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इंदौर में कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग पर जोर:दो दिन में 10 नए कोरोना पॉजिटिव मिले, मरीजों को बेटियां दे रही समझाइश, पापा… एडमिट हो जाओ, आप अच्छे होंगे तो हम भी स्वस्थ रहेंगे

इंदौर4 महीने पहले
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इंदौर में कोरोना शुक्रवार और शनिवार को 5 नए कोरोना पॉजिटिव मिले। कोविड केयर सेंटर और अस्पतालों में 33 मरीज भर्ती हैं, तो कुछ होम आइसोलेट हैं। खास बात यह कि चार दिन पहले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जब इंदौर में 7 नए मरीज सामने आए थे तो चिंता जताई थी। इस पर स्वास्थ्य विभाग की टीमें एक्टिव मरीजों की कॉन्टैक्ट हिस्ट्री निकालने की पूरी कोशिश कर रही है। दो दिन में 10 पॉजिटिव मरीजों के सात नए क्षेत्र बाणगंगा, तेजाजी नगर, राऊ, हीरा नगर, विजय नगर, पलासिया व विजय नगर पता चले हैं। इसके चलते इन क्षेत्रों के लोगों के सैम्पल लिए जा रहे हैं।

हरसंभव कोशिश की जा रही है कि जो भी नए पॉजिटिव आ रहे हैं, उन्हें कोविड केयर सेंटर या अस्पताल में भर्ती किया जाए। खास बात यह कि इनमें कुछ मरीज जो काफी जिद्दी होते हैं, कई बार काउंसलिंग के बाद भी एडमिट नहीं हो रहे हैं, ऐसे मामलों में उनकी बेटियों की मदद ली जा रही है। जिनसे वे आसानी से राजी होकर एडमिट हो जाते हैं। वैसे टीम द्वारा संभावित तीसरी लहर को लेकर नए मरीजों के मामले में काफी कसावट है।

कोरोना की दूसरी लहर जैसे भयावह हालात न बने, इसके लिए विभाग ने सभी टीमों को विशेष रूप से ट्रेंड किया है। इसके लिए हर नए मरीज और उसके संपर्क में रहने वालों पर बारीकी से नजर रखी जा रही है। हर मरीज की काउंसलिंग के लिए टीम तुरंत मौके पर पहुंच रही है। हालांकि संक्रमण कम होने के कारण मरीज एडमिट होने के लिए आसानी से नहीं मानते और दूसरा यह कि अभी जितने भी नए मरीज मिल रहे हैं उनमें अधिकांश एसिम्टोमैटिक (पॉजिटिव तो है लेकिन सर्दी, खांसी, सांस लेने में दिकक्त कुछ नहीं) हैं। इसके चलते भी वे खुद को सुरक्षित मानकर होम आइसोलेट होना चाहते हैं। इसके लिए टीम ने स्टेपवाइज फार्मूला तैयार किया है।

मरीज की पॉजिटिव रिपोर्ट पर तीन स्टेज पर स्वास्थ्य विभाग की टीम काम कर रही है।
मरीज की पॉजिटिव रिपोर्ट पर तीन स्टेज पर स्वास्थ्य विभाग की टीम काम कर रही है।

जानिए आपके अच्छे के लिए कितनी तत्पर है टीम

- जैसे ही किसी मरीज की पॉजिटिव रिपोर्ट आती है तो तीन स्टेज पर स्वास्थ्य विभाग की टीम काम कर रही है।

- सबसे पहले आरआरटी की टीम उसके घर पहुंचती है। टीम का पूरा प्रयास रहता है कि मरीज को कोविड केयर सेंटर में भर्ती कराया जाए।

- इसके लिए टीम में शामिल डॉक्टर्स सबसे पहले उसकी काउंसलिंग करते हैं। उसे समझाते हैं कि आपको जो बीमारी है। वह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक पहुंच रही है और इसकी गति बहुत तेज है।

- आपका एडमिट होना दो प्रकार से कारगर होगा। पहला यह कि यदि आप बीमार है और आप पहले दिन से डॉक्टरों की निगरानी में रहेंगे तो बीमारी बढ़ने की संभावना बहुत कम हो जाएगी और चार दिन में नेगेटिव रिपोर्ट आने व स्वस्थ होने पर डिस्चार्ज कर दिया जाएगा।

- इसके बाद भी मरीज नहीं मानता है तो सैम्पलिंग टीम के डॉक्टर द्वारा उसकी काउंसलिंग की जाती है।

- इसमें भी नहीं मानने पर संबंधित क्षेत्र के एसडीएम व पुलिस के माध्यम से उसकी काउंसलिंग की जाती है। इसमें अधिकांश मरीज मान जाते हैं। ऐसे में उन्हें तुरंत एम्बुलेंस 108 से कोविड केयर सेंटर पहुंचा दिया जाता है, लेकिन कुछ ऐसे होते हैं जो फिर भी अलग-अलग तर्क देते हैं।

