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धोखाधड़ी:निर्यातक कंपनियों के दो करोड़ के डीसीएस चुराकर बेचे, 5 खातों में आए 1.60 करोड़, अनलॉक में डीसीएस का पता किया तो सामने आया फर्जीवाड़ा

इंदौर8 दिन पहले
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ये आरोपी इन कंपनियों में एजेंट का भी काम कर चुके। इन्होंने लॉकडाउन के दौरान यह धोखाधड़ी की।
  • निर्यात को बढ़ावा देने ड्यूटी क्रेडिट स्क्रिप्स देती है सरकार
  • पकड़े गए आरोपी एक्सपोर्ट का काम संभालने वाले एजेंट हैं

इंदौर और पीथमपुर से कैप्सूल कवर और व्यावसायिक भारी वाहन बनाकर विदेश में निर्यात करने वाली कंपनियों (एरावत फार्मा और वॉल्वो आयशर कमर्शियल मोटर्स कंपनी) के डिजिटल सिग्नेचर चोरी कर दो करोड़ रुपए की ड्यूटी क्रेडिट स्क्रिप्स (डीसीएस) बेचने वाले गिरोह के छह लोगों को साइबर सेल ने गिरफ्तार किया है। ये लोग इन कंपनियों में एक्सपोर्ट का काम संभालने वाले एजेंट हैं।

इनके पांच खातों में 1 करोड़ 60 लाख रुपए ट्रांसफर हुए हैं। इन सभी को फ्रीज कर दिया गया है। एसपी जितेंद्र सिंह के मुताबिक, मामले में तलावली चांदा निवासी आशुतोष उर्फ आशु श्रीवास्तव, वसंत विहार कॉलोनी निवासी हिमांशु उर्फ अंशु जैन, निपानिया पिनेकल ड्रीम्स निवासी अभिषेक ठाकुर, पुणे के राजेश जगताप, हर्षल घोड़के और मनोज लुंकड को गिरफ्तार किया है। गिरोह का संचालन पुणे से हो रहा था। इनके छह साथियों की तलाश भी है।

कमीशन पर दलाल के माध्यम से खाते में डलवाए थे रुपए
पुणे के आरोपी राजेश जगताप ने बताया कि वह आयात-निर्यात करने वाली कंपनियों को एमईआईएस सर्टिफिकेट कमीशन पर देने का काम करता है। घटना में इसी के माध्यम से एज पैसेवाला मार्केट और मनोज लुंकड की कंपनी केपी इम्पेक्ट्स कंपनी के दलाल हर्षल घोड़के के माध्यम से खाते में पैसे डलवाए थे। इसके एवज में उसे लाखों रुपए का कमीशन मिला था। आरोपियों के बताए अनुसार पुणे और मुंबई के एक दर्जन से ज्यादा आरोपियों की तलाश की जा रही है।

डीसीएस के बदले कंपनियां नए सामान भी इंपोर्ट कर सकती हैं
एसपी के मुताबिक, विदेश में निर्यात को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार मर्चेंडाइस एक्सपोर्ट इंडिया स्कीम (एमईआईएस) चलाती है। इसके तहत 2 से 5 प्रतिशत के निर्यात पर फ्री ऑन बोर्ड (एफओबी) मूल्य की ड्यूटी क्रेडिट स्क्रिप्स (डीसीएस) दी जाती है।

इसके बदले में कंपनियां कस्टम ड्यूटी, इंपोर्ट ड्यूटी एवं नए सामान का इम्पोर्ट कर सकती हैं। कंपनियों को विदेश भेजे गए माल पर विदेशी मुद्रा देश में लाने पर माल की कीमत की 2 से 5 प्रतिशत डीसीएस गिफ्ट के रूप में मिलती है, जिसका वे चाहे जैसा उपयोग कर सकती हैं। ये डीसीएस किसी भी कंपनी के लिए 24 माह तक वैलिड होती है। इसे फॉरेन ट्रेड पॉलिसी के तहत वर्ष 2015 से 20 के लिए लागू किया गया था। इस योजना को डीजीएफटी मॉनिटर करता है।

दोनों कंपनियों की 17 ड्यूटी क्रेडिट स्क्रिप्स चोरी कर चुका है गिरोह
16 सितंबर को एरावत फार्मा के देवेंद्र थापक और 7 अक्टूबर को आयशर की ओर से ब्रजेश दुबे ने शिकायत की थी। गिरोह इंदौर की दोनों कंपनियों की 17 ड्यूटी क्रेडिट स्क्रिप्स चोरी कर चुका है। जांच में पता चला कि कंपनियों के एजेंट ही प्रमुख शहरों में कमीशन का लालच देकर नई स्टार्टअप कंपनियों के युवाओं के खातों में ट्रांसफर कर रहे हैं।

अनलॉक में डीसीएस का पता किया तो सामने आया फर्जीवाड़ा
एसपी के मुताबिक, लॉकडाउन में व्यापार नहीं होने से इन कंपनियों ने डीसीएस का उपयोग नहीं किया, लेकिन अनलॉक होते ही इन कंपनियों ने जब अपनी डीसीएस की जानकारी ली तो पता चला वह उपयोग हो चुकी हैं। इसके बाद इस रैकेट का खुलासा हुआ। अभी इस रैकेट में मुंबई, पुणे के और भी आरोपी हैं, जिनकी तलाश की जा रही है।

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