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रेमडेसिविर आउट ऑफ स्टॉक:मांग कम होने पर कंपनियों ने रेमडेसिविर किए थे डंप, 10 दिन बाद ही होने लगी कालाबाजारी

इंदौर14 दिन पहलेलेखक: संजय गुप्ता
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अब बेड नहीं, रेमडेसिविर और ऑक्सीजन की आपूर्ति बड़ी चुनौती। - Dainik Bhaskar
अब बेड नहीं, रेमडेसिविर और ऑक्सीजन की आपूर्ति बड़ी चुनौती।

कोरोना से निपटने के लिए अब अस्पतालों में बेड से ज्यादा चुनौती मरीजों को ऑक्सीजन और रेमडेसिविर इंजेक्शन की आपूर्ति की बन गई है। इन दोनों के इंतजाम में शासन-प्रशासन का दम फूलने लगा है। निजी कंपनियों द्वारा रेमडेसिविर मप्र के बाहर भेजा जाता है। इसके चलते उन पर किसी का दबाव नहीं चल रहा है। इंदौर में 25 स्टॉकिस्ट हैं और उन्होंने साफ कर दिया कि कंपनी जितना भेज रही, उतना सप्लाय कर रहे हैं। देखने में आया है कि दस फीसदी से कम लंग्स संक्रमण वाले, होम आइसोलेशन में रहने वाले कम गंभीर मरीजों को भी यह इंजेक्शन लग रहे हैं।

इसके चलते हर दिन की मांग छह हजार इंजेक्शन तक पहुंच गई है, जबकि आपूर्ति तीन हजार इंजेक्शन प्रतिदिन की है। केंद्र की गाइडलाइन के तहत इंजेक्शन केवल गंभीर मरीजों तक ही पहुंचे, इसकी कोई व्यवस्था प्रशासन के पास नहीं है। इसके चलते हालात बेकाबू हो रहे हैं और इसके लिए लोग दुकानों के बाहर सुबह से ही इंतजार कर रहे हैं। जानकारों के अनुसार यदि मरीज को अन्य बीमारी है, उम्र अधिक है तो 10 फीसदी लक्षण होने पर यह देना चाहिए, वहीं अन्य स्थिति में 25 फीसदी से अधिक संक्रमण में ही यह डोज देना चाहिए। कम संक्रमण अन्य दवाओं से भी ठीक होता है।
15 दिन में चार गुना बढ़ी मांग
फरवरी-मार्च के दौरान रेमडेसिविर की मांग कम थी। इसकी एक्सपायरी डेट पास आने पर कंपनियों ने इसकी कीमत कम कर इसे स्टॉकिस्ट के पास डंप कर दिया था, लेकिन अब इसी पर जमकर मुनाफा वसूली हो रही है और कालाबाजारी की जा रही है। 15 दिन में इसकी मांग एक-डेढ़ हजार प्रतिदिन से बढ़कर 6 हजार हो गई है।
विजयवर्गीय ने 600 ऑक्सीजन सिलेंडर की व्यवस्था की
भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ऑक्सीजन सिलेंडर की कमी को देखते हुए अपने मित्र उद्योगपति संजय अग्रवाल से 600 ऑक्सीजन सिलेंडर निःशुल्क उपलब्ध करवा रहे हैं। रेमडेसिविर की व्यवस्था के लिए भी जिम्मेदारों से चर्चा कर रहे हैं।

रेमडेसिविर; अमेरिकी कंपनी गिलएड का उत्पाद, देश में सिप्ला, मायलान, डॉ. रेड्डी, जुवेंटस केडिला, हिटरो बना रहे

  • एक मरीज को छह इंजेक्शन का डोज लगता है, पहले दिन दो लोडिंग डोज और फिर चार दिन तक एक-एक।
  • अमेरिकी कंपनी गिलएड का यह उत्पाद है। देश में सिप्ला, मायलान, डॉ. रेड्डी, जुवेंटस केडिला, हिटरो द्वारा इसका उत्पादन किया जा रहा है।
  • हर दिन औसतन 90 हजार से एक लाख डोज का उत्पादन हो रहा है।
  • स्टॉक में दवाएं नहीं हैं। रोज आ रही है जो स्टॉकिस्ट से अस्पताल की दवा दुकान व अन्य जगह सप्लाय हो रही है।
  • गोवा, हैदराबाद, करनाल चंडीगढ़ आदि जगहों पर इनके प्लांट हैं।
  • कंपनियों ऑर्डर लेकर अपने बड़े सीएंडएफ या फिर स्टॉकिस्ट को यह दवाएं एयर कार्गों के जरिए सप्लाय कर रही हैं।
  • मप्र में औसतन सात हजार डोज हर दिन आ रहे। इसमें तीन से साढ़े तीन हजार इंदौर में और बाकी मप्र के अन्य जिलों में जा रहे।
  • इंदौर में 80 कोविड अस्पतालों के साथ 50 अन्य अस्पतालों में संदिग्ध भर्ती हैं। चार हजार से ज्यादा मरीज भर्ती हैं।
  • दवा के दाम बीते साल से कम हैं, लेकिन कालाबाजारी के चलते महंगे दाम में मिल रहे हैं, वहीं अस्पतालों से अटैच दुकानें एमआरपी पर यह बेचती हैं, जबकि कंपनी से स्टॉकिस्ट को मिले दाम और आमजन के बीच पहुंचने में दोगुना अंतर है। सामान्य रूप से दो से ढाई हजार में मिलती है।

चार गुना बढ़ गई मांग, हम रुपए लेकर बैठे हैं, आपूर्ति नहीं हो रही, क्या करें

15 दिन में ही मांग चार गुना बढ़ गई है। हम तो एडवांस देकर बैठे हैं। और भी देने को तैयार हैं, लेकिन कंपनी की क्षमताएं हैं। स्टॉकिस्ट से भी जवाब आता है कि जितनी आपूर्ति वहां से हो रही है, वह सभी को एक तय हिस्से में दी जा रही है। मरीज के परिजन सुबह से ही बैठ रहे हैं। कुछ दिन यही स्थिति रहेगी। - मकरंद शर्मा, क्वालिटी ड्रग संचालक

खपत कम करने की जरूरत है, गंभीर मरीजों को ही दें : ड्रग मैन्युफैक्चर्स एसो.

बेसिक ड्रग मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन के महासचिव जेपी मूलचंदानी ने कहा कि खपत कम करने की जरूरत है और यह गंभीर मरीज को देने से ही कम होगी। वहीं भाजपा नेता गोविंद मालू ने केंद्र सरकार से इसे ड्रग प्राइज कंट्रोल आर्डर में लेने की मांग की है, इसके लिए उन्होंने केंद्रीय मंत्री से बात की।

भिलाई से हर 7 दिन में 15 हजार क्यूबिक मीटर ऑक्सीजन की आपूर्ति और बढ़ाएंगे

ऑक्सीजन के लिए अस्पतालों को सांवेर रोड से पीथमपुर तक वाहन दौड़ाने पड़ रहे हैं। उधर, संभागायुक्त डॉ. पवन शर्मा ने बुधवार को भिलाई से हर सात दिन में 5 टैंकर भेजने की व्यवस्था कराई। इससे 15 हजार क्यूबिक मीटर ऑक्सीजन की आपूर्ति और बढ़ जाएगी। पीथमपुर में भी ऑक्सीजन का औद्योगिक उपयोग बंद करने के आदेश हो गए हैं, वहां से 1200 सिलेंडर रोज सप्लाय हो रही है।

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