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सबसे ऊपर है राम नाम:श्री बागेश्वर धाम सरकार धीरेंद्रकृष्ण शास्त्री बोले; जहां साइंस खत्म, वहां से आध्यात्म शुरू

इंदौरएक महीने पहले

आज के दौर में अगर टोने-टोटके बढ़ेंगे तो अंधविश्वास बढ़ेगा और धर्म को घाटा होगा। टोने-टोटके से सबसे ऊपर है राम नाम। टोने-टोटके हैं नवग्रह और नवग्रह से ऊपर है अनुग्रह। नवग्रह भले ही आपके विपक्ष में हो लेकिन भगवत अनुग्रह आपके ऊपर है तो आपका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। ऐसा समझे कि यदि कोई मुख्यमंत्री आपका बहुत विरोधी है लेकिन प्रधानमंत्री आपके बहुत सपोर्टर है तो शायद आपका बहुत कुछ नहीं बिगड़ सकता।

यह बात मंगलवार को श्री बागेश्वर धाम सरकार पंडित धीरेंद्रकृष्ण शास्त्री ने पत्रकारों से कही। मोदी मन की बात कहते हैं और आप मन की बात जान लेते हैं, क्या अंतर है दोनों में? इस पर उन्होंने कहा कि मोदी राजनेता है। राजनीति से धर्म नहीं चलता, धर्म से राजनीति चलती है। हम अंतर्यामी नहीं है, चमत्कारी बाबा नहीं है, चमत्कारी व्यक्ति नहीं है। हम साधारण शिव गुरु का चेला, एक साधारण धर्म का उपदेश देने वाले बालक है। रही मन की बात जान लेना, भगवत कृपा है तो इंसान कुछ भी कर सकता है।

पं. धीरेंद्र शास्त्री
पं. धीरेंद्र शास्त्री

जहां साइंस खत्म होता है, वहां आध्यात्म शुरू होता है

उन्होंने मंत्र चिकित्सा को लेकर कहा कि जहां साइंस खत्म होता है, वहां आध्यात्म शुरू होता है। मंत्र चिकित्सा का मतलब है कि तपस्या को किसी माध्यम द्वारा उस शरीर में पहुंचाना। चिकित्सा पद्धति भी शरीर में जाकर बैक्टीरिया का नाश करती है और उससे लड़ने वाले सेल बनाती है। मंत्र भी यही काम करते हैं। हमें बालाजी ने सेवा के लिए चुना। बागेश्वर धाम के मूल स्थान सहित उत्तराखंड में कई स्थान हैं। बागेश्वर स्वयंभू महादेव हैं व स्वयंभू हनुमान जी हैं।

पं. मिश्रा के टोटकों से मंदिर में भीड़ बढ़ रही तो अच्छी बात है

उन्होंने कहा कई लोग कथा में नहीं जाते हैं, भगवान को नहीं मानते हैं। लेकिन कहीं न कहीं सनातन को मानते हैं और इसलिए किसी चमत्कार का इंतजार करते हैं। कथा वाचक पं. प्रदीप मिश्रा द्वारा कथा में टोने-टोटके व अंधविश्वास बढ़ाने के मामले में कहा कि इससे मंदिरों में भीड़ बढ़ रही है, लोग आध्यात्म की ओर जा रहे हैं तो बहुत अच्छी बात है। अगर उनके (पं. प्रदीप मिश्रा) कहने से अगर मंदिरों में भीड़ लग रही है तो अच्छा है।

भक्ति और अंधविश्वास में अंतर

उन्होंने कहा कि भक्ति और अंधविश्वास में अंतर है। भगवान को जल चढाना, तिलक लगाना अंध विश्वास नहीं है। हवन या पूजा के नाम चमत्कार हो जाए यह भक्ति है। इसके बाद जो है वह अंध विश्वास है। अगर कोई टोना-टोटका, हरी चटनी, लाल चटनी कुछ भी बताता है तो पहले देखो, समझो। अगर शास्त्र सम्मत बात है तो उसका अनुसरण करना। हनुमान चालीसा व राम नाम में अपार शक्ति है? हनुमान चालीसा पावर हाउस है।

ज्ञानवापी में शिव-शंकर विराजमान हैं, कुरान में नहीं है ज्ञानवापी

उन्होंने कहा कि हनुमान चालीसा को अगर राजनीतिक मुद्दा बनाया जा रहा है तो यह देश का व हमारा दुर्भाग्य है। यह राजनीति का विषय नहीं है। यह व्यास नीति का विषय है। ज्ञानवापी मामले में कहा कि वहां शि‌व है, इसमें कोई संदेह नहीं है, वहां शंकरजी विराजमान है। न्यायालय उस पर काम कर रहा है। हमारा विश्वास है कि सनातन की जीत होगी। जैसे राम मंदिर में जीत हुई वैसी ही ज्ञानवापी में भी होगी। कौन से कुरान में ज्ञानवापी शब्द आया है, बताइये। ज्ञान का कुंआ ही ज्ञानवापी है।

ये सब भी बोले

- हमारी पार्टी का नाम बजरंग बली की पार्टी, उसका नारा है जो राम का नहीं है वह किसी का नहीं।

- देश में गुरुकुल की व्यवस्था जरूर होना चाहिए।

- जहां राम कथा होती है, वहां 70 प्रतिशत मांस-मदिरा पर रोक लग जाती है।

- आत्मरक्षा के लिए बोलना अगर भड़काऊ बयान है तो यह होते रहना चाहिए। कोई आपकी बहन के साथ लव जेहाद के चक्कर में कहीं ले जाएं, कत्ल करें तो क्या आप मौन रहेंगे।

- माता-पिता व गुरु ही ब्रह्मा, विष्णु महेश हैं।

- मातृ-पितृ की आज्ञा मानेंगे, गृहस्थ जीवन में जाएंगे। फिर आगे देखेंगे।

- नित्य हवन करो, राम कथा पढ़ो। जो परमात्मा से जुड़ने की बात करता है वह सत्य है।

- अगर कोई कथा को बेच रहा है तो खरीदार कौन है। असली जिम्मेदार तो वे हैं जो खरीद रहे हैं।