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क्रेडिट का धोखा:इंदौर-पीथमपुर की बड़ी एक्सपोर्ट कंपनियों का डीसीएस खरीद रही थीं मुंबई की छोटी कंपनियां

इंदौर12 दिन पहले
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प्रतीकात्मक फोटो
  • डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड के सलाहकारों की भूमिका संदिग्ध

कैप्सूल कवर और कमर्शियल हेवी वाहन बनाकर विदेश में एक्सपोर्ट करने वाली फार्मा और कमर्शियल मोटर्स कंपनी के डिजिटल सिग्नेचर गैरकानूनी ढंग से उपयोग कर उनकी दो करोड़ की ड्यूटी क्रेडिट स्क्रिप्स (डीसीएस) चुराने वाले गिरोह ने देशभर में जाल फैला रखा है। साइबर सेल की जांच में इस तरह के कारोबार को नियंत्रित करने वाले डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (डीजीएफटी) के स्थानीय स्तर के कुछ जानकार या सलाहकार की भी भूमिका सामने आ सकती है।

मामले में इंदौर, मुंबई, पुणे और यूपी की 14 से ज्यादा कंपनियों को नोटिस भेजे गए हैं, जिन्होंने इसी तरह के रैकेट से जुड़े एजेंट के जरिए ड्यूटी बचाने के लिए नामी कंपनियों की डीसीएस की खरीद फरोख्त की है। एसपी जितेंद्र सिंह ने बताया कि अब तक की जांच में सन एक्सपोज मुंबई की कंपनी ने इस गिरोह के जरिए सबसे ज्यादा नामी कंपनियों की डीसीएस खरीदी है। इस मामले में पकड़े गए आरोपी आशुतोष उर्फ आशु श्रीवास्तव, हिमांशु उर्फ अंशु जैन, अभिषेक ठाकुर को जेल भेज दिया गया है।

वहीं पुणे निवासी राजेश जगताप, हर्षल घोड़के और मनोज लुंकड रिमांड पर हैं। राजेश जगताप स्क्रिप्स ट्रांजैक्शन में अहम भूमिका में रहा है। इसने एक उदाहरण से समझाया कि किसी कंपनी की एक करोड़ की डीसीएस है तो उसे उसके डिजिटल सिग्नेचर से किसी अन्य कंपनी को 80 से 90 लाख में अवैध तरीके से ट्रांसफर कर बेच देते थे, जिसका वे ड्यूटी चुकाने में उपयोग कर लेते हैं। कई स्क्रिप्स तो आरोपियों ने एक से दो लाख रुपए में बेच दी।

पुणे की एक कंपनी ने भी किया साइबर सेल से संपर्क
आरोपी हिमांशु जैन सराफा का डिब्बा कारोबारी रहा है। 50 लाख का घाटा होने पर फर्जीवाड़े में जुड़ गया। इसी तरह केपी टेक इम्पेक्ट्स का मालिक आरोपी मनोज लुंकड व्यापार में घाटे के बाद बैंक के कर्ज को उतारने के लिए जुड़ा। आरोपी आशुतोष श्रीवास्तव इंजीनियर है। ये इंटरनेशनल बिजनेस में एमबीए की डिग्री हासिल करने के बाद अहमद नगर की राइस मिल में काम कर चुका है। निवेश के लिए ग्राहकों को आकर्षित करने में माहिर है। वहीं आरोपी अभिषेक ठाकुर कैपिटल ग्रोथ के नाम से एडवाइजरी कंपनी चलाता था। इसी की एज पैसे वाला कंपनी थी। इंदौर में हुए खुलासे के बाद पुणे की एक कंपनी ने साइबर सेल से डिजिटल सिग्नेचर के जरिए डीएससी बिकने की शिकायत दर्ज कराई थी।

14 कंपनियों को नोटिस : साइबर सेल ने मांगा जवाब
सन एक्सपोर्ट मुंबई, अमृतलाल एंड कंपनी, लूकरेटिव एग्जिम आउट सोर्सिंग पुणे, जेएनएन इंजीनियरिंग पुणे, चिन्मय इंटरप्राइजेस मुंबई, उत्तम इंडस्ट्री मुंबई, आशीष इंटरप्राइजेस मुंबई, आरती इंटरनेशनल मुंबई, बीएल एग्रो इंडस्ट्रीज बरेली (यूपी), मल्होत्रा ऑइल प्रोडक्ट्स कोलकाता, स्पेक्ट्रम केमिकल मुंबई, मिशल इम्पोर्ट मुंबई, ट्रिनिटी इंटरनेशनल मुंबई, डीलक्स सेल्स कार्पोरेशन मुंबई जैसी नामी कंपनियों को नोटिस भेजकर से जवाब मांगा गया है।

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