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बेअसर हो रही दवाएं:मनमाने ढंग से दवाएं लेने का नतीजा; 30 से 40% लोगों पर काम नहीं कर रही जीवन रक्षक दवाएं, कुछ तो 90% लोगों पर कारगर नहीं

इंदौर19 दिन पहलेलेखक: नीता सिसौदिया
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एंटीबायोटिक दवाओं को लेकर भास्कर की बड़ी पड़ताल, सितंबर माह में हुए टेस्ट के नतीजे ही चौंकाने वाले, सरकार बना रही एंटीबायोग्राम। - Dainik Bhaskar
एंटीबायोटिक दवाओं को लेकर भास्कर की बड़ी पड़ताल, सितंबर माह में हुए टेस्ट के नतीजे ही चौंकाने वाले, सरकार बना रही एंटीबायोग्राम।

दवाई की दुकान पर जाकर सीधे एंटीबायोटिक लेने, ट्रीटमेंट पूरा नहीं लेने जैसी आम आदतों के कारण जीवन रक्षक दवाओं का असर तेजी से कम हो रहा है। सरकार एंटीबायोटिक पॉलिसी ला रही है, उसके लिए शहर के कुछ अस्पतालों में रिसर्च शुरू हुई है। उसके पहले भास्कर ने शहर की एक लैब में सितंबर माह में हुए टेस्ट की रिपोर्ट निकाली तो कई चौंकाने वाले नतीजे सामने आए।

30-40 फीसदी लोग ऐसे हैं, जिन पर अब किसी तरह की एंटीबायोटिक असर नहीं कर रही हैं। वहीं कुछ दवाएं ऐसी हैं, जो 90% लोगों पर असर नहीं कर रही हैं। मेदांता अस्पताल के माइक्रो बायोलॉजिस्ट डॉ. कमलेश पटेल कहते हैं कि बैक्टीरिया अब दवाइयों को चकमा दे रहे हैं। 100 से ज्यादा एंटीबायोटिक दवाइयां हैं। सभी का रजिस्टेंस देखा जा रहा है। कुछ दवाइयां ऐसी हैं कि यदि सौ मरीजों के सैंपल्स की जांच की जा रही है तो बमुश्किल 5 से 6 मरीजों में ही असर दिखा रही है।

ये है सितंबर माह के दौरान एक लैब में हुए टेस्ट का रिपोर्ट कार्ड

  • यह सिर्फ एक निजी अस्पताल का मासिक रिपोर्टकार्ड है।
  • एक महीने में करीब 220 सैंपल्स की जांच की गई।
  • 41% सैंपल्स पॉजिटिव मिले। कुछ दवाइयों का रजिस्टेंस मिला, कुछ का नहीं मिला।

बड़ी वजह- अनदेखी

  • लोग मन से मेडिकल स्टोर से बेरोकटोक ये दवाइयां ले आते हैं।
  • अप्रशिक्षित लोग ग्रामीण इलाकों ये दवाएंं धड़ल्ले से देते हैं।
  • पूरा इलाज नहीं लेने पर सारे बैक्टिरिया नहीं मरते और रेजिस्टेंट हो जाते हैं।

पाेल्ट्री में उपयोग बहुत नुकसानदेह

डॉ. शुक्ला बताते हैं कि जिस बीमारी में जो दवा कारगर है, वहीं मरीज को दी जाना चाहिए। पोल्ट्री फाॅर्म में कोलिस्टिन दवा दी जा रही थी। अंडा या चिकन खाने के साथ इंसान के शरीर में भी दवा थोड़ी मात्रा में पहुंच रही थी। वेटेरनरी में एरिथ्रोमाइसिन का उपयोग बहुत ज्यादा करते थे। वह भी अब रजिस्टेंस बता रही है।

सामान्य बीमारी में हैवी एंटीबायोटिक

लोग सामान्य बुखार में हैवी एंटीबायोटिक दे रहे हैं। दुष्परिणाम यह होगा कि इन दवाओं का असर कम हो जाएगा। 2007 से नई एंटी बॉयोटिक नहीं आई है।
- डॉ. पंकज शुक्ला, राज्य नोडल अधिकारी भोपाल

बैक्टीरिया दे रहे हैं रोगों को चकमा

जिस तरह कोविड वायरस खुद को बचाने के लिए म्युटेशन कर रहा था, उसी तरह बैक्टीरियां भी कर लेता है और ड्रग रजिस्टेंस हो जाता है।
- डाॅ. एसपी जायसवाल चोइथराम अस्पताल

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