कोरोना संक्रमित 5 शहरों ने क्या किया:इंदौर में 12 लाख लोगों का सर्वे शुरू, पुणे में संदिग्ध रातोंरात क्वारैंटाइन किए गए और भीलवाड़ा में सबकी स्क्रीनिंग हुई

इंदौर2 वर्ष पहले
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  • केरल के कासरगोड में कम्युनिटी पुलिस तैनात, इसमें संबंधित वार्ड का व्यक्ति ही क्वारैंटाइन किए गए लोगों पर नजर रख रहा
  • गुजरात के सूरत में 16 मार्च को पहला संक्रमित मिलते ही 50 हजार आबादी को क्वारेंटाइन किया गया

कोरोना संक्रमण देश में सामने आने के बाद केरल का कासरगोड 90 मरीजों के साथ देश में पहले नंबर पर था, लेकिन अब वह टॉप टेन की सूची से बाहर है और अब ग्रीन कैटेगरी की ओर है। राजस्थान के भीलवाड़ा ने अपना खुद का मॉडल विकसित किया और कोरोना को कंट्रोल किया। महाराष्ट्र के पुणे में एक समय तेजी से कोरोना संक्रमण फैला, बाद में कंट्रोल हुआ। मध्यप्रदेश के इंदौर में लॉकडाउन के एक महीने बाद डोर-टू-डोर स्क्रीनिंग की तैयारी है। वहीं, गुजरात के सूरत ने भी स्थिति को नियंत्रण में रखा है। भास्कर ने कासरगोड, भीलवाड़ा, पुणे और सूरत के कलेक्टरों से जाना कि उन्होंने किस तरह कोरोना से निपटने के इंतजाम किए हैं।

इंदौर: पहला केस 24 मार्च को, अब तक कंटेनमेंट एरिया में 12 लाख जांचें पूरी

इंदौर में पहला केस 24 मार्च को सामने आया था। कलेक्टर मनीष सिंह के मुताबिक 1700 से ज्यादा लोग क्वारैंटाइन केंद्रों में हैं। एक हजार से ज्यादा होम क्वारैंटाइन हैं। 171 कंटेनमेंट एरिया हैं। अब 1800 से ज्यादा टीमें बनाकर शहरी सीमा की 12 लाख की आबादी का डोर-टू-डोर सर्वे शुरू हो चुका है। कंटेनमेंट एरिया में ड्रोन से नजर रखी जा रही है। यहां लगातार सैनिटाइजेशन किया जा रहा है। कोविड-19 मोबाइल ऐप में सर्वे टीम सभी को डेटा अपलोड कर रही है। संदिग्ध मिलने पर डॉक्टर को अलर्ट भेजा जाता है। ओला एम्बुलेंस सुविधा शुरू की गई है।

इदौर कलेक्टर मनीष सिंह ने बताया कि शहर में अब तक 6400 कोरोना संदिग्धों के सैम्पल लिए गए हैं। इनमें से 3400 की जांच रिपोर्ट आ चुकी है।
इदौर कलेक्टर मनीष सिंह ने बताया कि शहर में अब तक 6400 कोरोना संदिग्धों के सैम्पल लिए गए हैं। इनमें से 3400 की जांच रिपोर्ट आ चुकी है।

पुणे: टूर ऑपरेटर्स से बाहर से आए लोगों की लिस्ट ली, उन्हें रातोंरात क्वारैंटाइन किया

शहर में पहला केस 9 मार्च को आया। इसके बाद सभी टूर ऑपरेटर्स से विदेशों और बाहर से आने वालों की सूची लेकर उनकी जांच शुरू की गई। पहले से ही टीम और एम्बुलेंस तैयार कर ली गईं, ताकि कोरोना संक्रमित मिलते ही उनके संपर्क में आए सभी लोगों को क्वारैंटाइन किया जा सके। एक ऑटो वाला पॉजिटिव आया तो हमने रातोरात उसके संपर्क वाले सभी लोगों को क्वारैंटाइन कर दिया। इन्हें रेंडमली हर घंटे फोन करते, ताकि सुनिश्चित हो सके कि कोई बाहर नहीं गया। शहर में 18000 लोगों को क्वारैंटाइन करने का इंतजाम किया गया है।आइसोलेशन के लिए 5000 बेड हैं।

भीलवाड़ा: 18 मार्च को पहले 6 केस आए, सवा लाख घरों की स्क्रीनिंग की

भीलवाड़ा कलेक्टर राजेंद्र भट्ट बताते हैं कि 14 मार्च को शासन ने एडवाइजरी जारी की। हमने उसी समय मॉल, सिनेमाघर और भीड़ वाले दूसरे स्थानों को बंद करने का आदेश दे दिया। 18 को एक अस्पताल के डॉक्टर में संक्रमण के लक्षण दिखे। उनकी जांच रिपोर्ट का इंतजार किए बगैर हमने उस अस्पताल में 14 दिन पहले तक देखे गए मरीजों की लिस्ट तैयार की। लिस्ट में करीब 5000 लोगों के नाम थे। यहां का स्टाफ 310 लोगों का था। इन सभी को चिह्नित कर क्वारैंटाइन कर दिया। अस्पताल के एक किमी के दायरे को कंटेनमेंट कर दिया। 19 मार्च को डॉक्टर की रिपोर्ट पॉजिटिव आते ही जिले में कर्फ्यू लगा दिया गया। सीमाएं सील कर दी गईं। पहले चरण में 74 हजार और अगले चरण में 67 हजार घरों में स्क्रीनिंग की गई। 

सूरत: मोबाइल ऐप से निगरानी की गई, 50 हजार लोगों को होम क्वारैंटाइन किया

सूरत कलेक्टर डॉ. धवल पटेल बताते हैं कि पहला केस 16 मार्च को आने के बाद हमने उस क्षेत्र की 50 हजार आबादी को क्वारैंटाइन कर दिया। इन पर निगरानी के लिए मोबाइल एप्लिकेशन बनाकर उस पर डेटा अपलोड कराया, जिससे कोई भी घर से बाहर निकले तो अलर्ट आ जाए। बाहर से आए 4000 लोगों को आइसोलेशन में रखा गया। 21 मार्च को हमने कर्फ्यू लगा दिया। साथ ही सर्दी, खांसी के मरीजों की पहचान शुरू कर दी। जहां भी पहला केस मिलता, उस इलाके को तुरंत कंटेनमेंट कर देते, ताकि संक्रमण न फैले।

कासरगोड: 30 जनवरी को पहला केस सामने आया था, तभी से कम्युनिटी पुलिस तैनात कर दी

कलेक्टर डॉ. डी. सतीश बाबू बताते हैं कि हमारे यहां विदेशों से आने वाले काफी लोग हैं। कोरोना का पहला मरीज सामने आते ही हमने पूरे शहर को होम क्वारैंटाइन कर दिया और इसके बाद विदेश से आने वालों की सूची लेकर जांच शुरू कर दी थी। 80 लोग कोरोना संक्रमित मिले। इसके बाद जो मरीज सामने आए हैं, वे इन लोगों के संपर्क वाले हैं। होम क्वारैंटाइन के दौरान कोई बाहर नहीं आए, इसके लिए कम्युनिटी पुलिस मैन नियुक्त किए। इसके लिए हर वार्ड वाले को जिम्मेदारी दी गई कि वह होम क्वारैंटाइन वालों पर नजर रखें। 

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