर अफसरों के फर्जी साइन, सील और दस्तावेज मिले हैं। जिसकी जांच जारी है।

द्वारकापुरी थाने के ठीक सामने है सृष्टि फोटो कॉपी।
द्वारकापुरी थाने के ठीक सामने है सृष्टि फोटो कॉपी।

आरोपी बोला, गलत लिंक मिल गई थी

पूरे मामले में मुख्य आरोपी प्रदीप अब पुलिस को गुमराह करने की कोशिश कर रहा है। प्रदीप ने पुलिस को बताया कि वोटर आई कार्ड बनाने के लिए उसे एमपी ऑनलाइन से गलत लिंक मिल गई थी। जिसके जरिए वो आईडी कार्ड बना रहा था। अधिकारी अब आरोपी प्रदीप के गलत लिंक वाले एंगल से भी जांच में जुटे हैं।

कोचिंग छोड़ शुरू किया फर्जीवाड़ा

मुख्य आरोपी प्रदीप के साथी नरेंद्र ने पूछताछ में बताया कि प्रदीप ने पहले दुकान के पास में ही कोचिंग शुरू की थी। जिसे कुछ समय बाद बंद कर दी थी और आयुष्मान योजना के साथ-साथ गरीबों को अन्य स्कीम में लोन दिलाने की बात करते हुए प्रदीप मेरी दुकान पर आकर बैठने लगा। गरीबों की मदद करने की आड़ में फर्जीवाड़ा करने लगा। मामले में अभी पूछताछ जारी है।

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