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पानी-पानी शहर:निगम का दावा; शहर के सिर्फ 42 स्थानों पर भरता है बारिश का पानी

इंदौर2 महीने पहले
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बीआरटीएस... बारिश होने की स्थिति में बीआरटीएस पर कई जगह ऐसा नजारा बन जाता है। - Dainik Bhaskar
बीआरटीएस... बारिश होने की स्थिति में बीआरटीएस पर कई जगह ऐसा नजारा बन जाता है।
  • भास्कर पड़ताल; 79 वार्ड के 226 स्थान बरसात होते ही बन जाते हैं तालाब

महज तीन इंच बारिश में डूब रहे इंदौर को लेकर नगर निगम का दावा है कि सिर्फ 42 स्थानों पर बारिश का पानी इकट्‌ठा होता है। भास्कर ने सभी 19 जोन के प्रभारियों द्वारा सर्वे कर बनाई गई रिपोर्ट निकाली तो पता चला शहर के 85 में से मात्र 6 वार्ड ऐसे हैं, जहां बारिश में जल जमाव नहीं होता। बाकी 79 वार्ड में 226 जगह पर बरसात होते ही तालाब जैसी स्थिति बन जाती है।

इनमें कलेक्टोरेट, ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर, जंजीरावाला चौराहा जैसी बांड सड़कें भी शामिल हैं। पिछले दिनों निगमायुक्त की मौजूदगी में हुई समीक्षा बैठक में अफसरों ने जलजमाव रोकने ज्यादातर स्थानों पर नई पाइपलाइन डालने की बात कही, जबकि हर साल इन पर जनकार्य विभाग 10 करोड़ से ज्यादा खर्च करता है। तात्कािलक रूप से जलभराव वाली जगह कच्ची नाली बनाते हैं। सवाल उठता है कि कच्ची नाली ही बनानी है तो ये करोड़ों का बजट कहां जाता है?

आइडीए भी पीछे नहीं

10 करोड़ खर्च, फिर भी BRTS पर भर रहा पानी

निरंजनपुर से राजीव गांधी प्रतिमा तक 11 किमी लंबे बीआरटीएस में मेनहार्ट कंसल्टेंट थे। इस दौरान सीवरेज और स्टार्म वाटर लाइन डालने में लापरवाही बरती गई। पूरे बीआरटीएस पर 1.5 से 4 फीट तक चौड़ाई वाले पाइप डाले गए, जबकि बीआरटीएस पर आसपास की कॉलोनियों का पानी भी आता है इसे ध्यान में नहीं रखा गया। इससे बीआरटीएस तो तालाब बन ही जाता है। ड्रेनेज लाइन में भी 8 स्थानों पर त्रुटियां पाईं गईं। इसे सुधारने में ही 10 करोड़ का खर्चा आ गया। इसके बाद भी थोड़ी सी बारिश में वहां पानी भर जाता है।

समझें बीआरटीएस पर कैसी-कैसी गड़बड़ियां की गईं

  • नेहरू स्टेडियम के सामने 1100 एमएम की लाइन 17.5 मीटर तक डाली ही नहीं गई, जिससे लाइन जुड़ी ही नहीं।
  • गीताभवन चौराहे पर भी 1000 एमएम की लाइन में 2 मीटर का गैप था, जिसे जोड़ने के लिए लाइन डालने के साथ ही चेंबर बनाना पड़ा।
  • निरंजनपुर पर 1600 एमएम डाया की लाइन का लेवल ही ठीक नहीं था, तो दोबारा लाइन डालना पड़ी।
  • पटेल मोटर्स के सामने भी 1600 एमएम डाया की लाइन में 125 मीटर तक लेवल ऊपर नीचे था, जिसे दोबारा सुधारा।
  • सत्यसाईं चौराहे के पास 173 मीटर तक लाइन का लेवल गड़बड़ था। विजयनगर चौराहे पर लाइन में गैप निकला। शालीमार टाउनशिप के सामने नई लाइन डालना पड़ी।

जहां पहले से लाइन मौजूद, वहां दोबारा लाइन डालते गए नगर निगम अफसर

ड्रेनेज और स्टार्म वाटर लाइन में गड़बड़ियों को लेकर अब तक कई शिकायतें हो चुकी हैं। एमआईसी सदस्य रहे दिलीप शर्मा ने 10 मार्च 2014 को शिकायत में बताया कि विजयनगर से बाम्बे हॉस्पिटल और वल्लभनगर के बीच लाइन होने के बावजूद दोबारा डाली गई।

19-6-2015 को उन्होंने एक और शिकायत की, जिसमें बताया कि वार्ड 43 के अनूपनगर में कॉलोनाइजर द्वारा पूर्व में डाली गई लाइन के बावजूद नागार्जुन कंपनी द्वारा लाइन डाल दी गई, जिसका लेवल नहीं मिलने से ड्रेनेज लाइन चोक हो गई है। इन शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

जलजमाव का स्थायी हल करने के लिए टीमें लगाई

शहर में जलजमाव की शिकायतें दूर करने के लिए निगम ने टीमें लगा दी हैं। जितने स्थानों पर भी जलजमाव होता है, उन्हें जोनवार चिह्नित किया गया है, इनका स्थायी समाधान करेंगे, ताकि लोगों को परेशानी न हो-संदीप सोनी, अपर आयुक्त

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