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नहीं थम रही निजी अस्पतालों की मनमानी:6 घंटे में 4 लोगों की मौत, अस्पताल थमा रहे मनमाने बिल; प्रशासन ने दूसरी बार जारी किया प्रतिबंधात्मक आदेश

इंदौर11 दिन पहले
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शहरी सीमा के लिए अपर कलेक्टर अजय देव शर्मा और ग्रामीण एरिया के लिए राजेश राठौर को नोडल अधिकारी बनाया है। ग्रामीण एरिया में कोई शिकायत नहीं, वहीं शहरी सीमा के लिए एक शिकायत लिखिति में आई। - Dainik Bhaskar
शहरी सीमा के लिए अपर कलेक्टर अजय देव शर्मा और ग्रामीण एरिया के लिए राजेश राठौर को नोडल अधिकारी बनाया है। ग्रामीण एरिया में कोई शिकायत नहीं, वहीं शहरी सीमा के लिए एक शिकायत लिखिति में आई।

निजी अस्पतालों में अनाप-शनाप बिल को रोकने के लिए कलेक्टर ने भले ही धारा 144 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश जारी कर दिए हैं, लेकिन इसके पहले भी 4 सितंबर को कलेक्टर द्वारा बिल पर नियंत्रण के लिए आदेश जारी किए थे, जिसका पालन नहीं किया गया। छह अस्पतालों में अलग-अलग मामलों में प्रशासन द्वारा जांच कराई गई, लेकिन कुछ जांच रिपोर्ट के तो अते-पते ही नहीं हैं। वहीं मरीज के पास इसका कोई तरीका नहीं है कि वह पता लगा सके कि प्री कोविड के समय के बेड के चार्ज क्या थे और अस्पताल कितना उनसे ले सकते हैं, क्योंकि प्रतिबंधात्मक आदेश में केवल यह है कि उस समय के चार्ज में अधिकतम 40% जोड़ सकते हैं।

यानी यदि उस समय एक हजार प्रतिदिन चार्ज था, तो अब 1400 ले सकते हैं। हालांकि फोन 10-15 लोगों के आए। अफसरों का कहना है कि अभी भी लोग लिखित में मय दस्तावेज के साथ शिकायत करने की जगह मौखिक ही बोल रहे हैं, ऐसे में जांच मुश्किल है। पीड़ित इनके नंबरों पर दस्तावेज के साथ लिखित शिकायत वाट्सअप करेंगे तो जांच आसान हो सकेगी।

जांच के आदेश, लेकिन रिपोर्ट का आज तक पता नहीं

1. गोकुलदास अस्पताल : 6 घंटे में 4 मौत का मामला बीते साल सामने आया। कुछ दिन मरीजों की भर्ती रुकी रही। जांच के आदेश हुए, लेकिन कुछ नहीं हुआ और बाद में फिर कोविड उपचार शुरू हो गया। अभी यहां 110 मरीज भर्ती हैं।
2. यूनिक अस्पताल : यहां पर मरीज के शव को चूहे द्वारा कुतरने का मामला सामने आया। मजिस्ट्रियल जांच के आदेश हुए। आज तक जांच रिपोर्ट का पता नहीं है।
3. एप्पल अस्पताल : यहां से भी बीते साल अधिक बिल को लेकर शिकायत आई थी, लेकिन इसके बाद रिपोर्ट का पता नहीं। 16 अप्रैल को भी यहां पर कलेक्टर द्वारा दवा दुकान पर जांच कराई तो 28 रेमडेसिविर रखे मिले, जो मरीज को नहीं मिले, दुकान बंद की गई, बाकी कोई कार्रवाई नहीं।
4. मिनेश अस्पताल : राऊ स्थित इस अस्पताल की शिकायत मिलने पर कलेक्टर ने भरी मीटिंग में 16 अप्रैल को यहां पर मरीज भर्ती पर रोक लगाई, लेकिन कुछ नहीं हुआ। अस्पताल संचालक ने अपनी जगह अन्य अस्पताल वाले को ही मीटिंग में उपस्थिति लिखने के लिए बोल दिया।
5. साईं अस्पताल : यहां भी अधिक बिल की शिकायत पर कलेक्टर ने इसी मीटिंग में अगले मरीज भर्ती पर रोक के निर्देश दिए, लेकिन मरीज भर्ती जारी।
6. गौरव अस्पताल : खंडवा रोड स्थित अस्पताल के बिल जब्त कर जांच की गई। एसडीएम कोर्ट ने वारंट जारी कर बुलाया, लेकिन मामला वहीं खत्म हो गया।

(सीधी बात; मनीष सिंह कलेक्टर, इंदौर)

समझाइश खत्म, अब अस्पतालों को तीन कैटेगरी में बांटकर जांच होगी

सवाल : इसके पहले भी आपने सितंबर में आदेश किए थे, लेकिन अस्पताल ने नहीं माने।
जो भी शिकायतें आईं, उन्हें लेकर अस्पताल संंचालकों को लगातार बैठक कर समझाइश देते रहे और उन्हें गलतियां बताई गई।
सवाल : पहले भी कार्रवाई की बात हुई, लेकिन हुआ कुछ नहीं।
मरीजों के उपचार को लेकर भी हम व्यवस्था बनाने में लगे थे। इसलिए समझाइश दे रहे थे और बहुत सख्ती नहीं की।
सवाल : सख्ती के लिए क्या करेंगे?
अस्पतालों को तीन कैटेगरी में बांटेंगे। 50 से कम बेड वाले, 50 से 100 बेड और इससे अधिक बेड वाले। कमेटी रेंडम आधार पर अस्पतालों में जाएगी और तीन मई और इसके बाद के कुछ बिल जांच में लेगी और इसकी जांच करेगी। आदेश का उल्लंघन मिला तो सीधे धारा 188, एपेडमिक एक्ट में केस दर्ज कर सख्त कार्रवाई होगी। 50 से कम बेड वाले अस्पतालों को लेकर शिकायतें आ रही हैं। अनुचित राशि कभी भी किसी को फली नहीं है। वी केयर, यूनिवर्सल, आरके अस्पताल की भी शिकायतें आई है। इन्हें दिखवा रहे हैं।

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