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महामारी में मुनाफाखोरी:डायल्यूट नहीं हुआ तो डॉक्टरों ने पकड़ लिया नकली है, बची परिवार की जान

इंदौरएक महीने पहले
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सुनील मिश्रा। - Dainik Bhaskar
सुनील मिश्रा।
  • व्यापारी को सुनील ने बेचे थे 36 हजार में 5 नकली इंजेक्शन

नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन को लेकर जांच कर रही विजय नगर पुलिस को महालक्ष्मी नगर में रहने वाले व्यापारी (परिवर्तित नाम नीलेश अग्रवाल) ने पुलिस को बताया कि भोपाल में उनके साढ़ू भाई, उनके सगे भाई, साली और सास को एक निजी अस्पताल में भर्ती किया गया था।

कोरोना संक्रमण के चलते डॉक्टरों ने उन्हें रेमडेसिविर इंजेक्शन लगाने के लिए कहा तो इंदौर में सोशल मीडिया के जरिये उन्होंने सुनील मिश्रा से संपर्क किया। सुनील ने 36 हजार में पांच इंजेक्शन दिए। इंजेक्शन लेने के बाद उन्होंने अपने कुछ परिचितों (मायलन कंपनी से जुड़े) को दिखाया तो उन्होंने शंका जताई।

बाद में इंजेक्शन भोपाल भेजे तो वहां डॉक्टरों ने मरीजों को लगाने से पहले उसे डायल्यूट किया, लेकिन नमक-ग्लूकोज का इंजेक्शन नहीं घुला। इस पर डॉक्टरों ने उसे नकली इंजेक्शन बताते हुए नहीं लगाया। इससे परिवार के लोगों की जान बच गई। बाद में सुनील ने मोबाइल बंद कर लिया था।

अस्पताल संचालक को बयान देने के लिए थाने बुलाया

पुलिस ने शनिवार को सुनील मिश्रा से जुड़े यूथ कांग्रेस के नेता प्रशांत पाराशर से पूछताछ की। टीआई तहजीब काजी के मुताबिक, आरोपी प्रशांत पाराशर ने सीधे दवा कारोबारी आशीष ठाकुर से संपर्क किया था। आशीष से पहले 24 इंजेक्शन, दूसरी बार में 52 इंजेक्शन मंगवाए थे।

समाजसेवा करने के बहाने प्रशांत ने भी इंजेक्शन ऊंचे दामों पर बेचे, इसलिए उसे आरोपी बनाया है। अब तक तीन परिवारों ने नकली इंजेक्शन से परिजन के मृत होने के दस्तावेज दिए हैं। हमने उनके मृत्यु सर्टिफिकेट लिए हैं।

जबलपुर में फर्जी आईडी से मंगवाए गए थे रेमडेसिविर

सूरत में बने नकली इंजेक्शन की खेप इंदौर से जबलपुर मंगवाने के लिए सिटी अस्पताल के संचालक सरबजीत सिंह मोखा के कहने पर फर्जी आइडी का इस्तेमाल किया गया था। उधर इस मामले की महत्वपूर्ण कड़ी सिटी अस्पताल कर्मी देवेश चौरसिया को पांच दिन की रिमांड पर लेकर एसआईटी उससे पूछताछ में जुटी है।

एसआईटी ने इंदौर से लाए गए प्रखर कोहली से पूछताछ की। उससे पता चला कि इंदौर से इंजेक्शन की खेप जबलपुर भेजने के लिए सिटी अस्पताल के संचालक सरबजीत सिंह मोखा के कहने पर उसे जो आईडी भेजी गई थी, उस आधार पर उसने अम्बे ट्रैवल्स से इंजेक्शन जबलपुर भेजे गथे।

जांच में यह आईडी फर्जी मिली है। इस जानकारी के बाद अब पुलिस उस आईडी की तलाश में जुटी गई है। वह आईडी किसकी थी और मोखा उसका इस्तेमाल कैसे कर रहा था।

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