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चर्चा में त्योहार, कोरोना और राजनीति:इंदौर के सबसे पुराने ठिये में से एक टोरी कॉर्नर पर सालभर बाद फिर शुरू हुई चाय पर चर्चा

इंदौरएक महीने पहलेलेखक: गौरव शर्मा
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चर्चा में राजनीति भी रही। सभी ने कहा जहां चुनाव वहां संक्रमण नहीं है क्या? - Dainik Bhaskar
चर्चा में राजनीति भी रही। सभी ने कहा जहां चुनाव वहां संक्रमण नहीं है क्या?
  • ‘इस बार भी छिन गई गेर, गनीमत है होली की परंपरा तो निभा पाए’

कोरोना संक्रमण के बीच जहां रविवार-सोमवार लॉकडाउन, जल्दी बाजार बंद होने की चर्चाएं हैं, वहीं, इंदौर के सबसे पुराने ठिये में से एक ‘टोरीकॉर्नर’ पर सालभर से ज्यादा समय बाद फिर चाय पर चर्चा शुरू हुई। शहर से लेकर राजनीतिक और अन्य बातों का केंद्र रहे इस ठिये पर इस बार चर्चा का स्वरूप बदला सा दिखा। जो लाजिमी भी था। इस बार यहां चर्चा शुरू हुई खुद से, परिवार और फिर सामाजिक, राजनीतिक, त्योहारों पर। हालांकि चर्चा के केंद्र में रहा कोरोना संक्रमण।

कोमल गिरि : एक साल हो गया। कोरोना खत्म नहीं हुआ। अब तो आंकड़े लगातार बढ़ रहे हैं। डर सा लग रहा है?

सुनील माहेश्वरी: वैक्सीन लगवाया। सामने से ज्यादातर के जवाब आए। हां। अब इसके साथ मास्क लगाएं। इम्युनिटी बढ़ाएं। कोविड गाइडलाइन का पालन करें, कोरोना से सबसे बड़ा बचाव यही है।

अभिषेक जोशी: मार्केट में भीड़ बढ़ रही, इसका क्या? बाजार भी जल्दी बंद होने लग गए हैं?

सामने से जवाब आया : लॉकडाउन लग गया। अब इसे दोबारा नहीं लगना चाहिए। जिम्मेदारी हम सभी की है। हम अपना ध्यान खुद रखें। (इसी बीच एक ने विरोध किया, गजब का लॉकडाउन है। खाने-पीने की दुकानें नौ बजे बंद। लोगों को दूध नहीं मिलेगा लेकिन शराब की दुकानें देर रात तक चालू, ये कैसा लॉकडाउन। नियम एक जैसे हो। राजनीतिक आयोजन भी बंद हो। यहां से कोरोना से अब दूसरे विषय पर बातचीत बदली)

महंत महेश गिरि: इस बार भी रंगपंचमी पर गेर नहीं निकलेगी। सात दशक पुरानी परंपरा इस बार भी नहीं निकलेगी। (इधर, बैठक के पीछे रंगपंचमी समिति का बैनर देख एक ने पूछा इसे क्यों लगाया?

सामने से जवाब: गेर नहीं निकल रही। यह बैनर तो कम से कम लगा लिया ताकि लगे कि यह हमारी शहर की परंपरा में से एक है।

जोशी: वाकई अपने इंदौर की गेर तो गेर ही होती है। असल मायने में वह आजादी है। आजादी से मायने न कोई रोकने वाला न टोकने वाला। (सामने से सभी बोले, हां ये बात सही है। लेकिन यह बात भी है कि अपनी आजादी इस बार भी छिन गई क्योंकि गेर नहीं निकलेगी।)

शैलेष चतुर्वेदी: रंगपंचमी चलो गनीमत है प्रशासन ने होलिका दहन की छूट तो कम से कम दे ही दी।

लोकेंद्र चौहान: पिछले साल जब लॉकडाउन लगा था, तब क्या था कुछ नहीं। घर में ही रहे। अब तो वैक्सीन भी आ गई। इसी के साथ लोग जीने लगे हैं। आगे बढ़ने लगे हैं। कोरोना संक्रमण बढ़ा जरूर, लेकिन लोग अब इसी के साथ आगे बढ़ रहे हैं।

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