- ऐसे मरीजों का कहना होता है कि हमारा चार बेड रूम का मकान है, हम घर में सिर्फ दो लोग ही रहते हैं। हम यहीं आइसोलेट हो जाएंगे। ऐसे में उन्हें बताया जाता है कि घर में आपकी सेवा करने वाला व्यक्ति किसी ने किसी रूप में आपके संपर्क में आएगा और वह भी संक्रमित हो सकता है तो कुछ मरीज तैयार हो जाते हैंं।

बेटियों का फार्मूला हो रहा कारगर

इसके बावजूद जो बिल्कुल तैयार नहीं होते तो उनके अड़ियल रवैये को देखते हुए पत्नी, बहू और खासकर बेटी का सहयोग लिया जाता है। ऐसे केसों में अक्सर देखा गया है कि अधिकांश व्यक्ति बेटी की बात नहीं टालता। बेटी द्वारा जब यह कहा जाता है कि पापा एडमिट होने में ही आपका फायदा है। पापा, आप अच्छे होंगे तो हम अच्छे होंगे। ऐसी बातों से संक्रमित व्यक्ति अक्सर मान जाता है और एडमिट हो जाता है। कई परिवारों में इस तरह की काउंससिंग काफी मददगार हो रही है।

फिर इस स्तर पर कोशिश

- इसके बावजूद जब फिर भी मरीज एडमिट होने को राजी नहीं होता या यह कहता है कि वह खुद अपनी कार से एडमिट होने जा रहा है तो उससे संबंधित कोविड केयर सेंटर या अस्पताल का नाम-पता पूछा जाता है। अगर मरीज दोपहर 2 बजे जाने को कहता है तो ढाई बजे टीम उसके घर जाती है और देखती है कि वह गया या नहीं। अगर गया तो अस्पताल में फोन कर पूछते हैं कि उक्त नाम का मरीज आया या नहीं। अगर वह पहुंच गया होता है तो टीम को उसके बारे में जो जानकारी होती है। वह अस्पताल को दे देती है।

- अगर अस्पताल नहीं पहुंचा तो उसके परिजन को कहा जाता है कि उसे फोन कर पूछिए कि कौन से अस्पताल गया है। वह जिस अस्पताल जाता है तो वहां आरआरटी टीम पहुंचकर पूरी जानकारी देती है। इस प्रकार कोरोना संक्रमण पर नियंत्रण के लिए ‘फुल प्रूव सिस्टम’ बनाया गया है ताकि संभावित तीसरी लहर से बचा जा सके।

एक्टिव 33 मरीजों में कॉन्टैक्ट हिस्ट्री का ही अंदेशा

अभी दो 5-7 मरीज आ रहे हैं वे सभी अलग-अलग क्षेत्रों के हैं। दो दिन पहले जो मरीज मिले वे बाणगंगा, तेजाजी नगर, राऊ, हीरा नगर, विजय नगर, पलासिया व विजय नगर क्षेत्र के हैं। यानी एक क्षेत्र से एक-दो से अधिक नहीं नहीं। दूसरा यह कि अधिकांश ए सिम्टोमैटिक हैं। ऐसे में कॉन्ट्रैक्ट हिस्ट्री निकालने में काफी मशक्कत हो रही है, लेकिन संभावना यही बलवती है। यहां भी टीमें तीन स्तर पर कॉन्ट्रैक्ट हिस्ट्री निकालने के लिए काम कर रही है।

- पहली स्टेज में संक्रमित के परिवार व संबंधी जो उनके साथ रहते हैं उनकी सैम्पलिंग हो रही है।

- दूसरी स्टेज में उसके आसपास के लोग, पड़ोसी रिश्तेदार, जहां उसके जाने की संभावना होती है।

- तीसरी स्टेज में उसके ऑफिस, कार्यस्थल, किराना दुकान, सैलून जहां वह 5-6 दिन पहले गया था। वहां से जुड़े लोगों की हिस्ट्री ली जाती है कि उनमें कोई पॉजिटिव तो नहीं है।

- खास बात यह कि अब रिपोर्ट 24 घंटे में ही मिल रही है। ऐसे में किसी क्षेत्र में एक-दो मरीज ही पाए जाने पर उस क्षेत्र को इन्फेक्टेट नहीं माना जाता इसलिए बैरिकेडिंग की जरूरत बहुत कम पड़ रही है।

- ऐसे ही पहली व दूसरी लहर के दौरान जहां एक ही क्षेत्र में कई संक्रमित मिले थे तो उसे ‘सोर्स ऑफ इन्फेक्शन’ मानकर कसावट की जाती है। सीएमएचओ डॉ. बीएस सेत्या ने बताया कि आरआरटी टीमें पूरी तरह से सक्रिय हैं। जहां भी नए पॉजिटिव मरीज मिल रहे हैं, वहां टीमें जाकर मरीज को कोविड केयर सेंटर में एडमिट करा रही है।

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